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AAP की कांग्रेस को चुनौती, कहा- आपकी सरकारें 30 यूनिट बिजली ही फ्री करके दिखा दें

नई दिल्ली 4 फरवरी 2020 । दिल्ली की सत्ता में लगातार 15 साल तक राज करने वाली कांग्रेस चुनाव में दोबारा से अपनी खोई जमीन को वापस हासिल करने की कोशिशों में लगी है. आम आदमी पार्टी को रास्ते पर चलते हुए कांग्रेस ने रविवार को जारी किए अपने घोषणापत्र में फ्री बिजली और पानी को ही पूरा फोकस रखा. कांग्रेस ने वादा किया कि वह दिल्ली में सत्ता में आने पर 300 यूनिट बिजली फ्री देगी. कांग्रेस के इस वादे को चुनौते देते हुए आम आदमी पार्टी ने उसे पहले पार्टी शासित राज्यों में 30 यूनिट बिजली फ्री देने की चुनौती दी है.

राज्यसभा सदस्य और आप नेता संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस को सबसे पहले अपनी सरकार वाले राज्यों में 30 यूनिट फ्री बिजली देनी चाहिए. उन्होंने कहा, ”सिर्फ बड़ी बातों से काम पूरे नहीं होते हैं. कांग्रेस को अपनी सरकार वाले राज्यों की बिजली दरों के बारे में जवाब देना चाहिए. दिल्ली में भी कांग्रेस ने 15 साल तक राज किया, लेकिन उसकी सरकार में लगातार बिजली दरों में बढ़ोतरी होती थी.” इसके साथ ही संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस के वादों पर कोई विश्वास नहीं करेगा.इससे पहले राजेंद्र नगर से आप उम्मीदवार और पार्टी प्रवक्ता राघव चड्डा ने बीजेपी को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा, ”बीजेपी शासित राज्यों में बिजली की दरें काफी महंगी हैं. गुजरात में 200 यूनिट पर 600 रुपये बिजली बिल लिया जाता है, जबकि हरियाणा में दिन में 6 से 8 घंटे बिजली कट लगता है. गुजरात और हरियाणा दोनों ही राज्यों में बीजेपी की सरकार है.”

दिल्ली चुनाव के दौरान बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच ही सीधी टक्कर देखने को मिल रही है. वहीं कांग्रेस की नज़र सिर्फ उन सीटों पर दिख रही जो 15 साल की सत्ता के दौरान उसका सबसे मजबूत गढ़ रही हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 8 फरवरी को मतदान होना है, जबकि नतीजों की घोषणा 11 फरवरी को होगी.

दिल्ली में मतदान करने आ रहे लोगों को मुफ्त में टिकट दे रहा है स्पाइसजेट, ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

किफायती विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने सोमवार को कहा कि वह आठ फरवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डालने जा रहे कुछ लोगों को ‘‘सैकड़ों फ्री टिकट’ देगी। कंपनी का कहना है कि इन यात्रियों को बेस किराया नहीं देना होगा, उन्हें सिर्फ कर और अन्य उपकर देने होंगे।

टिकट के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि लोगों को इन टिकटों के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा और उनका चुनाव कंपनी का आंतरिक पैनल करेगा। चुने गए यात्रियों को सभी कर, उपकर, लेवी और अन्य शुल्क देने होंगे।

एक दिन में आने-जाने पर दोनों तरफ का बेस किराया माफ किया जाएगा

‘स्पाइसडेमोक्रेसी’ के तहत कंपनी ने कहा कि अगर कोई आठ फरवरी को ही दिल्ली जा रहा है और उसी दिन लौट रहा है तो वह दोनों टिकटों पर लगी बेस किराए की राशि वापस कर देगी। वहीं, अगर कोई सात फरवरी को जाकर आठ फरवरी को लौट रहा है, या आठ फरवरी को जा कर नौ फरवरी को लौट रहा है तो उसके एक ओर की टिकट का बेस किराया माफ कर दिया जाएगा। इसके लिए लोग पांच फरवरी तक ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। चुने गए यात्रियों को छह फरवरी को सूचना दे दी जाएगी।

तो क्या दिल्ली में ध्रुवीकरण की राजनीति से कांग्रेस पर मंडराने लगा है सूपड़ा साफ होने का खतरा?

पांच वर्ष पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक भी सीट पर जीत हासिल न कर पाने वाली कांग्रेस के सामने एक बार फिर खराब प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। प्रदेश कांग्रेस के नेता आपसी बातचीत में मान रहे हैं कि विधानसभा की 70 सीटों में इस बार कुछ एक को छोड़ लगभग सभी जगह आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले वह संघर्ष में ही नहीं है।

विधानसभा चुनावों की रणनीति व प्रबंधन से जुड़े प्रदेश कांग्रेस के एक नेता का कहना था कि एक समय दिल्ली में सबसे मजबूत राजनीतिक दल के तौर पर स्थापित और लगातार 15 वर्षों तक शासन कर चुकी कांग्रेस मुश्किल से पांच या छह विधानसभा क्षेत्रों में ही ठीक से चुनाव लड़ रही है।

मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में

सूत्रों के मुताबिक जिन सीटों पर कांग्रेस की मौजूदगी दिख रही है उनमें ओखला, बल्लीमारान, सीलमपुर और मुस्तफाबाद की सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। इनके अलावा पार्टी गांधीनगर और बादली जैसे क्षेत्रों में भी खुद को लड़ाई में मान रही है।

ओखला इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद अहमद कहते हैं, ‘‘कुछ हफ्ते पहले तक यहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत थी, लेकिन अब यहां के लोगों में यह माहौल बनता दिख रहा है कि वो भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा नहीं करेंगे। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के लिए यहां से जीतना काफी मुश्किल नजर आ रहा है।’’

सीलमपुर विधानसभा सीट पर भी हालात मुश्किल

ओखला से कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद परवेज हाशमी को उम्मीदवार बनाया है। प्रदेश में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ धरना प्रर्दशन का केंद्र बना शाहीन बाग इसी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसी तरह, सीलमपुर विधानसभा सीट पर भी पांच बार के विधायक रहे मतीन अहमद की उम्मीदवारी के मद्देनजर खुद को मजबूत मानकर चल रही कांग्रेस के लिए मतदान से कुछ दिनों पहले तक हालात मुश्किल नजर आ रहे हैं।

सीलमपुर निवासी मोहम्मद सलीम कहते हैं, ‘‘आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार बदलने और भाजपा विरोधी मतों के बंटवारे के डर से कांग्रेस लिए लड़ाई कठिन हो गई है।’’ हालांकि, सलीम का कहना था कि ‘‘ पूरी तस्वीर मतदान से एक-दो दिन पहले ही साफ होगी।’’ सीएसडीएस के निदेशक और राजनीतिक विशेषज्ञ संजय कुमार का मानना है कि कांग्रेस दिल्ली की लड़ाई से बाहर हो चुकी है।

दिल्ली का चुनावी मुकाबला पूरी तरह से द्वि-दलीय

उन्होंने कहा, ‘दिल्ली का चुनावी मुकाबला पूरी तरह से द्वि-दलीय हो गया है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के वोट प्रतिशत का दहाई के अंक में पहुंचना भी मुश्किल नजर आ रहा है ।’ शीला दीक्षित के नेतृत्व में 15 साल तक सत्ता में रही कांग्रेस को पिछले विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं मिली थी और उसे करीब 10 प्रतिशत वोट मिले थे। हालांकि 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में उसे 22.46 फीसदी वोट मिले थे और वह दूसरे स्थान पर रही थी। पार्टी के चुनाव प्रबंधक भी यह मान रहे हैं कि हालात को ध्यान में रखते हुए ही कांग्रेस के बड़े नेताओें को प्रचार अभियान में नहीं उतारा गया है। प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने कहा, एक तो हमारी हालत अच्छी नहीं है और दूसरा सभी (गैर भाजपा ताकतें) मान रहे हैं कि कांग्रेस यदि आक्रामक होगी तो उससे भाजपा को ही फायदा होगा।

दिल्ली में चुनावी सभा से गांधी परिवार का परहेज

पार्टी के रणनीतिकार आम आदमी पार्टी के साथ किसी तरह की रणनीतिक समझ से इनकार कर रहे हैं पर संभवत यही कारण है कि अब तक कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में चुनावी सभा से परहेज किया है और तीनों शायद मतदान के ठीक पहले ही प्रचार में उतरेंगे। वैसे, पार्टी के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको का दावा है कि पार्टी चौंकाने वाले नतीजे देगी और चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में सभी शीर्ष नेता जनता के बीच होंगे।

आप और भाजपा के बीच मुकाबला

चाको ने कहा, ‘यह धारणा बनाई जा रही है कि आप और भाजपा के बीच मुकाबला है। जबकि भाजपा की हालत बहुत खराब है। सोचिए, अमित शाह हर जगह रोडशो कर रहे हैं। कांग्रेस की स्थिति भाजपा से बेहतर है और हम केजरीवाल को चुनौती दे रहे हैं।” सूत्रों के मुताबिक संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शनों का खुलकर समर्थन कर रही कांग्रेस को उम्मीद थी कि उसे मुस्लिम वोटरों का भरपूर समर्थन मिलेगा और ऐसे में वह पिछले चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन अब भाजपा एवं आप के बीच तीखी बयानबाजी से कथित तौर पर बन रही ध्रुवीकरण की स्थिति में उसे नुकसान का डर सता रहा है।

भाजपा एवं आप की तल्ख बयानबाजी से बदले हालात

कुछ समय पहले तक कांग्रेस के लिए संभावना वाली सीटें बताई जा रही करीब आधा दर्जन विधानसभा सीटों में पार्टी के नेताओं ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर यह स्वीकार किया कि जमीनी स्तर पर कुछ हफ्ते पहले वाले उत्साह की अब कमी है और इसकी वजह शाहीन बाग के प्रदर्शन और भाजपा एवं आप नेताओं की तल्ख बयानबाजी से बने सियासी हालात हैं।

दिल्ली कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘निश्चित तौर पर इस धारणा को लगातार बल मिल रहा है कि ध्रुवीकरण के कारण दिल्ली का चुनावी मुकाबला द्विदलीय हो गया है। शायद इससे हमें नुकसान हो। वैसे, हमारे उम्मीदवार और कार्यकर्ता पूरी कोशिश कर रहे हैं और उम्मीद है कि 2015 के चुनाव के मुकाबले इस बार हमारा प्रदर्शन बेहतर रहेगा।’

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