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भाजपा चुनाव हारने के बाद विधायक दल का नेता तय करने में जुटी

नई दिल्ली 5 जनवरी 2019 । भाजपा नेतृत्व ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नई विधानसभाओं में विधायक दल का नेता चुनने के लिए अपने वरिष्ठ नेताओं राजनाथ सिंह, अरुण जेटली और थावरचंद गहलोत को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। तीनों राज्यों में जल्द ही विधानसभा सत्र शुरू होने हैं। ऐसे में विपक्षी दल के नाते भाजपा को अपना नेता चुनना है, जिसे सदन में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा मिलेगा।

भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की गुरुवार को रात आठ से नौ बजे तक लगभग एक घंटे चली बैठक में पार्टी ने तीनों राज्यों में हुई हार पर संक्षिप्त चर्चा के बाद भविष्य की रणनीति के तहत विधायक दल का नेता चुनने पर विचार विमर्श किया। सूत्रों के अनुसार बैठक में एक राय यह भी रही कि तीनों राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्रियों की जगह दूसरे नेताओं को विधायक दल का नेता चुनकर नए नेतृत्व को भविष्य के लिए तैयार किया जाए। हालांकि, इन राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री आगे की लड़ाई के लिए खुद ही विधानसभा में पूरी ताकत से रहने के पक्ष में हैं।

संसदीय बोर्ड ने विधायक दलों की बैठकों में नेता चुनने के लिए मध्यप्रदेश में गृह मंत्री राजनाथ सिंह को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्ति किया है। उनके साथ प्रदेश के प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे रहेंगे। राजस्थान में वित्त मंत्री अरुण जेटली को पर्यवेक्षक बनाया गया है, उनके साथ प्रदेश के प्रभारी अविनाश राय खन्ना रहेंगे। वहीं छत्तीसगढ़ में केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत पर्यवेक्षक होंगे और उनके साथ प्रभारी महासचिव अनिल जैन जाएंगे। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि इन बड़े नेताओं को पर्यवेक्षक बनाकर विधायकों से राय जानी जाएगी कि क्या वे बदलाव के पक्ष में हैं?
बैठक के बाद शाह व मोदी ने की मंत्रणा
बैठक में नितिन गडकरी को छोड़कर संसदीय बोर्ड के सभी सदस्य मौजूद रहे। बैठक समाप्त होने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी देर तक कार्यालय में ही रुके रहे और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से लंबी मंत्रिणा की।

MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में प्रदेश अध्यक्ष तय करने के लिए BJP भेजेगी पर्यवेक्षक

हाल में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है. हिंदी भाषी तीन राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने बेहतरीन जीत दर्ज की. मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की 15 साल की सरकार थी. वहीं, राजस्थान में उसकी सरकार को 5 साल पूरे हुए थे. इन तीन राज्यों में मिली हार के बाद बीजेपी एक्शन मोड में आ गई है. अब इन राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए होने वाले चुनाव में पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के निर्देश पर मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पर्यवेक्षक भेजे जा रहे हैं. मध्य प्रदेश में बतौर पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और विनय सहस्त्रबुद्धे जाएंगे, राजस्थान में अविनाश राय खन्ना और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली जाएंगे, अनिल जैन और थावर चंद गहलोत छत्तीसगढ़ जाएंगे. सभी पर्यवेक्षक राज्यों के बीजेपी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बीजेपी विधायकों से मुलाकात करेंगे.

जेपी नड्डा ने बताया कि बैठक के लिए तारीखों का फैसला प्रदेश इकाइयों के साथ विचार-विमर्श के बाद किया जाएगा. इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष को विधायकों के परामर्श से चुना जाएगा. बता दें, मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने हार के बाद अपना इस्तीफा केंद्रीय नेतृत्व को भेजा था. इसे नामंजूर कर दिया गया था. अब संगठन को धारदार बनाने के लिए नए सिरे से प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है.

तो क्या राष्ट्रीय राजनीति में जाएंगे शिवराज सिंह चौहान…
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान क्या बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में जा सकते हैं? क्या अब पार्टी पार्लियामेन्ट्री बोर्ड के सदस्य शिवराज को केन्द्रीय मंत्री बनाकर दिल्ली बुला सकती है. यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि शिवराज को मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाया जा रहा है.

दरअसल, खुद शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे तेरह साल मुख्यमंत्री रह चुके हैं इसलिए खुद ब खुद नेता हैं. उनको नेता प्रतिपक्ष बनने की ज़रूरत नहीं है. केन्द्रीय मंत्री बनाए जाने पर पूछे सवाल को शिवराज काल्पनिक सवाल कहकर टाल गए मगर बार-बार यह कह रहे हैं कि वे तो मध्य प्रदेश में काम करना चाहते हैं, आगे पार्टी की मर्ज़ी.

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम बीजेपी के कार्यकर्ता हैं. पार्टी ने जो कहा किया. मुझे लगता है कि पार्टी ने जो काम दिया है वह काम करना ही चाहिए, लेकिन मेरा सोचना है कि “तेरह साल तक सीएम रहा इसलिए अपने आप नेता हूं औऱ किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं. मुझे काम करना है तो मैं विधानसभा में बोलूंगा, दौरे पर बोलूंगा, इसलिए मुझे लगता है कि औऱ किसी चीज़ की जरूरत नहीं है.”

उन्होंने कहा कि मेरा इमोशनल अटैचमेंट मध्य प्रदेश की जनता से है औऱ मैं उसकी सेवा करना चाहता हूं. मैं सुख में नहीं तो दुख में सदा खड़ा रहूं, ये मेरे लिए भावनात्मक विषय है. मेरी इच्छा है, बाकी पार्टी जो निर्णय करेगी वह सर्वमान्य होगा.

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