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जयपुर में 82% ने कहा- राज्य में नहीं बदलेगी सरकार, बाकी राजस्थान में 58% लोगों का उलट जवाब

जयपुर 7 अगस्त 2018 । चुनाव से ठीक पांच महीने पूर्व राजस्थान क्या सोच रहा है, सर्वे इसी का रुझान बताता है। यह जरूरी नहीं कि सर्वे के नतीजे चुनाव में दिखें, क्योंकि जनता का रुझान सरकार के काम और विपक्ष की सक्रियता से बनता-बिगड़ता है। यह ताजा रुझान है, चुनाव पूर्व बदलाव संभव है।

इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। नई सरकार किसकी बनेगी, इसको लेकर ने पूरे राज्य में सर्वे कराया। सर्वे के नतीजे चौंकाने वाले दिख रहे हैं। अधिकतर सवालों में जयपुर और बाकी राजस्थान की ठीक उलट राय सामने आई है। उदाहरण के तौर पर सरकार बदलेगी या नहीं?…सवाल के जवाब में जहां जयपुर में सर्वाधिक 82% लोगों ने कहा- सरकार नहीं, इस बार सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड बदलेगा। जबकि बाकी राजस्थान ने जयपुर से ठीक उलट जवाब दिया। 58% लोगों ने कहा कि सरकार बदल जाएगी। सर्वे में पूरे राज्य ने एकमत होकर चुनाव की सबसे बड़ी रणनीति के रूप में युवाओं को ज्यादा मौके देना चुना। कांग्रेस की सरकार बनने की सूरत में 60% लोगों ने कहा- मुख्यमंत्री बनेंगे। हालांकि, मोदी-शाह का आक्रामक प्रचार और गहलोत-पायलट के आपसी संघर्ष को लोगों ने कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुश्किल बताया। सर्वे में महिलाएं जहां भाजपा के साथ दिखीं, वहीं बुजुर्गों की भाजपा से नाराजगी भी सर्वे में दिख रही है। 46 की उम्र से बड़े 68 फीसदी लोगों ने सरकार को सिर्फ बातें बनाने वाली या काम चलाने लायक सरकार के रूप में चुना।

सबसे चर्चित दो सवाल

1. भाजपा जीती तो वसुंधरा दोबारा सीएम बनेंगी?

बाकी राजस्थान (जयपुर के अलावा) में 65% ने कहा- वसुंधरा सीएम नहीं बनेंगी।

लेकिन जयपुर में 81% ने कहा- वसुंधरा दोबारा सीएम बनेंगी।

2. कांग्रेस की सरकार आई तो सीएम कौन होगा?

इस सवाल पर 60% लोगों ने कहा- अशोक गहलोत सीएम बनेंगे, 40% के साथ।

बतौर मुख्यमंत्री पहली पसंद कौन?

शेष राजस्थान में गहलाेत सबसे आगे।लेकिन जयपुर में वसुंधरा राजे आगे।

इस सवाल पर सबसे ज्यादा लोगों ने जवाब दिए

पसंद का मुख्यमंत्री?
सबसे ज्यादा 1,54,361 लोगों ने इस सवाल का जवाब दिया । सबसे ज्यादा जयपुरसे 42,068 लोगों ने इसका जवाब दिया।

सर्वे में हिस्सा लेने वाले…
18-25 साल के युवाओं ने सर्वे में सबसे ज्यादा हिस्सा लिया है। कुल 42% इसी आयु वर्ग से।
सर्वे में शामिल लोग 65% ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कैटेगरी के हैं। 30% नौकरीपेशा, 30% छात्र और 18% कारोबारी हैं।

सर्वे मेंकांग्रेस के लिए चेतावनी

1. अंदरूनी संघर्ष
दोनों ही पार्टियों में अंदरूनी संघर्ष की स्थिति है। भाजपा में तो 74 दिन बाद प्रदेशाध्यक्ष का नाम फाइनल हो पाया। इसके बावजूद आम जनता इसे भाजपा के लिए खतरा नहीं मानती। लेकिन कांग्रेस में पायलट-गहलोत का आपसी संघर्ष सभी को दिख रहा है। कांग्रेस को मोदी-शाह के आक्रामक प्रचार की भी काट ढूंढनी होगी।
2. कमजोर छवि
बतौर विपक्ष कांग्रेस का काम जनता को पसंद नहीं आया है। यह खतरे के संकेत हैं। जयपुर और बाकी राजस्थान, दोनों ही जगह कांग्रेस को कमजोर विपक्ष माना गया है।

भाजपा के लिए चेतावनी

1. एंटी इनकम्बेंसी
परिवर्तन का ट्रेंड बना रहेगा या खत्म होगा, इसका जवाब तो छह माह बाद ही मिलेगा। लेकिन बड़ा फैक्टर एंटी इनकम्बेंसी का भी है। यह नाराजगी भाजपा पर भारी पड़ सकती है।
2. बुजुर्गों की नाराजगी
युवा, महिलाओं को छोड़ दें तो बुजुर्ग भाजपा से ज्यादा खुश नहीं दिखे। बुजुर्गों ने ही एंटी इनकम्बेंसी को सबसे बड़ा फैक्टर माना। ओवरऑल 58% बुजुर्ग कह रहे हैं कि भाजपा अगर दोबारा आई तो भी वसुंधरा सीएम नहीं बनेंगी। भाजपा को देखना होगा, बुजुर्गों का गुस्सा कहीं उस पर चुनाव में न उतर जाए।

राजस्थान विधानसभा को लेकर सट्टा बाजार ने किया आंकलन, इस पार्टी को मिल रही हैं ज्यादा सीटें

सूत्रों के अनुसार राजस्थान के सट्टा बाजार भी इन होने वाले चुनावों का आंकलन कर रही है। जी हां दोस्तों सट्टा बाजार के मुताबिक कांग्रेस पार्टी अभी भाजपा से कहीं आगे है लेकिन दोस्तों कांग्रेस के भीतर चल रही कलह उसको बहुत भारी नुकसान पहंचा रही है। आपको बता दें कि राजस्थान का सट्टा बाजार अपने सटीक चुनावी आंकलन के लिए देशभर में जाना जाता है। दोस्तों सट्टा बाजार के मुताबिक राजस्थान में कांग्रेस को 125 भाजपा को 63 सीटें मिलने का अनुमान है।

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