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दस दिन छकाने के बाद आखिरकार ट्रेंकुलाइजर से गिरफ्त में आया टाइगर

बैतूल  12 दिसंबर 2018 ।अभी तक; जिले के वन अफसरों सहित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने सोमवार
शाम को तब राहत की सांस ली जब दस दिनों की मशक्कत के बाद उत्तर वनमंडल के सारणी वन परिक्षेत्र स्थित राखड़ बांध के समीप टाइगर को ट्रेंकुलाइजर देकर अपनी गिरफ्त में कर लिया।
दस दिन छकाने के बाद आखिरकार ट्रेंकुलाइजर से गिरफ्त में आया टाइगर, सवा सौ अधिकारी-कर्मचारियों चार हाथियों के साथ जुटे थे तलाश में बीते दस दिनों से सारणी पावर हाउस के क्षेत्र में टाइगर के मूव्हमेंट से जहां आमजन में दहशत थी। वहीं वन विभाग और एसटीआर के लगभग सवा सौ अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम चार हाथियों के साथ टाइगर की तलाश में जुटी हुई थी। सोमवार सायं साढ़े चार बजे राखड़ बांध के समीप टाइगर का लोकेशन मिलने पर सतपुड़ा टाइगर का लोकेशन मिलने पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के संचालक एसके सिंह के मार्गदर्शन में चलाये गये रेस्क्यू ऑपरेशन में एसटीआर के डॉक्टरों की निगरानी में टाइगर को टें्रकुलाइजर देकर पकड़ लिया। एसटीआर डायरेक्टर श्री सिंह के अनुसार टाइगर को वन विहार भोपाल ले जाया जा रहा है। बाद में उसे जंगल में छोडऩे का निर्णय लिया जायेगा। श्री सिंह ने बताया कि यूं तो बीते एक माह से बैतूल जिले के दक्षिण पश्चिम एवं उत्तर वन मंडलों के जंगलों में टाइगर के मूव्हमेंटकी खबरें आ रही है। अनेक बाद टाइगर बसाहटों के समीप भी देखा गया था। परंतु 1 दिसंबर से टाइगर सतपुड़ा पावर हाऊस सारणी के आसपास नजर आ रहा था। इस दौरान आम जन को भी टाइगर नजर आया था। पगमार्क मिलने पर स्थानीय वन अमले सहित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के अमले द्वारा टाइगर की तलाश की जा रही थी। टाइगर के मूव्हमेंट पर नजर रखने के लिए जगह-जगह कैमरे भी लगाये गये थे। साथ ही सतपुड़ा टाइगर रिजर्व एवं कान्हा टाइगर रिजर्व के चार हाथी भी टाइगर की निगरानी में लगे हुए थे। परंतु तगड़ी घेराबंदी के बाद भी एसटीआर और वन

अमले के हाथ टाइगर नहीं आ पा रहा था।
उल्लेखनीय है कि एसटीआर और स्थानीय वन अमले द्वारा चार हाथियों की मदद से घोगरी डेम के समीप टाइगर की तलाश की जा रही थी। तभी अमले को टाइगर के मूव्हमेंट की जानकारी राखड़ बांध के समीप मिली। लोकेशन के आधार पर एसटीआर
और स्थानीय वन अमला हाथियों से मौके पर पहुंचा। जहां जहां टाइगर नजर आने पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के संचालक एसके सिंह के मार्गदर्शन में एसटीआर के चिकित्सकों डॉ. गुरूदत्त शर्मा एवं डॉ. प्रशांत देशमुख की निगरानी में ट्रेंकुलाइज से टाइगर को बेहोश कर पकड़ लिया गया। टाइगर के पकड़े जाने पर एसटीआर स्थानीय वन अमले सहित सतपुड़ा पावर हाऊस सारणी के आसपास के रहवासियों ने राहत की सांस ली है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के संचालक एसके सिंह ने बताया कि टाइगर को सुरक्षित पकडऩे का रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा। उन्होंने बताया कि लगभग ढाई वर्ष के मेल टाइगर को अभी वन विहार भोपाल भेजा जा रहा है। सारणी क्षेत्र में टाइगर के लगातार दस दिनों तक रहने के सवाल पर एसटीआर डायरेक्टर श्री सिंह ने बताया कि जिस जगह से टाइगर को पकड़ा गया वहां ऊंची-ऊंची घास थी। खाने पीने का पर्याप्त इंतजाम होने से लिये वहां का वातावरण टाइगर को सूट कर गया था। इसलिए वह बीते दस दिनों से वहां रह
रहा था।

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