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J&K में लोगों से मिलकर लौटे NC के 2 सांसद, कॉन्ग्रेस के ‘लोकतंत्र की हत्या’ वाले आरोप की निकली हवा

नई दिल्ली 27 अगस्त 2019 । जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने और राज्य के पुनर्गठन का निर्णय लिए जाने के बाद विपक्षी दलों ने जम कर राजनीति की। कॉन्ग्रेस ने तो इसे अंतरराष्ट्रीय मसला तक बता दिया। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के साथ कई विपक्षी नेतागण श्रीनगर पहुँचे लेकिन उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस दिल्ली भेज दिया गया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कहना है कि ये नेता राजनीति करने यहाँ आए थे और इससे माहौल बिगड़ सकता था।

इसके बाद विपक्षी दलों ने यह कहना शुरू कर दिया कि जम्मू कश्मीर में सबकुछ ठीक नहीं है। हालाँकि, बसपा सुप्रीमो मायावती ने इन नेताओं को फटकार लगाते हुए केंद्र सरकार को समय देने की बात कही। नवीन पटनायक की बीजद, चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और जगन रेड्डी की वाईएसआरसीपी सही कई विपक्षी दलों ने अनुच्छेद 370 पर संसद में सरकार का साथ भी दिया था। लेकिन, क्या आपको पता है कि जम्मू कश्मीर में कुछ विपक्षी नेता न सिर्फ़ घूम रहे हैं बल्कि लोगों से मिल भी रहे हैं।

ये नेतागण केंद्र सरकार और भाजपा के ख़िलाफ़ बयान भी दे रहे हैं लेकिन उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार नहीं किया। इससे विपक्षी पार्टियों के आरोपों की पोल भी खुल जाती है। मोदी सरकार पहले से ही कहते आ रही है कि जम्मू कश्मीर को 2 परिवारों के चंगुल से मुक्त कराना है।

अब्दुल्ला परिवार की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के 2 सांसदों ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया और अब वे दिल्ली लौट आए हैं। दोनों नेताओं ने पूरी सक्रियता से घाटी में लोगों से मुलाक़ातें की। एनसी के वरिष्ठ नेताओं मोहम्मद अकबर लोन और जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी ने कश्मीर का दौरा किया। दोनों नेताओं ने एनसी के श्रीनगर स्थित मुख्यालय में बैठकें की और सिविल सोसाइटी से संवाद किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, केंद्र सरकार कुछ स्थानीय नेताओं के माध्यम से जनता से संवाद कर हालात को सामान्य बनाए रखने की जुगत में लगी है। इसके लिए स्थानीय नेताओं की मदद ली जा रही है। हालाँकि, यह भी याद होना चाहिए कि अकबर लोन कभी पाकिस्तान का समर्थन कर चुके हैं और विधानसभा में भारत-विरोधी नारेबाजी भी कर चुके हैं।

अनुच्छेद 370 हटाना मतलब आतंकवाद की जड़ों पर प्रहार

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मतलब है कि आतंकवाद की जड़ों पर प्रहार। यह कहना है रॉ के पूर्व डायरेक्टर आलोक जोशी का। वह रोटरी क्लब के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शहर आए थे।

जागरण से बातचीत में रॉ के पूर्व डायरेक्टर आलोक जोशी बोले कि जम्मू-कश्मीर में युवाओं के दिमाग में गलत बातें डालकर आतंकी इसका फायदा उठा रहे थे। जम्मू-कश्मीर ही आतंकियों का बेस था। सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाने के साथ ही इस आधार को खत्म कर दिया। अब सिर्फ वहीं नहीं, बल्कि देश के अन्य प्रदेशों में भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। अभी जम्मू कश्मीर के लोगों मे थोड़ा आक्रोश है। कुछ समय बाद वह शांत हो जाएगा।

आलोक जोशी का कहना है कि देश की रिसर्च एंड एनालिसिसि विंग (रॉ) काफी मजबूत है। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों से उसका बेहतर कॉर्डिनेशन है। देश में कोई भी स्लीपिंग मॉडयूल कामयाब नहीं हो सकेगा। रही बात देश की आतंरिक सुरक्षा की या देश के अंदर हमले की, तो पाकिस्तान जानता है कि अगर भारत पर हमला किया तो इसका माकूल जवाब दिया जाएगा। लिहाजा अब वह कायराना हरकत नहीं कर पाएगा। दुश्मन जमीन, आसमान व पानी किसी के रास्ते से भी हमला करने में सफल नहीं हो पाएगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर हुई बड़ी करवाई

टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टाक्स फोर्स यानि एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट कर दिया है। फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) के एशिया-पैसिफिक ग्रुप ने पाकिस्तान को डाउनग्रेड करके ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है।

एफएटीएफ अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था है। एशिया-पैसिफिक ग्रुप एफएटीएफ के 9 क्षेत्रिय केंद्रों में से एक है। पहले से ही कर्ज संकट और गरीबी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए FATF का यह कदम किसी बुरे सपने से कम नहीं है।

एफएटीएफ ने आतंकवाद को फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने में असमर्थ रहने पर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्टेड किया है। एफएटीएफ ने शुक्रवार को कहा, ‘पाकिस्तान आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए अपने एक्शन प्लान को पूरा करने में विफल रहा है।’

फ्लोरिडा के ओरलैंडो में हुई बैठक में एक बयान जारी कर एफएटीएफ ने कहा, ‘पाकिस्तान न सिर्फ जनवरी की समय सीमा के साथ अपनी एक्शन प्लान को पूरा करने में विफल रहा है, बल्कि वह मई 2019 तक भी अपने एक्शन प्लान को पूरा नहीं कर सका है।’

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