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अमित शाह का बड़ा इशारा, भाजपा में आने जा रहे आडवाणी और जोशी के अच्छे दिन

नई दिल्ली 8 जून 2018 । भारतीय जनता पार्टी को हाल ही में दो बड़े झटके लगे हैं। एक झटका कर्नाटक में जहां चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद भी सत्ता नहीं मिल सकी। दूसरा झटका राज्यों के उपचुनाव में लगा है। इस वजह से भाजपा का नेतृत्व अब नये सिरे से मंथन में जुट गया है। खबर आ रही है कि भाजपा में लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे बुजुर्ग नेताओं के अच्छे दिन आ रहे हैं। इसका इशारा अमित शाह ने कर दिया है।

चुनावों में हार से पूरी तरह हिल गई है भाजपा
जैसे-जैसे तीन राज्यों के चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव आ रहे हैं, वैसे-वैसे भाजपा को बड़ा झटका लगता जा रहा है। इन झटकों से भाजपा पूरी तरह से हिल गई है। ऊपर से पीएम मोदी और अमित शाह भले ही शांत दिख रहे हों लेकिन अंदर से शीर्ष नेतृत्व के भीतर तूफान चल रहा है। यही वजह है कि अब दोनों ने नये से सोचना शुरू कर दिया है।

बुजुर्ग नेताओं के चुनाव लड़ने पर हटा बैन
जनसत्ता डॉट कॉम की खबर की मानें तो अमित शाह ने अनौपचारिक रूप से 75 साल पार कर चुके भाजपा नेताओं पर से बैन हटा लिया है। हालांकि इसकी अभी घोषणा नहीं की गयी है। अमित शाह ने इसका बड़ा इशारा जरूर कर दिया है। खबर है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस बारे में बता भी दिया है कि वरिष्ठों के चुनाव लड़ने से बैन हट गया है।
लोकसभा चुनाव में उतर सकते हैं मैदान में
भाजपा अध्यक्ष के बड़े इशारे के बाद मार्गदर्शक मंडल में बैठे आडवाणी और जोशी जैसे नेताओं के चेहरे खिल उठे हैं। उम्मीद है कि भाजपा उनको लोकसभा 2019 के चुनाव में मैदान में उतार भी सकती है। इतना ही नहीं उनको जिताने के लिए पूरा जोर भी लगाया जा सकता है। उनके अलावा शत्रुघ्न सिन्हा, करिया मुंडा से लेकर सुमित्रा महाजन तक शामिल हैं।
विपक्ष की एकता देखकर ठनक गया माथा
दरअसल यह फैसला कर्नाटक में विपक्ष की एकता देखकर किया गया है। शाह और मोदी को पता है कि विपक्ष की एकता भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता चाहे जोशी हों, आडवाणी हों या शत्रुघ्न सिन्हा, सब मोदी के खिलाफ ही बयान देते नजर आते हैं। मोदी और शाह इसी बयानबाजी को रोकने और भाजपा में विरोध के सुर बंद करने की वजह से यह फैसला कर चुका है।
अनुभव और चेहरे का इस्तेमाल कर उतारेंगे चुनावी जंग में
भाजपा की योजना है कि ऐसे वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारने के दो फायदे होंगे। एक फायदा होगा उनके अनुभव से चुनावी मार्गदर्शन और योजना बनाने में मदद मिलेगी। दूसरा जोशी हों या आडवाणी, सब बड़े चेहरे वाले नेता हैं जिनपर वोटर आज भी भरोसा करते हैं

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