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12वीं के छात्र पढ़ रहे हैं ‘राम ने किया सीता का अपहरण’

नई दिल्ली 2 जून 2018 । यह तो बच्चा-बच्चा जानता है कि रामायण की नायिका देवी सीता का अपहरण रावण ने किया था, लेकिन गुजरात के स्कूलों में कक्षा 12वीं के छात्रों को रामायण के बारे में कुछ और ही पढ़ाया जा रहा है. दरअसल, गुजरात में 12वीं की संस्कृत विषय की किताब में एक बड़ी गलती सामने आई है, जिसने रामायण की कहानी को ही बदल कर रख दिया.

किताब में सीता का अपहरण करने वाले का नाम रावण नहीं राम बताया गया है. किताब में लिखा गया है-‘राम ने किया था सीता का अपहरण’. बता दें कि ‘इंट्रोडक्शन टू संस्‍कृत लैंग्‍वेज’ नामक इस किताब के 106 नंबर पेज पर इसका जिक्र है.

ये एक ऐसी गलती है जिसे कोई बच्चा भी पकड़ सकता है. इस किताब में जहां लिखा होना चाहिए था कि रावण ने सीता का अपहरण किया.

इस किताब में लिखे पैराग्राफ के मुताबिक, ‘यहां कवि ने अपनी मौलिक सोच और विचार से राम के चरित्र की बेहतरीन तस्वीर खींची है. राम द्वारा सीता का अपहरण कर लिए जाने के बाद लक्ष्मण द्वारा राम को दिए गए संदेश का वर्णन किया गया है.

यह गलती सिर्फ इंग्लिश मीडियम की किताबों में है. संस्‍कृत के महान कवि कालिदास की रचना ‘रघुवंशम’ पर आधारित पाठ में गुजराती किताबों में यह गलती नहीं है. उसमें यह पैराग्राफ सही लिखा गया है.

बिप्लब के महाभारत के बाद दिनेश शर्मा का रामायण ज्ञान- टेस्ट ट्यूब से पैदा हुई थीं सीता

त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देव के बाद उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने भी अटपटा बयान दिया है. मथुरा में हिंदी पत्रकारिता दिवस के एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीता जी का जन्म मिट्टी के बर्तन से हुआ था, यानी उस समय भी टेस्ट ट्यूब से बच्चे पैदा करने का कॉन्सेप्ट था.

दिनेश शर्मा ने कहा कि सीता जी भी टेस्ट ट्यूब बेबी हो सकती हैं. उन्होंने कहा, ‘रामायण काल में माता सीता का जन्म एक मिट्टी के बर्तन यानी घड़े से हुआ था, यानी रामायण के समय में टेस्ट ट्यूब बेबी की तकनीक रही होगी.’

नारद पहले पत्रकार

यही नहीं, अपने संबोधन में दिनेश शर्मा ने महाभारत और रामायण काल की तकनीक का जमकर बखान किया और नारद भगवान को पहला पत्रकार भी बताया. हिंदी पत्रकारिता दिवस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की शुरुआत आधुनिककाल में ही नहीं हुई थी, ये तो महाभारत काल से चली आ रही है. उन्होंने कहा कि नारद जी पहले पत्रकार थे.

भारत में हुई परमाणु की खोज

महाभारत काल पर ‘ज्ञान’ देते हुए उन्होंने दावा किया कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति, प्लास्टिक सर्जरी और परमाणु की खोज भी कहीं और नहीं बल्कि भारत में हुई थी. यही नहीं उन्होंने महाभारत काल की तकनीक का बखान करते हुए कहा कि उस समय भी उत्तम तकनीक मौजूद थी.

महाभारत काल में होता था लाइव टेलीकास्ट

इस कड़ी में उन्होंने संजय और धृतराष्ट्र का भी उदाहरण दिया और बताया कि उस समय भी लाइव टेलीकास्ट होता था. हस्तिनापुर से ही बैठे-बैठ संजय कुरुक्षेत्र में हो रहे महाभारत के युद्ध का दृष्टांत धृतराष्ट्र को बताते थे.

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