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आधा दर्जन से अधिक को संक्रमित करने वाले को 4 करोड़ प्रतिमाह का ईनाम क्यों….?

उज्जैन 30 अप्रैल 2020 ।आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज पर कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों के ईलाज में बरती जा रही लापरवाही के बीच यह खबर वास्तव में चौंकाने वाली है कि, सरकार इस आर डी गार्डी मेडिकल कॉलेज को आगामी 3 माह तक अस्पताल में दिए जा रहे उपचार के लिए 4 करोड़ रुपए प्रतिमाह यानी लगभग 13.33 लाख रुपए प्रतिदिन का भुगतान करेगी। ऐसी संधि ट्रस्ट के कर्ता-धर्ताओ और सरकार के बीच हो चुकी है। कोरोना से संक्रमित कई बेकसूरो की इलाज के अभाव में जान लेने वाले इस मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदारों के खिलाफ तो कठोर कार्यवाही की जाना चाहिए थी….लेकिन कार्यवाही की बजाय अस्पताल को 4 करोड रुपए प्रतिमाह दिया जाना किसी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है।
बात कुछ ज्यादा पुरानी नहीं है इस अस्पताल के कर्ता-धर्ता व मुख्य ट्रस्टी ने अपने एक इंदौर से लाए हुए रिश्तेदार के कोरोना संक्रमित होने के बावजूद भी सरकार के सभी दिशा निर्देशों को ताक में रखकर उनका इलाज चैरिटेबल अस्पताल में किया था। जिसका दुष्परिणाम यह हुआ कि यहां उपचार करने वाले कई जाने-माने डॉक्टरों को इस बीमारी के संक्रमण के भय के कारण होम क्वॉरेंटाइन होना पड़ा। जबकि अस्पताल के स्टाफ में लगभग आधा दर्जन लोग कोरोना संक्रमित पाए गए है। शासन के नियमों के तहत तो इस लापरवाही पर चैरिटेबल व आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के कर्ता-धर्ताओं व ट्रस्टीयों के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया जाना था। लेकिन इस प्रकार की कार्यवाही करने की बजाय शासन आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को उपकृत करने में लगा हुआ है।
आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित मरीजों के ईलाज में बरती जा रही लापरवाही पर कलेक्टर शशांक मिश्र द्वारा दिनांक 25 अप्रैल 2020 को एक पत्र जारी कर मेडिकल कॉलेज के संचालकों को कोविड-19 के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देशों का पालन नहीं करने तथा मौखिक और लिखित निर्देशों के बाद भी व्यवस्थाओं में सुधार ना करने पर कारण बताओ सूचना पत्र जारी करते हुए कहा था कि क्यों ना आप पर आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 151 की धारा 57 एवं आवश्यक सेवा संधारण तथा विछिन्नता निवारण अधिनियम 1979 की धारा 7 के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई करते हुए मेडिकल कॉलेज के लाइसेंस की निरस्ती की कार्रवाई क्यों न की जाए। 4 दिनों पूर्व निकले ऐसे आदेशों के बाद आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को कोरोना जैसी विश्वव्यापी महामारी से लड़ने के लिए 4 करोड़ रुपए प्रतिमाह 3 माह तक देना समझ से परे है।
आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमितो की जांच शुरू होने के नाम पर कई जनप्रतिनिधि सोशल मीडिया पर श्रेय लूटने में लगे हुए है। साथ ही आम कार्यकर्ता और जनता जनार्दन से भी ऐसा ही कुछ कह रहे हैं जैसे इस उपलब्धि के लिए पूरा प्रयास उन्हीं के द्वारा किया गया था। शहर की भोली-भाली जनता इन जनप्रतिनिधियों की बात से सहमत तो हो चुकी है, *परंतु इसके साथ ही आम जनता का यह प्रश्न भी उठ खड़ा हुआ है कि अब तक कोरोना संक्रमित के उपचार में लापरवाही बरतने वाले आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को करोड़ों रुपए से उपकृत करने में भी क्या इन्हीं जनप्रतिनिधियों का हाथ है…!

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