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RSS के बाद अब कांग्रेस सेवा दल भी बदलेगा ड्रेस, मेंबर्स पहनेंगे कुर्ता और जीन्स

नई दिल्ली 8 जुलाई 2018 । आरएसएस की ड्रेस कोड में बदलाव किए जाने के करीब दो साल बाद कांग्रेस के ज़मीनी संगठन ‘सेवा दल’ ने भी अब अपना पहनावे में बदलाव का फैसला किया है. अभी तक सेवा दल के सदस्य सफेद कुर्ता और पायजामा पहनते थे, लेकिन राहुल गांधी से सीख लेते हुए अब सेवा दल के सदस्य कुर्ते के साथ नीली जीन्स पहनेंगे. राहुल गांधी कुर्ते के साथ जींस पहनते रहे हैं और इसे उनका स्टाइल माना जाता है.

कांग्रेस सेवा दल के एक सदस्य ने बताया कि यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है, ताकि सेवादल के सदस्य आज के युवाओं जैसे लगें. इससे युवाओं के साथ कनेक्शन बनाने में मदद मिलेगी. गौरतलब है कि सेवा दल का गठन स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ज़मीनी स्तर पर काम करने के लिए किया गया था. लेकिन स्वतंत्रता के बाद इसकी भूमिका सिर्फ ध्वजारोहण और आपदा के समय बचाव कार्य तक ही सीमित रह गई. पर शायद कांग्रेस ने अब इसे फिर से मज़बूत बनाने की सोची है.

हालांकि कुर्ते के साथ जीन्स पहनने को लेकर राहुल गांधी की अक्सर आलोचना होती रही है. उन पर आरोप लगता रहा है कि वह पश्चिमी देशों के पहनावे को तरजीह देते हैं. खास बात ये है कि राहुल गांधी खुद ही आजकल कुर्ते के साथ पायजामा पहने हुए नज़र आते हैं. ये नया ड्रेस कोड 9 जुलाई से लागू होगा.

कांग्रेस सर्वे में जुटी, उम्मीद लेकर दावेदार मैदान में उतरे

विधानसभा चुनाव 2018 को लेकर एक ओर जहां प्रत्याशी चयन के लिए कांग्रेस सर्वे में जुटी है तो दूसरी ओर उसके कई दावेदार बगैर टिकट के ही मैदान में उतर आए हैं। इससे प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी माहौल बन गया है। जो नेता चुनावी मैदान में उतरे हैं उनमें से कुछ का दावा है कि उन्हें पार्टी की ‘ऊपर’ से हरी झंडी मिल गई है। जबकि कुछ दावेदार अपने ‘आका’ के भरोसे पर दम लगा रहे हैं। कांग्रेस ने इस बार अपने प्रत्याशियों का चयन सर्वे के माध्यम से करने का फैसला किया है लेकिन दावेदार अपनी जमीन बनाने के लिए क्षेत्र में सक्रिय दिखाई देने लगे हैं।हालांकि उनकी यह सक्रियता सर्वे में भी काम आएगी। छतरपुर, खरगोन, खंडवा, अशोकनगर, राजगढ़ से लेकर भोपाल तक दावेदारों के मैदान में उतरने से कांग्रेस की चुनाव में मौजूदगी दिखाई देने लगी है। कुछ विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां दो या दो से ज्यादा दावेदार हैं और वे सभी अभी से मैदान उतर आए हैं।

सूत्रों के मुताबिक पार्टी में सैद्धांतिक रूप से तय हुआ है कि 2013 के चुनाव में 5 हजार से कम वोट से हारे प्रत्याशियों को प्राथमकिता में रखा जाएगा। ऐसे करीब दो दर्जन नेताओं को फिर से टिकट मिलने की उम्मीद जागी है। इनमें अशोकनगर, बड़वारा, बरघाट, ब्यावरा, छतरपुर, दमोह, दिमनी, गुन्नौर, ग्वालियरपूर्व , हटा, जबलपुर पूर्व, जौरा, कुरवाई, महेश्वर, मलहरा, मनावर, मांधाता, सोनकच्छ, सीधी, शमशाबाद, शाजापुर, सरदारपुर, सैलाना, पौहरी, मेहगांव विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों या उनके समर्थित नेता को टिकट मिलने की संभावना है।

राजधानी की नरेला, दक्षिण पश्चिम, मध्य, हुजूर जैसे विधानसभा क्षेत्रों में डॉ. महेंद्र सिंह चौहान, मनोज शुक्ला, प्रवीण सक्सेना, अमित शर्मा, विभा पटेल, पीसी शर्मा, गोविंद गोयल, नासिर इस्लाम, मांडवी चौहान, आभा सिंह, अवनीश भार्गव, मखमल सिंह मीणा जैसे नेता सक्रिय हैं। छतरपुर जिले की बिजावर सीट से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व महामंत्री संगठन प्रभारी चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी गांव-गांव दौरे का एक राउंड पूरा कर चुके हैं। खंडवाखरगोन में भी सचिन यादव, विजयलक्ष्मी साधौ जैसे विपरीत ध्रुव की सक्रियता से कांग्रेस का विधानसभा चुनावी माहौल बन गया है। राजगढ़ की ब्यावरा सीट से हारे प्रत्याशियों में रामचंद्र दांगी भी इन दिनों क्षेत्र में होने वाले कार्यक्रमों में पहुंचकर अपनी मौजूदगी दिखाने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं।

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