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तो लोकसभा चुनाव नहीं लड़ पाएंगे अमित शाह

नई दिल्ली 7 अप्रैल 2019 । कांग्रेस ने चुनाव आयोग से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह के लोकसभा चुनाव की उम्मीदवारी को रद्द करने की मांग की है। कांग्रेस ने अमित शाह पर अपने चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत भी की है। अमित शाह गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से अमित शाह की शिकायत करते हुए कहा है कि बीजेपी अध्यक्ष ने अपने हलफनामे में 2 जगहों पर गलत जानकारी दी है।

गांधीनगर से कांग्रेस के उम्मीदवार सीजे चावड़ा ने चुनाव से किए अपने शिकायत में कहा है कि अमित शाह ने अपने चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाई है। ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर देना चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि अमित शाह ने गांधीनगर में एक प्लॉट के बारे में और दूसरा अपने बेटे के कर्ज के बारे में सही जानकारी नहीं दी है। अमित शाह के बेटे जय उनके गारंटर भी हैं।

सीजे चावड़ा ने मीडिया रिपोर्टस का जिक्र करते हुए कहा कि अमित शाह ने अपनी प्रॉपर्टी की कीमत सही नहीं बताई है। अमित शाह ने अपनी प्रॉपर्टी की कीमत 25 लाख रुपए बताई है, जबकि सरकारी निर्देशों के अनुसार उस प्रॉपर्टी की कीमत 66.5 लाख है।

चावड़ा ने राज्यसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि अमित शाह ने राज्यसभा चुनाव के दौरान घोषित किया था कि उन्होंने अपने बेटे जय शाह की कंपनी के लिए अपनी संपत्ति गिरवी रखकर 25 करोड़ रुपये का कर्जा लिया है, लेकिन इसबार हलफनामे में इसका जिक्र नहीं है।

गौरतलब है कि 2016-17 में राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करते हुए अपनी सालाना आय 43,68,450 रुपये और पत्नी सोनल शाह की आय 1,05,84,450 रुपये दिखाई थी। जबकि 2017-18 में अमित शाह की कमाई बढ़कर 53,90,970 रुपये हो गई, जबकि उनकी पत्नी की कमाई 2,30,82,360 रुपये बढ़ गई।

उनके हलफनामे के मुताबिक बीजेपी अध्यक्ष ने शेयर बाजार में 17.59 करोड़ रुपए निवेश किए हैं, जबकि उनकी पत्नी सोनल शाह ने भी 4.36 करोड़ रुपए शेयर बाजार में लगाए हैं। अमित शाह के पास 35 लाख रुपए के गहने भी हैं। उनके पास 7 कैरेट के डायमंड और 25 किलो चांदी है। वहीं उनकी पत्नी सोनल शाह के पास 63 लाख रुपये की ज्वैलरी है। पिछले सात साल में अमित शाह की संपत्ति में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है।

बता दें कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वो गुजरात के गांधीनगर से बीजेपी के उम्मीदवार हैं। गुजरात की 26 सीटों पर 23 अप्रैल को चुनाव होने हैं। कांग्रेस ने अमित शाह के खिलाफ अपने विधायक सीजे चावड़ा को चुनाव मैदान में उतारा है।

भाजपा के स्थापना दिवस पर शामिल होने पहुचे राष्ट्रिय उपाध्यक्ष प्रभात झा शहर में होडिंग बेनर नही दिखने पर नाराज हुए

होडिंग बेनर को लेकर नाराज हुए प्रभात झा

उज्जैन में आज भाजपा के स्थापना दिवस पर शामिल होने पहुचे राष्ट्रिय उपाध्यक्ष प्रभात झा , स्थापना दिवस के कार्यक्रम के दोरान मंच से कहा शहर में नही दिखे मुझे एक भी होर्डिंग जन्मदिवस पर तो बहुत लग जाते है कम से कम पार्टी का ही लगा देते , लोकसभा सिट को लेकर कहा हम अच्छी सिट जीतेंगे लेकिन हम ज्योतिष नही की संख्या बता दे | में सचिन तेंदुलकर को आदर्श मानता हु जो भरे स्टेडियम में बल्ला उठा कर बोले थे की आज के बाद बल्ला नही उठाऊंगा और सन्यास ले लिया , कास ऐसा राजनीती में भी होता।

उज्जैन में आज भारतीय जनता पार्टी ने स्थापना दिवस मनाया , भाजप के स्थापना दिवस के अवसर पर भाजपा के लोकशक्ति कार्यलय पर राष्ट्रिय उपाध्यक्ष प्रभात झा विधायक मोहन यादव शामिल हुए , स्थापना दिवस पर प्रभात झा का पार्टी के नेताओ के प्रति दर्द छलका , झा जो कल तक होर्डिंग पोस्टर की राजनीती को गलत बताते थे उन्ही ने मंच से कहा की आज मैंने शहर को देखा पार्टी के स्थापना दिवस पर एक भी होर्डिंग नजर नही आया अगर किसी का जन्मदिन होता तो होर्डिग लग जाते पैसे नही होते तो भी कहते बाद में देख लेंगे बना देना ,कम से कम पार्टी का तो होर्डिंग लग जाता।

प्रभात झा ने कहा की मै सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर को आदर्श मानता हु जिन्होंने अपनी पहचान बना कर भरे स्टेडियम में बल्ला उठा कर कहा की आज के बाद बल्ला नही उठाएँगे , कास ऐसा राजनीती में भी होता।

झा ने मिडिया से चर्चा में कहा की इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा को भारी जित मिलना है और मोदी जी प्रधानमंत्री बनेगे , प्रदेश में भाजपा को कितनी सिट मिलेगी इस बात पर जा ने कहा अच्छी सिट लाएँगे कितनी लाएँगे इस बात पर झा ने कहा हम ज्योतिष नही की आंकड़े बता दे।

पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा बनाम रविशंकर प्रसाद की लड़ाई के पीछे क्या है गणित
‘बिहारी बाबू’ से लेकर ‘शॉटगन’ के नाम से मशहूर शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के पाले में आ गए हैं। 2014 के बाद से भाजपा के साथ उनकी नाराजगी का अपना इतिहास है। उन्होंने कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी में पार्टी का दामन थामा। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आज भाजपा के स्थापना दिवस पर मैंने अपनी पुरानी पार्टी छोड़ दी है।

शत्रुघ्न सिन्हा का सफर

शत्रुघ्न सिन्हा की राजनीति में एंट्री 1992 में नई दिल्ली के लोकसभा उपचुनाव से हुई थी। यह सीट लाल कृष्ण आडवाणी ने छोड़ दी थी क्योंकि 1991 के चुनाव में वह नई दिल्ली के साथ गुजरात के गांधीनगर से भी जीते थे और उन्होंने गांधीनगर चुना था। शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के राजेश खन्ना के सामने थे। राजेश खन्ना यह चुनाव 25,000 से कुछ ज्यादा वोटों के अंतर से जीते थे। उन्हें 1,01,625 वोट मिले थे और शत्रुघ्न सिन्हा को 73,369 वोट मिले थे। हालांकि आडवाणी की सीट से लड़ने की वजह से शत्रुघ्न सिन्हा का कद पार्टी में बढ़ा। उन्हें आडवाणी-वाजपेयी खेमे का ही माना जाता है। वह वाजपेयी सरकार में मंत्री भी रहे। वह दो बार पटना साहिब से सांसद रहे हैं। 2014 में उनकी जीत के बाद उन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया था, जिसके बाद पार्टी से उनकी अनबन शुरू हो गई थी। वह सांसद रहते हुए अलग-अलग फोरम पर पार्टी के खिलाफ बोलने लगे लेकिन पार्टी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। आखिर में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया। अब शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है और संभावना है कि कांग्रेस उन्हें पटना साहिब से टिकट दे सकती है। एक बार सिन्हा ने कहा भी था- सिचुएशन जो भी हो, लोकेशन वही रहेगी।

क्यों खास है पटना साहिब का मुकाबला

पटना साहिब सीट के राजनीतिक-सामाजिक समीकरण की बात करें तो भाजपा और कांग्रेस ने यहां जातीय गणित बिठाने की कोशिश की है। असल में पटना साहिब कायस्थ बाहुल्य सीट है। इससे पहले भाजपा के राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा (जो खुद कायस्थ हैं) भी यहां से टिकट मांग रहे थे लेकिन जब उन्हें टिकट नहीं मिला तो पटना एयरपोर्ट पर रविशंकर प्रसाद और आरके सिन्हा के समर्थक आपस में भिड़ गए थे और हाथापाई की नौबत आ गई थी। अब रविशंकर प्रसाद को टिकट मिलने के बाद शत्रुघ्न सिन्हा यहां से उन्हें चुनौती देते हैं तो यह ‘कायस्थ बनाम कायस्थ’ की लड़ाई मानी जाएगी।

पटना साहिब में वोट का गणित

पटना साहिब की कुल आबादी 25,74,108 है, जिसमें 26.63 फीसदी आबादी गांव में और 73.37 फीसदी आबादी शहर में रहती है। यहां कुल मतदाता 19,46,249 हैं, जिनमें 10,52,278 पुरुष हैं और 8,93,971 महिलाएं हैं। सवर्ण आबादी 28 फीसदी के आस-पास हैं। अनुसूचित जाति 6.12 फीसदी है जबकि अनुसूचित जनजाति की संख्या 0.02 फीसदी है। पटना साहिब में सवर्ण मतदाताओं की संख्या काफी है और यहां भाजपा मजबूत रही है।

2014 में पटना साहिब में भाजपा का वोट शेयर करीब 55 फीसदी था और कांग्रेस का करीब 25 फीसदी। जेडीयू का वोट शेयर 10 फीसदी था। तब ‘मोदी लहर’ को एक अहम फैक्टर माना जा रहा था और कहा गया था कि सवर्ण वोट काफी मात्रा में भाजपा के पक्ष में आया है लेकिन इस बार वैसी स्थिति नहीं है। इस बार भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक बंट सकता है। माना यह भी जा रहा है कि रविशंकर प्रसाद को कड़ी टक्कर मिल सकती है। एक बात जो उनके विपक्ष में जाती है वह यह कि उन्होंने आज तक नगर पालिका स्तर का भी चुनाव नहीं लड़ा है। वह चार बार से राज्य सभा सदस्य रहे हैं। एकमात्र प्रत्यक्ष चुनाव उन्होंने यूनिवर्सिटी स्तर पर ही जीता है, जब वह पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ के सेक्रेटरी बने थे। जबकि शत्रुघ्न सिन्हा फिल्म अभिनेता होने की वजह से भी लोकप्रिय रहे हैं। कायस्थ समीकरण की वजह से ही 2009 में कांग्रेस के टिकट पर अभिनेता शेखर सुमन ने चुनाव लड़ा था लेकिन हारने के बाद वह फिर से टेलीविजन की तरफ लौट गए थे।

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