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1998-52, 2003-47, 2008-43, 2013-8 और फिर शून्य पर शून्य

नई दिल्ली 12 फरवरी 2020 । दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम भारतीय जनता पार्टी के लिए तो बड़ा झटका है ही लेकिन उससे बड़ा झटका कांग्रेस पार्टी के लिए है। 2013 तक लगातार 15 साल राज करने वाली कांग्रेस पार्टी पिछले 2 विधानसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पायी है। 2015 में भी कांग्रेस पार्टी को शून्य सीट मिली थी और अब 2020 में भी शून्य से ही संतोष करना पड़ रहा है। सीटें तो सीटें, कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर भी ऐसे कम हुआ है मानों वह कभी दिल्ली की राजनीति में थे ही नहीं।

कांग्रेस पार्टी को 2020 में लगभग 4 प्रतिशत वोटों से संतोष करना पड़ा है, 2015 में पार्टी को लगभग 9 प्रतिशत वोट मिले थे। 2019 में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान मत प्रतिशत के लिहाज से कांग्रेस पार्टी दिल्ली में आम आदमी पार्टी को तीसरे नंबर पर धकेल दूसरे नंबर पर आ गई थी और तब ऐसा लगा था कि पार्टी विधानसभा चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन करेगी। लेकिन यह हो न सका और आपसी कलह, नकारा नेतृत्व तथा खराब चुनाव प्रबंधन की वजह से कांग्रेस पार्टी के हाथ इस बार भी शून्य ही लगा।

कांग्रेस पार्टी को अपनी दिवंगत नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की कमी बहुत ज्यादा खल रही होगी। 1998 में शीला दीक्षित पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं थी और उस समय दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी को 52 सीटों पर जीत मिली थी, शीला दीक्षित के ही नेतृत्व में पार्टी ने 2003 का विधानसभा चुनाव लड़ा था और उस साल भी कांग्रेस पार्टी 47 सीटों पर जीत प्राप्त करने में कामयाब हुई थी, 2008 में एक बार फिर से शीला दीक्षित के नेतृत्व मे चुनाव हुआ था और कांग्रेस पार्टी तब भी 43 सीटें जीतने में कामयाब हुई।

लेकिन 2013 के विधानसबा चुनावों में पार्टी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से शीला दीक्षित और कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और पहली बार दिल्ली में अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने। लगातार 15 साल सत्ता में रहने के बाद ऐसी संभावना थी कि 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन कुछ सुधर सकता है, लेकिन 2015 में दिल्ली की जनता ने कांग्रेस पार्टी को शून्य पर धकेल दिया और अब 2020 में एक बार फिर से कांग्रेस के हाथ घटे हुए वोट शेयर के साथ शून्य ही लगा है।

दिल्ली चुनाव नतीजों के बाद बीजेपी को घेरने की विपक्ष की तैयारी, शरद पवार ने कही ये बात…
दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा को करारी शिकस्त देते हुए आम आदमी पार्टी के एक बार फिर से प्रचंड जीत हासिल करने पर राकांपा प्रमुख शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि ये नतीजे देश में ‘बदलाव के मूड’ के प्रतीक हैं. साथ ही, उन्होंने भगवा दल को सत्ता से बाहर रखने के लिए राज्यों में क्षेत्रीय दलों के एकजुट होने की जरूरत पर जोर दिया. चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में 62 पर जीत दर्ज की है. भाजपा ने आठ सीटों पर जीत हासिल की है. हालांकि, कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाया है.

पवार ने कहा कि दिल्ली चुनाव के नतीजों ने संकेत दिया है कि देश में ‘बदलाव की हवा’ बह रही है. उन्होंने कहा, ‘‘आज का नतीजा सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न राज्यों के लोग रहते हैं. उनके अपने राज्यों में भी बदलाव का माहौल है जो उन्होंने दिल्ली में मतदान के दौरान प्रकट किया.” पवार ने कहा कि क्षेत्रीय दलों या विकल्पों (भाजपा के) अपने-अपने राज्यों में मजबूत होने का रुझान है. उन्होंने क्षेत्रीय दलों के एक साझा न्यूनतम कार्यक्रम के तहत एकजुट होने और भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए एक स्थिर सरकार मुहैया करने पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, ‘‘केरल में वाम पार्टी है … महाराष्ट्र में हमने कुछ प्रयोग किया. इसका मतलब है कि आगे बढ़ने के लिए सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम पर एक साथ आने की आवश्यकता है और मुझे यकीन है कि लोग इसका समर्थन करेंगे.” पवार ने यह भी कहा कि विपक्षी दलों के बीच यह भावना है कि भाजपा देश के लिए “आपदा” की तरह है और एकजुट होकर खड़े रहने की जरूरत है.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछली बार हम कोलकाता में एकसाथ आए थे और अपना रुख सामने रखा था. आज लोगों को हमसे उम्मीदें हैं और एक सामान्य न्यूनतम कार्यक्रम के साथ आने की जरूरत है.” पवार का परोक्ष तौर पर इशारा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा आयोजित विपक्षी दलों की उस रैली की ओर था जो उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी 2019 में कोलकाता में आहूत की थी.

दिल्ली में ‘जीरो’ रहने पर बोले कांग्रेस नेता- हम पहले शून्य थे और अब भी शून्य, इसलिए हमारी नहीं BJP की हार है

कांग्रेस नेता एवं पंजाब के कैबिनेट मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में उनकी पार्टी हारी नहीं है, क्योंकि उसकी सीटें 2015 की भांति ही शून्य बनी हुई हैं, दरअसल यह तो भाजपा की हार है. उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव मतगणना के रुझानों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हम पहले शून्य थे, और अब भी शून्य हैं. इसलिए यह हमारी हार नहीं है. यह भाजपा की हार है.”मतगणना रुझान में दिल्ली चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिल रही है. कांग्रेस ने 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी एक भी सीट नहीं जीती थी. इस बीच, पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप के प्रदर्शन को ‘‘नफरत और गंदी राजनीति पर विकास के एजेंडे की जीत” करार दिया.आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में 19 विधायकों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. चीमा ने ट्वीट किया, ‘‘आम आदमी पार्टी के पक्ष में इस भारी जनादेश के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं और दिल्ली के लोगों को बधाई. यह नफरत और गंदी राजनीति पर विकास के एजेंडे की जीत है.”

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