मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> अमेरिकी की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के अस्पताल में सामने आया मामला, वैज्ञानिकों ने इसे यूरिनरी ऑटो-ब्रेवरी सिंड्रोम बताया

अमेरिकी की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के अस्पताल में सामने आया मामला, वैज्ञानिकों ने इसे यूरिनरी ऑटो-ब्रेवरी सिंड्रोम बताया

नई दिल्ली 28 फरवरी 2020 । अमेरिका की 61 साल की एक महिला के शरीर में शराब यानी अल्कोहल बन रहा है। यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दुर्लभ स्थिति है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में यूरिनरी ऑटो-ब्रेवरी सिंड्रोम कहते हैं। ऐसे मामले में ब्लेडर में अल्कोहल बनता है। मामला अमेरिका की पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के अस्पताल में सामने आया है। बुजुर्ग लिवर सिरोसिस और डायबिटीज से जूझ रही हैं। उनका लिवर ट्रांसप्लांट होना था, लेकिन डोनर नहीं मिलने के कारण यह नहीं हो पाया। महिला को अल्कोहल एब्यूज ट्रीटमेंट की सलाह दी गई है।

यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग मेडिकल सेंटर में महिला की कई जांच की गईं, सभी टेस्ट पॉजिटिव पाए गए। इससे आशंका बढ़ी कि वे शराब पीने की बात को छिपा रही है। इसे समझने के लिए ब्लड टेस्ट कराया गया, लेकिन खून में अल्कोहल के प्रमाण नहीं मिले। एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित केस रिपोर्ट के मुताबिक, महिला की यूरिन में ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा निकली, जिसे हाइपरग्लाइकोसूरिया कहते हैं।

डायबिटीज की मरीज होने के कारण यूरिन में शुगर की मात्रा ज्यादा पाई गई। शोधकर्ताओं के मुताबिक, महिला के ब्लेडर में काफी मात्रा में यीस्ट जमा हैं, जो शुगर (ग्लूकोज) को एथेनॉल में बदल रहे हैं। यीस्ट ने लगातार फर्मेंटेशन (ग्लूकोज को एथेनॉल में बदलना) की प्रक्रिया जारी रखी और नतीजातन ब्लेडर में एथेनॉल (अल्कोहल) का स्तर बढ़ता गया।

महिला के शरीर में मौजूद यीस्ट का नाम कैंडिडा ग्लैबेरेटा है, जो आमतौर पर शरीर में पाया जाता है। महिला में यह जितनी मात्रा में मिला, ऐसा बहुत कम मामलों में होता है। कई बार इसे एंटी-फंगल ट्रीटमेंट की मदद से हटाने की कोशिश की गई, लेकिन नाकामी मिली। इस दौरान ब्लड शुगर भी बढ़ती गई।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

31 जुलाई तक सभी बोर्ड मूल्यांकन नीति के आधार पर जारी करें परिणाम, सुप्रीम कोर्ट ने दिए आदेश

नई दिल्ली 24 जून 2021 । देश के सभी राज्य बोर्डों के लिए समान मूल्यांकन …