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मध्‍यप्रदेश में आदिवासी किसानों के नाम पर 100 करोड़ की गड़बड़ी

भोपाल 12 अक्टूबर 2019 । पिछली सरकार के दौरान प्रदेश में किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी गड़बड़ियां उजागर होने लगी हैं। आदिवासी किसानों को जैविक खेती के लिए खाद सहित अन्य सामग्री देने नाम पर सौ करोड़ रुपए की योजना में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इसमें अधिकांश किसानों को न तो खाद मिली और न ही कोई अन्य सामग्री। जिन्हें खाद मिली थी तो उसमें राख, मिट्टी और तरल पदार्थ के नाम पर पानी टिका दिया गया।

कांग्रेस के विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने विधानसभा में इसे आदिवासियों के नाम पर बड़ा घोटाला करार देते हुए जांच की बात उठाई थी। आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ने विधायकों के आरोपों का साथ देते हुए पूरी योजना को कागजी करार दिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कृषि विभाग ने सात विधायक और कृषि व आदिम जाति कल्याण के अधिकारियों की कमेटी बनाकर जांच कराने का फैसला किया है।

सूत्रों के मुताबिक आदिम जाति कल्याण विभाग ने 20 जिलों के आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया व भारिया किसानों को कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा के उत्पादन में सहयोग और प्रोसेसिंग, पैकेजिंग व मार्केटिंग के लिए सौ करोड़ रुपए कृषि विभाग को वर्ष 2017-18 में दिए थे। विभाग का मकसद साफ था कि जैविक खेती करने वाले आदिवासी किसानों को उन्न्त खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए और उनके लिए खेती लाभ का सौदा बने, इसके प्रयास हों।

कृषि विभाग ने इस राशि का इस्तेमाल बायोलॉजिकल नाइट्रोजन, हरी खाद के प्रयोग के लिए सहायता, तरल जैव उर्वरक सहायता, जैव पेस्टीसाइड, फॉस्फेट रिच ऑर्गेनिक मेन्योर प्रयोग के लिए सहायता एवं प्रोसेसिंग, पैकिंग मटेरियल विथ पीजीएस लोगो में करने को मिलाकर कार्ययोजना बनाई थी।

तीन जुलाई 2017 को आदिम जाति कल्याण विभाग ने बायोपेस्टीसाइड को छोड़कर वर्मीकंपोस्टिंग को शामिल करते हुए योजना को मंजूरी दे दी। परियोजना संचालक (आत्मा) ने प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और हर जिले के ब्रांडनेम उत्पाद के क्षेत्र में कोई काम नहीं किया और न ही राशि खर्च की।

सितंबर 2018 में जैविक कृषि आदान सहायता अनुदान कार्यक्रम के लिए मिले सौ करोड़ रुपए से 14 जिले के लिए लक्ष्य तय किए गए, लेकिन जमीन पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। विधानसभा में फुंदेलाल सिंह मार्को ने ध्यानाकर्षण के जरिए इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि राशि की बंदरबांट की गई। कागजों में लीपापोती कर आदिवासियों के नाम पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया। अन्य विधायकों ने भी आरोपों का समर्थन करते हुए जांच की बात उठाई।
सूत्रों का कहना है कि जब कृषि मंत्री सचिन यादव सदन में जवाब देने की तैयारी कर रहे थे, तब आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार सिंह मरकाम दस्तावेज का पुलिंदा लेकर बैठक में आए थे और उन्होंने इसे बड़ा भ्रष्टाचार का मामला करार देते हुए जांच कराने की बात कही थी।

कृषि विभाग से ज्यादा तैयारी आदिम जाति कल्याण विभाग की थी, क्योंकि राशि उन्होंने ही दी थी। सूत्रों का कहना है कि एमपी एग्रो को खाद सहित अन्य सामग्री की आपूर्ति का जिम्मा सौंपा गया था। एग्रो ने निजी कंपनियों को ठेका दिया।

आरोप है कि जो सामग्री वितरित की गई वो बेहद घटिया थी। खाद में राख व मिट्टी की मात्रा अधिक होने और तरल पदार्थ में खाद की जगह पानी पाया गया, जो बेअसर रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने कमेटी बनाकर जांच कराने के निर्देश दिए थे।

इसके मद्देनजर कृषि विभाग ने विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को, नीलांशु चतुर्वेदी, संजय उइके, योगेंद्र सिंह, प्रताप ग्रेवाल, सुनील सर्राफ और विजय राघवेंद्र सिंह के अलावा आयुक्त अनुसूचित जनजाति कल्याण व संचालक कृषि की समिति बना दी है। समिति पूरे मामले में अनियमितता की जांच करके रिपोर्ट विभाग को सौंपेगी।

किसानों को यह चीजें दी जानी थी

बायोलॉजिकल नाइट्रोजन, वर्मीकंपोस्टिंग, हरी खाद प्रयोग के लिए सहायता, तरल जैव उवर्रक सहायता, जैव पेस्टीसाइड, फॉरेस्ट रिच ऑर्गेनिक मेन्योर प्रयोग के लिए सहायता एवं प्रोसेसिंग, पैकिंग मटेरियल विथ पीजीएस लोगो।

इन जिलों में लागू हुई थी योजना

मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, दतिया, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, छिंदवाड़ा।

एक दिन में 7 करोड़ पौधे लगाने की सनक

450 करोड़ की के घोटाले के आरोप
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की एक सनक के कारण राज्य सरकार के खजाने को 450 करोड़ का नुकसान हुआ है। गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड में अपना नाम दर्ज कराने के चक्कर में शिवराज ने जुलाई 2017 में एक ही दिन में नर्मदा किनारे 7 करोड़ पौधे लगाने का फरमान सुनाया। अधिकारी मना करते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री की सनक के सामने किसी की नहीं चली। 30 प्रतिशत पौधे भी नहीं लगे और बजट पूरा निकाल लिया गया। कमलनाथ सरकार ने अब इस पर सख्त कदम उठाते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार सहित 6 अधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश के वनमंत्री उमंग सिंघार ने आज पत्रकार वार्ता में शिवराज सरकार की बड़ी पोल खोल कर रख दी है। उन्होनें बताया कि अधिकारी मना करते रहे, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने एक दिन में 7 करोड़ 10 लाख 39 हजार 711 पौधे लगाने का कथित झूठा रिकॉर्ड बनाते रहे। मजेदार बात यह है कि इतने सारे पौधे 20 रुपए से 200 रुपए के दर पर खरीदना दिखाया गया। इनके लिए गड्ढे करना दिखाया गया और इनके रोपण खाद्य और पानी के नाम पर भी करोड़ों रुपए निकाले गए। सरकारी रिकॉर्ड में 1 लाख 21 हजार 275 स्थानों पर 7.10 करोड़ पौधों की घोषणा की गई जबकि गिनीज बुक वल्र्ड ऑफ रिकॉर्ड को बताया गया कि मात्र 5 हजार 540 स्थानों पर 2 करोड़ 22 लाख 28 हजार 954 पौधे ही लगाए गए। यानि 3 गुना भ्रष्टाचार तो पहले ही साफ दिखाई दे रहा है। वनमंत्री का दावा है कि मात्र 5 से 7 प्रतिशत पौधे ही लगे हैं।

अधिकारी देते हैं गलत जानकारी
वनमंत्री ने पत्रकार वार्ता में स्वीकार किया कि शिवराज कार्यकाल में हुए पौधा रोपण कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी वनमंत्री को ही गलत जानकारियां दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि बैतूल के शाहपुर परिक्षेत्र में वृक्षारोपण की जानकारी मांगने पर अधिकारियों ने बताया था कि 2 जुलाई 2017 को 15625 पौधे रोपे गए इनमें से 11 हजार 140 पौधे जीवित हैं। जबकि 27 जून 2019 को स्वयं वनमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौका मुआयना किया तो मौके पर मात्र 2343 पौधे ही जीवित मिले। इस स्थान पर पौधों के लिए गड्ढे भी मात्र 9 हजार 985 ही खोदे गए थे। उन्होनें कहा कि गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

आईएएस एपी श्रीवास्तव की भूमिका
मजेदार बात यह है कि इस पूरे मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी एपी श्रीवास्तव की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जिस समय यह घोटाला हुआ तब वे प्रमुख सचिव वित्त थे। उनके द्वारा ही इस घोटाले की राशि की वित्तीय अनुमतियां दी गईं। वर्तमान में श्रीवास्तव वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव हैं। वनमंत्री ने उन्हें ही नोटशीट लिखकर इस घोटाले की शिकायत ईओडब्ल्यू को करने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय में चर्चा है कि जिस अधिकारी ने स्वयं घोटाले की राशि जारी की है वह इसकी शिकायत कैसे कराएगा?

Farm loan of only Rs 50,000 waived, not Rs 2 lakh, says Jyotiraditya Scindia

All India Congress Committee general secretary, Jyotiraditya Scindia, has taken pot shots at the Kamal Nath government in Madhya Pradesh for failing to fulfil the promise made by the Congress to write off crop loans of farmers up to Rs 2 lakh each, creating a ripple in the ruling party.

Mr Scindia’s attack on Chief Minister Kamal Nath incidentally came ahead of the October 21 by-election to Jhabua (ST) Assembly constituency in MP, billed as crucial for the ‘minority’ Congress government in the state. A victory for the ruling party in the by-election would help it gain majority in the house.

Addressing party workers in Bhind in MP on Thursday, Mr Scindia said, “Crop loan up to Rs 50,000 each for farmers could be waived but we have promised to write off farm loans up to Rs 2 lakh.”

Mr Scindia also took strong exception to the failure of the state government to release compensation to farmers who had suffered crop losses due to heavy rains and floods in the state.

Incidentally, Mr Scindia had a couple of days ago called for introspection by the top leadership of the Congress to save the party from being doomed.

State PWD minister Sajjan Singh Verma, a staunch loyalist of the chief minister, on Friday pulled up Mr Scindia for attacking Mr Nath. “Mr Scindia should know that Mr Nath is not only our Chief Minister but his chief minister too,” he remarked.

The opposition BJP grabbed the opportunity to attack the Kamal Nath government on the loan waiver issue.

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