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सुहास भगत के उत्तराधिकारी के लिए अभ्यंकर का नाम भी

इंदौर 5 मार्च 2020 । सुहास भगत का भाजपा प्रदेश महामंत्री पद से हटना तय होते ही,उनके उत्तराधिकारी को लेकर संघ सर्कल में तेज हलचल है। सूत्रों के अनुसार संघ की मध्य क्षेत्र इकाई के मुख्यालय भोपाल स्थित समिधा कार्यालय ने तीन नामों का पैनल बना लिया है। इस पैनल में अनिल डागा,अभय महाजन के अलावा पराग अभ्यंकर के नाम शामिल हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि संघ के अभा प्रचार प्रमुख अरूण कुमार,अभा सह प्रचारक प्रमुख अरूण जैन और क्षेत्र प्रचारक दीपक विस्पुते ने इस पैनल की सिफारिशें सरकार्यवाह मुख्यालय नागपुर के रेशमबाग को भेज दी है। इनमें से किसी एक को सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी फायनल करेंगे। सरकार्यवाह द्वारा चयनित नाम का ऐलान भाजपा अध्यक्ष इसी माह के अंत में कर सकते हैं। भारतीय जनसंघ के समय से यही परंपरा है कि संघ द्वारा की गई सिफारिशों को ही संगठन मंत्रियों की नियुक्तियों में महत्व दिया जाता है।

भैय्याजी जोशी के पसंदीदा प्रचारक हैं अभ्यंकर

पराग अभ्यंकर 90 के दशक में शाजापुर के जिला प्रचारक रहे हैं। कुछ समय विभाग प्रचारक रहने के बाद 2005 में उन्हें मध्यभारत प्रांत का सह प्रांत प्रचारक बनाया गया था। 2008 में जब संघ का मालव प्रांत अस्तित्व में आया तो श्री अभ्यंकर मालव प्रांत के पहले प्रांत प्रचारक थे। वे लगातार 2018 तक मालव प्रांत के प्रांत प्रचारक रहे। मित भाषी पराग अभ्यंकर कठोर सिध्दांत निष्ठ और कार्यकर्ताओं से मैन टू मैन संपर्क के लिए जाने जाते हैं। उनके मालव प्रांत प्रचारक रहते हुए 2012 में संघ ने इंदौर के सुपर कॉरीडोर में विराट प्रांतीय एकत्रीकरण किया था,जिसमें 90 हजार से अधिक स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए थे। उस एकत्रीकरण को सरसंघचालक डा.मोहन भागवत ने संबोधित किया था। इसके बाद 2016-17 में महेश्वर में समरसता कुंभ भी आयोजित किया गया था,जिसमें इंदौर-उज्जैन संभाग के सेवा प्रकल्पों में कार्य करने वाले एक लाख स्वयंसेवक शामिल हुए थे। संप्रति श्री अभ्यंकर संघ के अखिल भारतीय सेवा प्रमुख हैं और उनका मुख्यालय बंगलरू में है। उन्हें सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी,सह सरकार्यवाह द्वय सुरेश सोनी और दत्तात्रेय होसबोले के पसंदीदा प्रचारकों में से एक माना जाता है।

मालवा-निमाड़ के आदिवासी
क्षेत्रों को लेकर संघ चिंतित

पराग अभ्यंकर ने प्रांत प्रचारक रहते हुए मालवा-निमाड़ के आदिवासी और दलित क्षेत्रों में संघ का नेटवर्क बेहद मजबूत बनाया था। वे तहसील स्तर तक प्रवास कर मैदानी कार्यकर्ताओं से संवाद करने के लिए जाने जाते हैं। कम बोलना और सहज व्यवहार उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। संघ नेतृत्व आदिवासियों में अपना आधार व्यापक और बहुआयामी करना चाहता है। इसलिए भी पराग अभ्यंकर का नाम को प्रदेश भाजपा संगठन महामंत्री पद के लिए वजनदार माना जा रहा है।

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