मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> मोदी कैबिनेट से बाहर रहे नेताओं के लिए आई एक अच्छी खबर

मोदी कैबिनेट से बाहर रहे नेताओं के लिए आई एक अच्छी खबर

नई दिल्ली 13 जुलाई 2019 । पीएम नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में जगह नहीं पा सके नेताओं के लिए एक अच्छी खबर आ रही है। ऐसे नेताओं को संसदीय समितियों में जगह दी जा सकती है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भाजपा के पूर्व मंत्रियों से संसदीय समितियों के कामकाज पर खास ध्यान देने को कहा है।

इसी के बाद यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि संसदीय समितियों में भाजपा बड़ी संख्या में उन सांसदों को मौका दे सकती है। जो राज्य या फिर केंद्र सरकार में मंत्री रहे हैं। पीएम ने इन पूर्व मंत्रियों से कहा कि संसदीय समितियां मिनी संसद की तरह होती हैं। इनमें काम करके सांसद अपने अनुभव में बढ़ोतरी कर सकते हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने यह बातें पूर्व मंत्रियों से मुलाकात में कही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से पूछा कि राजनीति के अलावा आप क्या क्या काम करते हैं। सामाजिक कार्यों में बाकी कामों में क्या रुचि है? भाजपा में लगभग चालीस सांसद ऐसे है जो राज्य या फिर केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। अब इनमें से कई नेताओं को संसदीय समितियों में जगह दी जाएगी।

29 सरकारी कंपनियों की संपत्तियां बेचकर खजाना भरेगी मोदी सरकार, एक लाख करोड़ रुपये जुटाने का रखा लक्ष्य

मोदी सरकार सरकारी कंपनियों की संपत्ति बेचने की तैयारी में है। अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार विनिवेश की गति पर जोर दे रही है। इसके लिए सरकार ने 29 कंपनियों की लिस्ट तैयार की है। इन कंपनियों की हिस्सेदारी को निजी कंपनियों के हाथों बेचकर पैसा जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य के तहत रणनीतिक विनिवेश और सरकारी जमीनों को बेचकर सरकार एक लाख करोड़ रुपये जुटाएगी।

इंडियन एक्सप्रेस को डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट पब्लिक असेट्स मैनेजमेंट के सचिव अतनु चक्रवर्ती ने बताया कि सरकार रणनीतिक बिक्री के साथ ही अगले सप्ताह बिक्री के लिए तीन नए प्रस्ताव पेश कर सकती है। बता दें कि मोदी सरकार लंबे समय से कर्ज में डूबी हुई इन कंपनियों के विनिवेश की कोशिश कर रही है। हालांकि मनमाफिक खरीदार अभी तक नहीं मिले हैं।

अतनु चक्रवर्ती ने आगे कहा कि रणनीतिक निवेश के तहत कई चरणों में सरकार काम करेगी। एयर इंडिया के बिक्री की घोषणा पहले ही हो चुकी है। अगले सप्ताह इस तरह की तीन बिक्री संबंधी प्रस्ताव पेश किए जाएंगे। चक्रवर्ती ने आगे बताया कि सरकार कुछ जमीनों की बिक्री का प्रस्ताव पेश कर बाजार की प्रतिक्रिया देखेगी। इसके बाद इस प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

मोदी सरकार हिंदुस्‍तान फ्लोरोकार्बन लिमिटेड, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, सेंट्रल इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स लिमिटेड, फेरा स्‍क्रैप निगम लिमिटेड, भारतीय सीमेंट निगम लिमिटेड, एनएमडीसी का नगरनार स्‍टील प्‍लांट, सेल का सेलम स्‍टील प्‍लांट, सेल की भद्रावती यूनिट्स, कर्नाटक एंटीबायोटिक्‍स एंड फार्मास्‍युटिकल्‍स लिमिटेड, कामराजार पोर्ट लिमिटेड कंपनियों को बेचना चाहती है।

इसके अलावा मोदी सरकार ने प्रोजेक्‍ट एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड, राष्‍ट्रीय परियोजना निर्माण निगम, हिंदुस्‍तान प्रीफैब लिमिटेड, हॉस्पिटल सर्विसेज कंसल्‍टेंसी लिमिटेड, पवन हंस लिमिटेड, इंजीनियरिंग पोजेक्‍ट लिमिटेड, ब्रिज एंड रूफ कंपनी इंडिया लिमिटेड, अलॉय स्‍टील प्‍लांट, स्‍कूटर्स इंडिया लिमिटेड, हिंदुस्‍तान न्‍यूजप्रिंट लिमिटेड (सहायक), भारत पंप और कंप्रेशर्स लिमिटेड के विनिवेश को मंजूरी दे दी है।

मोदी सरकार ने आम बजट 2019 में 1.05 लाख करोड़ रुपये विनिवेश से जुटाने का लक्ष्य रखा है। अंतरिम बजट में विनिवेश के जरिये 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया था। इस तरह सरकार ने अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्य में बढ़ोतरी की है।

मोदी सरकार मे 2019-20 के पहले दो महीने में 2357.10 करोड़ रुपये जुटाए हैं। वहीं साल 2018-19 में सरकार ने विनिवेश के जरिये 84972.16 करोड़ रुपये जुटाए थे। हालांकि, 2018-19 में 80 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

बता दें कि विनिवेश प्रक्रिया निवेश का उल्टा होता है। विनिवेश का मतलब उस रकम को वापस निकालना होता है जो सरकार ने किसी कारोबार, संस्था या किसी परियोजना में लगाया हुआ है। घाटे में चल रही कंपनियों को किसी के हाथ बेचकर ऐसा होता है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

राहुल ने जारी किया श्वेतपत्र, बोले- तीसरी लहर की तैयारी करे सरकार

नई दिल्ली 22 जून 2021 । कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस …