मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> हिंदुत्‍व को जानने आए थे 13 रूसी नागरिक, ऐसा हुआ लगाव कि बन गए हिंदू

हिंदुत्‍व को जानने आए थे 13 रूसी नागरिक, ऐसा हुआ लगाव कि बन गए हिंदू

हिसार 25 फरवरी 2020 । हिंदुत्‍व को करीब से जानने और तीर्थ स्थलों को देखने की मंशा से रूस से भारत आए 13 रूसी नागरिक अब नई पहचान के साथ स्‍वदेश लौटेंगे। हिंदू धर्म और पूजा-पद्धति से प्रभावित होकर भिवानी के बाबा जहरगिरी आश्रम में हिंदू धर्म अपनाने वाले इन विदेशी नागरिकों ने स्वदेश लौटने के बाद मास्को में शिव मंदिर बनवाने का निर्णय लिया है। वहां ये हिंदू धर्म पद्धति के अनुसार यज्ञ अनुष्ठान तो करवाएंगे ही, हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार भी करेंगे।

ऐसा होते ही छोटी काशी भिवानी से निकली वैदिक परंपरा की गूंज विदेशी धरती पर भी सुनाई देने लगेगी। भिवानी में वैदिक परंपरा की दीक्षा लेने वाले 13 रूसी लोगों ने भिवानी और मास्को के बीच गुरु शिष्य का ऐसा नाता जोड़ा है कि लंबे समय तक रूस में हिंदुत्‍व पल्लवित-पुष्पित होता रहेगा। इनके लौटने के बाद फरवरी में रूसी छात्रों की टीम भी भिवानी आएगी। ये विद्यार्थी भी वैदिक परंपरा की दीक्षा लेंगे। इसके बाद भिवानी के संत मास्को जाएंगे। वहां 1 से 7 मई तक मास्को में रहकर हवन यज्ञ आदि करके वैदिक परंपरा का प्रचार-प्रसार करेंगे।ऐसे आए एक-दूसरे के करीब
बाबा जहरगिरी पीठाधीश्वर महंत डा. अशोक गिरी के शिष्य संगम गिरी बताते हैं कि सबसे पहले गलिना जिनका नया नाम गायत्री है, हमारे गुरुजी अशोक गिरी के संपर्क में आईं। वहां वे योग शिक्षक हैं। योग में दुनिया भारत को गुरु मानता है और योगेश्वर शिव की गलिना के मन में भी श्रद्धा थी। अशोक गिरी 2017 में शक्ति पीठ कामख्या असम गए थे। वहां गलिना के संपर्क में आए। उन्होंने वहां लंबी बातचीत की। दोनों को ही अंग्रेजी का बेहतर ज्ञान होने के कारण भाषा समस्या नहीं बनी और उन्होंने अपने-अपने ज्ञान और भावों का आदान-प्रदान किया। इसके बाद जूना अखाड़ा के भी इसी साल वे संपर्क में आए। संगम गिरी ने बताया कि मास्को में वह खुद जून 2018 में गए थे और एक माह रुक कर आए थे। इसके बाद 2018 सितंबर में दोबारा मास्को गए और दो माह तक वैदिक परंपरा का प्रचार करके आए। इसके बाद वहां से भारत और खासकर भिवानी आने वाले रूसी लोगों की संख्या बढ़ गई है।

सबसे पहले इटली की तारागिरी पहुंची थी भिवानी
संगम गिरी बताते हैं कि भिवानी से विदेशियों के लगाव की बात करें तो यहां सबसे पहले इटली की तारागिरी आई थी। वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। फिलहाल वह सन्यासी बन चुकी हैं। यह वर्ष 2002 की बात हैं। तारागिरी ने देशभर के अनेक धार्मिक स्थल देखे पर भिवानी उनको ज्यादा सही लगा तो वह यहां से जुड़ गई।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- ‘कांग्रेस न सदन चलने देती है और न चर्चा होने देती’

नई दिल्ली 27 जुलाई 2021 । संसद शुरू होने से पहले भाजपा संसदीय दल की …