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370 तो बहाना है, महबूबा-उमर को असली डर करोड़ों के इन बंगलों का!

नई दिल्ली 9 अगस्त 2019 । जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खत्म होने पर हायतौबा कर रहे कश्मीरी नेताओं के दर्द की असली वजह सामने आ गई है। यह वजह बेहद व्यक्तिगत है। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला दोनों ही इस वजह के शिकार हैं। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू कश्मीर में नेताओं के कई विशेषाधिकार छिन गए हैं। इस सूरत में महबूबा और उमर दोनों के लिए अपने अपने करोड़ों के बंगले को बचाए रखना मुमकिन नहीं है।

महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला दोनों ही अब मुख्यमंत्री नहीं हैं। मगर फिर भी अपने अपने सरकारी बंगलों में रहते हैं। इन बंगलों पर करोड़ों खर्च हुए हैं। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री रहते हुए इन दोनों ही नेताओं ने करीब 50 करोड़ खर्च कर अपने अपने इन बंगलों को बेहद ही खूबसूरत और आरामदायक बना दिया है। मगर अब विशेषाधिकार छिन जाने के बाद ये दोनों ही पूर्व मुख्यमंत्री इन सरकारी बंगलों में नहीं रह सकते हैं।

महबूबा और उमर दोनों के बंगले श्रीनगर की गुफकार रोड पर हैं। इन बंगलों में सुख सुविधा का हर जरिया मौजूद है। महबूबा और उमर दोनों ही अब अपनी सुरक्षा की गुहार कर रहे हैं। फारूक अब्दुल्ला ने यहां तक बोल दिया उनकी हत्या की जा सकती है। ये सभी नेता अब सुरक्षा के हवाले से इन बंगलों को बनाए रखना चाह रहे हैं जबकि कानूनन ये मुमकिन नहीं है।

फारूक अब्दुल्ला हालांकि अपने निजी बंगले में रहते हैं मगर उनके सरकारी बंगले का किराया अब भी भी उनके खातों में दर्ज होता है। अब ये सारी सुविधाएं छिन जाएंगी।

कश्मीर में 370 के बहाने सामने आई मुफ्ती परिवार की तीसरी खेप, सना मुफ़्ती ने संभाली बागडोर

370 के नाम पर कश्मीर में कई नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। अब इसी के नाम पर कश्मीर में परिवारवाद की नई खेप सामने आई है। महबूबा मुफ्ती को हिरासत में लिए जाने के बाद उनकी बेटी सना मुफ़्ती ने कमान संभाल ली है। वे न सिर्फ मीडिया से बातचीत कर पीडीपी का संदेश आगे बढ़ा रही हैं बल्कि पार्टी की गतिविधियों में भी एक्टिव रूप से शामिल हो गई हैं।

महबूबा मुफ्ती की बेटी सना मुफ़्ती ने राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की है। फिर उन्होंने इंग्लैंड की वॉरविक यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस में मास्टर्स किया है। वह दुबई और लंदन में नौकरी कर चुकी हैं। फिलहाल कश्मीर में अपनी माँ के साथ रह रही हैं। सना ने कश्मीर की तुलना फिलिस्तीन से कर दी। उन्होंने कहा कि कश्मीर को खुली जेल में तब्दील कर दिया गया है। यहां के नागरिकों को दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया गया है।

सना ने आरोप लगाया कि उन्हें यह भी मालूम नहीं है कि उनकी मां महबूबा मुफ्ती को कहां ले जाया गया है? ये सब उनका हौसला तोड़ने के लिए किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक सना ही इस समय पीडीपी की पॉइंट पर्सन बनी हुई हैं। मुफ्ती मोहम्मद सईद के बाद इस राजनीतिक परिवार की बागडोर महबूबा मुफ्ती ने संभाली। फिर वे अपने भाई सिनेमेटोग्राफर तसद्दुक मुफ़्ती को आगे लेकर आईं। अब 370 के बहाने उनकी बेटी भी मैदान में आ गयी है।

संविधान की प्रति फाड़ने वाले पीडीपी नेताओं की छीनी जा सकती है नागरिकता
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को हटाने का विरोध करने और राज्यसभा में संविधान की प्रति फाड़ने वाले पीडीपी के सांसद एमएम फैयाज और नाजिर अहमद पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. उन्‍हें तीन साल के लिए जेल भेजा जा सकता है. यहां तक कि उनकी नागरिकता भी रद्द की जा सकती है.

अपराध है संविधान या राष्‍ट्रध्‍वज का अपमान

इन्सल्ट टू इंडियन नेशनल फ्लैग ऐंड कॉन्सटिट्यूशन ऑफ इंडिया, 1971 के मुताबिक, किसी सार्वजनिक जगह पर (या ऐसी जगह जो लोगों की नजर में हो) राष्ट्रीय झंडे या संविधान को जलाना, फाड़ना या उसका किसी भी तरह से अपमान करना अपराध है. ऐसा करने वाले को तीन साल तक की जेल हो सकती है. संविधान या फिर झंडे की स्वस्थ आलोचना अपमान की श्रेणी में नहीं आती.

बुनियादी कर्तव्‍य है राष्‍ट्रीय प्रतीकों का सम्‍मान करना

संविधान के आर्टिकल 51 (ए) में भी इसका जिक्र किया गया है. भारतीय नागरिकों के लिए तय बुनियादी कर्तव्यों में राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्‍मान करना भी शामिल है. दूसरे शब्‍दों में समझें तो आप किसी भी तरह का विरोध जताने के लिए संविधान और तिरंगे का अपमान नहीं कर सकते. इसके अलावा नागरिकता अधिनियम, 1955 के मुताबिक, अगर कोई भारतीय नागरिक संविधान का अपमान करे या उसकी बातों या हरकतों से साबित हो कि संविधान में उसकी निष्ठा नहीं है, तो उसकी नागरिकता छीनी जा सकती है. बता दें कि जैसे ही गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद-370 और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन का संकल्प पेश किया तो विपक्षी पार्टियों ने हंगामा मचाना शुरू कर दिया. इसके बाद सभापति ने हंगामा कर रहे सांसदों को वापस जाने को कहा. इसी दौरान पीडीपी सांसद मीर फैयाज और नजीर अहमद ने प्रस्ताव के विरोध में राज्यसभा में ही संविधान की प्रति फाड़ दी. इसके बाद सभापति वेंकैया नायडू ने उन्हें बाहर भेज दिया.

राज्‍यसभा के बाहर फैयाज ने फाड़ डाले अपने कपड़े

पीडीपी के दोनों राज्यसभा सदस्‍यों ने बाजुओं और कलाई पर काला बैंड बांधकर बाहर भी विरोध जारी रखा. यहां तक कि एमएम फैयाज ने अपना कुर्ता भी फाड़ लिया. जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने पीडीपी के नेताओं की इस हरकत की आलोचना की. आजाद ने कहा कि संविधान को फाड़ने की कोशिश करने वाले दोनों सांसदों की हरकतों की मैं कड़ी आलोचना करता हूं. संविधान की रक्षा के लिए हम अपनी जान भी दे देंगे.

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