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विश्व में 5 करोड लोग अल्जाइमर रोग से पीडित : डॉ पुरोहित

भोपाल 21 सितम्बर 2021 । हर चार सेकंड में दुनिया में कोई न कोई अल्जाइमर से पीड़ित होता है. अल्जाइमर डिमेंशिया की प्रमुख वजह है, जिससे दुनिया भर में 5 करोड़ लोग प्रभावित हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि साल 2030 तक अल्जाइमर से पीड़ित लोगों की संख्या दोगुनी हो जाएगी और यह 2050 तक तीन गुनी हो जाएगी.

यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ स्टडीज फॉर मेंटल केयर के प्रमुख सलाहाकार और शोधार्थी डॉ नरेश पुरोहित ने देते हुए बताया कि अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है, जिसके कारण मरीज की याददाश्त कमजोर होने लगती है और इसका असर दिमाग के कार्यों पर पड़ता है.

उन्होने बताया कि अल्जाइमर रोग डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश का सबसे आम प्रकार है, जिसका असर व्यक्ति की याददाश्त, सोचने की क्षमता, रोजमर्रा की गतिविधियों पर पड़ता है.अल्जाइमर रोग में दिमाग के टिश्यूज को नुकसान पहुंचना शुरू होने लगता है. इसके लगभग दस साल बाद व्यक्ति में लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जैसे याददाश्त कमजोर होना.

मनोरोगो पर कई शोध रिपोर्ट विश्व प्रसिद्ध जरनलों मे प्रकाशित कर चुके डॉ पुरोहत ने बताया कि अल्जाइमर रोग में दिमाग की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, इसलिए इसका असर याददाश्त और दूसरे मानसिक कार्यों पर पड़ता है.
इस रोग में व्यक्ति को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी होती है, किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत आने लगती है, कोई फैसला लेने की क्षमता कम हो जाती है, चीजें इधर-उधर रखकर भूल जाते हैं, शब्द भूलने लगते हैं, जिससे सामान्य बातचीत में रुकावट आती है, अपने घर के आसपास की गलियों, रास्तों को भूल जाते हैं और उनके रोजमर्रा के व्यवहार में बहुत तेजी से बदलाव आता है.
अल्जाइमर रोग के लक्षण :
-भूलना
-सोचने-समझने में मुश्किल
विशेषतौर पर शाम के समय मानसिक रूप से भ्रमित होना
-एकाग्रता में कमी
-नई चीजें सीखने की क्षमता में कमी
-साधारण सी गणना करने में मुश्किल महसूस करना
-आस-पास की चीजों/ लोगों को पहचानने में मुश्किल होना
उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्जाइमर के मरीज के व्यवहार में बदलाव आने लगते हैं जैसे गुस्सा, चिड़चिड़ापन, अपने शब्दों को दोहराना, बेचैनी, एकाग्रता में कमी, बेवजह कहीं भी घूमते रहना और खो जाना, रास्ता भटकना, मूड में बदलाव, अकेलापन, मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे डिप्रेशन, हैल्यूसिनेशन या पैरानोइया भी हो सकती हैं.
अल्जाइमर रोग के तीन स्टेज होते हैं:
शुरुआती स्टेज में रोगी अपने दोस्तों और अन्य व्यक्तियों को पहचान सकता है, लेकिन उसे लगता है कि वह कुछ चीजें भूल रहा है.
शुरुआत में लक्षणों को देखकर अक्सर लोग यह समझते हैं कि ऐसा उम्र बढ़ने के कारण हो रहा है. अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों की उम्र आमतौर पर अधिक भी होती है, लेकिन यह एजिंग या उम्र बढ़ने का सामान्य लक्षण नहीं है.

उन्होने कहा कि वहीं यह बीमारी अब केवल बूढ़ों तक ही सीमित नहीं रही है. यह समस्या युवाओं में भी प्रकट हो रही है. इसके अलावा यह बीमारी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चल सकती है.वैज्ञानिक अल्जाइमर रोग से पीड़ित होने के सटीक कारणों को अभी तक समझ नहीं पाए हैं.
डॉ पुरोहित ने खुलासा किया कि इस रोग की जानकारी में ही इसका बचाव है. इसके बचाव हेतु आपके किसी परिजन, मित्र और परिचित में ऐसे लक्षण दिखते हैं, तो चिकित्सक से सलाह करें. स्वस्थ संतुलित आहार खाने, व्यायाम करने और पर्याप्त नींद लेने जैसी कुछ जीवनशैली विकल्प स्वस्थ मस्तिष्क गतिविधि को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं और संभवतः अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसे स्मृति विकारों की शुरुआत को टालने में मददगार हो सकते हैं. लेकिन, इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं कि ये उपाय पूरी तरह से इन बीमारियों को रोक सकते हैं.

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