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वैक्सीन आने के पश्चात कोरोना ग्राफ नीचे के बजाए ऊपर जा रहा है

भोपाल 27 मार्च 2021 । कोरोना संक्रमण रोकने हेतु टीकाकरण शुरू हुए दो महीने से ज्यादा समय हो गया, इसके पश्चात भी देश में संक्रमण के आंकड़े कम नहीं हुए, बल्कि एकाएक बढ़े ही हैं.
कोविड-19 पुनः फैल रहा है और जैविक रूपांतर (म्यूटेशन) करके नित नयी किस्म देखने को मिल रही है। प्रत्येक नये संक्रमण के साथ कोरोना वायरस को म्यूटेशन करने का मौका मिलता है, जिसका मतलब है आगे और ज्यादा मामले और मौतें होना।
देश में फरवरी 2021 के मुकाबले मार्च 2021 में कोविड संक्रमण के मामले पांच गुना रफ्तार से बढ़ रहे हैं. जो कोरोना की दूसरी लहर के हमले का सूचक हैं. ये सब तब है जबकि हम कोरोना के बारे में कई जानकारियां जुटा चुके हैं और उससे बचाव के लिए टीका तक बनाया जा चुका.
यह खुलासा राष्ट्रीय सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने ब्रिटिश उच्चायोग की स्वास्थ्य पत्रिका मे प्रकाशित अपनी ताजा शोध रिपोर्ट मे किया।

उन्होने कहा कि ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में मामले बढ़े है ।
कोरोना की बढ़ती दर के बीच कुछ पैटर्न भी दिख रहे हैं, जैसे इसका कोहराम कुछ खास राज्यों में ज्यादा है और वहां भी ग्रामीण और कस्बाई इलाके ज्यादा प्रभावित हैं.
डाॅ पुरोहित ने बताया कि वैक्सिनेशन शुरू होने के बाद भी मामले बढ़ने का एक प्रमुख कारण लोगों का निश्चिंत हो जाना है। पहले वैज्ञानिकों से लेकर डॉक्टरों तक के पास इस वायरस के बारे में खास जानकारी नहीं थी, इसलिए लगातार सचेत रहने की बात की जा रही थी. उपचार की जानकारी न होने के कारण लोगों में डर बना हुआ था. वहीं इटली और अमेरिका में लोगों की मौत की दर ज्यादा होने की सूचनाएं भी लगातार मीडिया में आ रही थीं, जिससे भारत की आबादी डर से ही सही, लेकिन सचेत थी.

उन्होने कहा कि वैक्सीन आ चुकी है और नियम के मुताबिक दी भी जाने लगी है. इसके अलावा कोरोना की वैसे कोई निश्चित दवा तो नहीं, लेकिन कई दवाएं हैं, जिनसे मरीज को राहत मिल पाती है. लॉकडाउन के दौरान अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्टर में भी इस बीमारी के लिहाज से कई परिवर्तन हुए. लिहाजा अब बड़ी जनसंख्या इसे लेकर निश्चिंत हो रही है और नियमों का उतनी सख्ती से पालन नहीं कर रही.

डॉ पुरोहित ने चेताया कि वैक्सीन लेकर लोग प्रोटोकॉल छोड़ रहे है।
वैक्सीन लोगों की मानसिकता बदल रहा रहा है। बहुत से लोग वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद ही निश्चिंत हो जाते हैं और कोरोना प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे. प्रदेश और देश मे ऐसे में कई मामले दिखे हैं जिनमें वैक्सिनेशन के बाद भी लोग कोरोना संक्रमित हो गए. संक्रमित हुए ये लोग जाहिर तौर पर अपने आसपास भी संक्रमण फैलाते हैं।

उन्होने अपनी रिपोर्ट मे बताया कि एक बड़ी समस्या वैक्सिनेशन की धीमी रफ्तार है।
पहले चरण में हेल्थ वर्कर्स को टीका मिला. इसके बाद दूसरे चरण में शुरुआत में सरकारी अस्पताल ही इसका केंद्र रहे लेकिन फिर तत्काल ही निजी अस्पतालों को भी टीकाकरण की अनुमति मिली. इसकी वजह टीकाकरण की धीमी गति ही थी।वैक्सीन को एक सीमित समूह तक दिया जाना भी मुद्दा है. फिलहाल 60 साल से ऊपर की आयु वालों या फिर क्रॉनिक बीमारी से जूझ रहे 45 साल की उम्र वालों का टीकाकरण हो रहा है.
डॉ पुरोहित ने कहा कि कोरोना की लहर को कंट्रोल करने के लिए वैक्सिनेशन प्रक्रिया को अनलॉक कर दिया जाना चाहिए. विशेषकर उन राज्यों में हर आयुवर्ग के टीकाकरण शुरू हो जाए, जहां मामले कई गुना तेजी से बढ़े हैं।
डॉ पुरोहित का मानना है कि टीकाकरण की यही गति रही तो हर्ड इम्युनिटी लायक आबादी के टीकाकरण में ही दशकभर लग जाएगा यानी पूरे 10 सालों तक देश कोरोना संक्रमण के खतरे में जीता रहेगा.

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