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मोदी की कुंडली का विश्लेषण, क्या भाग्य में लिखा है दोबारा प्रधानमंत्री बनना ?

नई दिल्ली 14 मई 2019 । क्या 2019 में भी फिर से नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेगें? क्या 2014 में चली मोदी लहर क्या 2019 में भी बनी रहेगी? लोकसभा चुनाव 2019 में 6 दौर का मतदान संपन्न हो चुका है. अब सिर्फ 1 दौर की वोटिंग बाकी है और फिर हर कोई टकटकी लगाकर 23 मई का इंतजार करेगा क्योंकि उसी दिन चुनाव नतीजे आएंगे. उसी दिन ये पता चलेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सत्ता में वापसी होती है या नहीं. लेकिन हमारा देश आस्थावानों का देश है. हर बात के लिए हम लोग गृह-नक्षत्रों की भी राय लेते हैं. इसीलिए नतीजे आने से पहले हम लोगों ने पीएम मोदी की कुंडली बांच कर ये जानने की कोशिश की कि क्या वो लगातार दूसरी बार पीएम बनेंगे?

जन्मतिथि- 17 सितंबर 1950

जन्म समय- 11:00 बजे

जन्मस्थान- मेहसाणा (गुजरात)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली में बनने वाले राज योग

रूचक पंच महापुरुष योग, अमला योग, गज केसरी योग, वोशी योग, बुध आदित्य योग, चंद्र-मंगल योग, मूसल योग, दण्ड योग, पर्वत योग, कहाल योग, पाराशरी राज योग

प्रधानमंत्री की कुंडली में बनने वाले ये सभी राजयोग कुंडली में ग्रहों की विशेष स्थितियों से निर्मित होते हैं और व्यक्ति को जीवन में उन्नति प्रदान करते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली में राजयोग के कारण इस विजय होने के 90% योग हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अच्छा रहने वाला लोकसभा चुनाव भी अप्रैल से मई की अवधि में संपन्न हो रहें है, इसलिए इस समय में चुनावों में उन्हें सफलता मिलने की संभावना का 90% है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण

मोदी वृश्चिक लग्न और वृश्चिक राशि में जन्मे हैं और उनका जन्म अनुराधा नक्षत्र में हुआ है. वर्तमान समय में 24 जनवरी 2020 तक शनि की उतरती हुई साढ़ेसाती का प्रभाव भी तो होगा किन्तु बुध और केतु दोनों ही चंद्र की दशा से एकादश भाव में स्थित होकर सफलता दिला रहे हैं.

केतु की अंतर्दशा व्यतीत होने के उपरांत शुक्र की अंतर्दशा प्रारंभ होगी जो सप्तम भाव का स्वामी होकर दशम भाव में स्थित है और महादशा स्वामी चंद्रमा से दशम भाव में स्थित है. इन स्थितियों से यह पता चलता है कि 2019 में मोदी जीत की ओर अग्रसर होंगे और उनकी जीत में धार्मिक संस्थाएं, महिलायें तथा विशेष रूप से मुस्लिम समाज अपना योगदान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

हैरान करती है राहुल गांधी की कुंडली, चक्कर में पड़ गए बड़े-बड़े ज्योतिषी
राहुल गांधी. इस नाम से भारत के सभी लोग परिचित हैं. भारतीय राजनीति की एक मजबूत शख्सीयत जिन्हें राजनीति विरासत में मिली हैं. जिनके परिवार का देश की राजनीति के साथ-साथ देश की सत्ता पर भी दशकों तक एकछत्र राज रहा है. हालांकि पिछले कुछ समय से लगातार गांधी परिवार सहित कांग्रेस पार्टी की लोकप्रियता लगातार कम होती जा रही है लेकिन जैसा कि प्रतिद्वंदियों द्वारा कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगाया जाता है वह समय शायद ही आये. क्योंकि कांग्रेस सहित गांधी परिवार की राजनीतिक जड़ें काफी गहरी हैं जिन्हें उखाड़ना आसान नहीं है

विश्व के सबसे मजबूत लोकतंत्र की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी का राजनैतिक भविष्य आने वाले चुनाव 2019 से तय होगा. 2019 के चुनाव में राहुल गांधी का भविष्य क्या रहेगा यह चुनाव का परिणाम तय करेगा. राहुल गांधी की कुंडली इस विषय में क्या कहती हैं आईये जानें-

अनुमानित जन्मतिथि – 19 जून 1970

जन्म समय – 02:28 दोपहर

जन्म स्थान – दिल्ली

राहुल गांधी को अभी मंगल की महादशा में सूर्य का अंतर चल रहा है. राहुल गांधी की कुण्डली ये बताती है की स्वयं उनके द्वारा किया हुआ कार्य इन्हें बहुत अधिक सफलता नहीं देतें हैं लेकिन पितृपक्ष दवारा इन्हें विरासत में अपार संपत्ति मिलने के योग हैं.

राहुल गांधी को वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है. जो कि इनके लिये अशुभ है. इससे इनके बने हुए कुछ कार्य बिगड़ने के योग भी बन रहे हैं. जिस कारण राहुल गांधी के विजय होने के 25% योग बनते हैं जिससे वर्तमान और 2024 यानि अगले लोकसभा चुनाव में भी राहुल गांधी शायद ही अपना वर्चस्व स्थापित कर पायें.

कुण्डली के अनुसार निष्कर्ष यह निकलता है की राहुल गांधी को 543 सीटों में मे से लगभग 25% सीट यानि 135 मिल सकतीं हैं, याने पिछली बार की कांग्रेस की कुल सीटों से वो तीन गुना ज्यादा पा सकते हैं, फिर भी वो बहुमत के जादुई आंकड़े 272 से आधे पर ही रह सकते हैं.

क्या कहती है प्रियंका गांधी की कुंडली, क्या मोदी को रोकने में होंगी कामयाब ?

कांग्रेस पार्टी की महासचिव बनने के साथ ही प्रियंका गांधी लगातार सियासी सुर्खियों में हैं. सक्रिय राजनीति में कदम रखते ही प्रियंका गाँधी को देश का सबसे प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश दिया गया. अब जबकि 6 चरण का चुनाव हो चुका है, नतीजे आने में सिर्फ एक चरण की वोटिंग रह गई है, तो प्रियंका गांधी को लेकर सब ये जानने को उत्सुक हैं कि वो पीएम मोदी का विजयरथ रोक पाती हैं या नहीं ?

कांग्रेस पार्टी का मानना है कि वह उनका तुरुप का पत्ता साबित होंगी और कांग्रेस के खोई प्रतिष्ठा को वापस दिलाएंगी. यह तो बात हुई राजनीतिक दांव की लेकिन क्या प्रियंका के सितारे भी इस बात पर मुहर लगाते हैं, जानने के लिए आइए देखते हैं प्रियंका गांधी की कुंडली का विवेचन करते हैं –

प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर नई दिल्ली में हुआ. मिथुन लग्न की कुंडली है. राशि वृश्चिक है, बुद्ध के प्रभाव से जातक गुणी वक्ता और बुद्धिमान होता है वही नीच का चंद्रमा है लेकिन उसका स्वामी मंगल केंद्र में बैठकर राजयोग बना रहा है.

इस कुंडली में राजनीति के कारक ग्रह गुरु केंद्र में है, देव गुरु बृहस्पति ग्रहों के राजा सूर्य के साथ अपने ही भाव में लग्नेश बुद्ध के साथ केन्द्रधिपत्य राजयोग का निर्माण कर रहे है जिसके कारण प्रियंका गांधी के प्रति कांग्रेस कार्यकर्ताओ का एक नैसर्गिक लगाव है.

शनि की अगर हम बात करे तो शनि मिथुन लग्न की कुंडली में भाग्येश होकर योगकारक होता है और इस कुंडली में कुम्भ राशि में शनि के मित्र शुक्र बैठे है लेकिन शनि देव खुद 12 वे भाव में विराजमान है और यही कारण है की जीवन के 32 वे वर्ष में नहीं बल्कि जीवन के 47 वे वर्ष में इनका राजनीति में आना हुआ है.

वर्तमान में प्रियंका गांधी की शुक्र की महादशा में शनि की अंतरदशा चल रही है. जो बहुत उत्तम नहीं कहा जा सकता, परंतु शनि जन्मकुंडली भाग्याधिपति होने के कारण उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के खोए हुए जनाधार को निश्चित रूप से वापसी की ओर ले जायेगा. अर्थात् यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि कांग्रेस आई के लिए प्रियंका गांधी का राजनीतिक प्रवेश अवश्य लाभकारी सिद्ध होगा. परंतु इन्हें गंभीर रूप से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का सामना भी करना पड़ेगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मकालिक राशि भी वृश्चिक ही है जो कि प्रियंका गांधी की है. ऐसे में राजनीति के मैदान में पीएम मोदी को राहुल गांधी से अधिक चुनौती प्रियंका गांधी से मिलेगी. यद्यपि दोनों की ही साढ़ेसाती चल रही है, जिसके फलस्वरूप मोदी जी उत्तर प्रदेश में न केवल पूर्व से बहुत कम सफलता प्राप्त करेंगे, अपितु प्रियंका गांधी के योगकारी शनि एवं बृहस्पति की उत्तम अवस्था के कारण भाजपा को एवं अन्य पार्टियों को गंभीर रूप से हानि होगी.

सितंबर 2019 तक प्रियंका गांधी को स्वयं के परिवार के उपर जहां राजनीतिक आघात का मुकाबला करना होगा, वहीं शासन-प्रशासन की तरफ से भी संकट का सामना भी करना पड़ सकता है. इस बीच प्रियंका गांधी एवं उनके परिवार, विशेष रूप से पति को शासन सत्ता का खासा विरोध झेलना पड़ेगा. लेकिन सितंबर 2019 के बाद बुध की अंतरदशा इन्हें भारतीय राजनीति के ध्रुव तारे की तरह प्रकाशित करेगी.

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