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अनिल अंबानी ने कमलनाथ सरकार से मांगी और राहत

भोपाल 9 मार्च 2020 । अनिल अंबानी की स्वामित्व वाली सासन अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट से सस्ती बिजली देना अब रिलायंस पावर को भारी पड़ रहा है। 25 वर्ष की अवधि तक सस्ती बिजली देने के लिए मध्य प्रदेश सहित सात राज्यों के साथ रिलायंस पावर ने पावर परचेज एग्रीमेंट यानी पीपीए किया है। लेकिन अब राज्यों के लिए राहत रिलायंस के लिए आफत बनने लगी है। ऐसे में रिलायंस की मदद के लिए एक बार फिर मध्य प्रदेश सरकार सामने आई है अब उसने रिलायंस के आग्रह पर केंद्र सरकार को पत्र भेजा है जिसमें केंद्र सरकार में ऐसे सभी राज्यों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है जिसे सासन प्रोजेक्ट से सस्ती बिजली मिल रही है। दरअसल रिलायंस पावर चाहती है कि जिस तरह मप्र सरकार ने हाल ही में उसे बड़ी राहत दी है और 390 करोड़ रुपये के टैक्स को माफ कर दिया है, कमोवेश उसी तरह की रियायत वे राज्य भी दें, जिनको सासन प्रोजेक्ट से सस्ती बिजली मिल रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मप्र सरकार ने सासन प्रोजेक्ट से सस्ती बिजली मिलने की दलील देते हुए रिलायंस से 390 करोड़ रुपये के टैक्स की वसूली को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।

रिलायंस के लिए मप्र अहम क्यों
दरअसल मप्र सरकार ने रिलायंस पॉवर को टैक्स में बड़ी राहत दी है। इस वजह से रिलायंस के लिए मप्र टैक्स रियायत के मामले में अहमियत रखता है। मप्र सरकार के द्वारा मिली रियायत के फैसले से उत्साहित होकर रिलांयस ने बाकी उन सभी सैट राज्यों की बैठक बुलाने का आग्रह किया है। जिनको सासन प्रोजेक्ट सस्ती बिजली मिल रही है। ज्ञात हो सात राज्यों को 13 बिजली कंपनियों से सासन प्रोजेक्ट के तहत सस्ती बिजली मिल रही है। इन राज्यों में मप्र के अलावा दिल्ली, गुजरात, उत्तप्रदेश, हरियाणा और पंजाब शामिल हैं। इन सभी राज्यों को रिलायंस पॉवर ने पत्र लिखकर बैठक बुलाने का आग्रह किया है। बता दें, मप्र सरकार ने भी केंद्र को पत्र लिखकर रिलायंस के लिए बैठक आयोजित करने का आग्रह किया है।

मप्र में अभी डेढ़ रुपये यूनिट है बिजली
रिलायंस की सासन पॉवर प्रोजेक्ट द्वारा मप्र को अभी डेढ़ रुपये यूनिट की दर पर बिजली मिल रही है। हालांकि पीपीए के हिसाब से इसकी कीमत मात्र 1.21 रुपये है, लेकिन कई तरह के अन्य चार्ज जुडऩे की बजह से इसकी लागत बढ़ गई है। इस पावर प्रोजेक्ट की क्षमता 360 मेगावाट है। यहां पैदा होने वाली बिजली का 37.5 फ़ीसदी हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को मिल रहा है। इस तरह मध्य प्रदेश को इस समय शासन प्रोजेक्ट से 1485 मेगावाट बिजली मिल रही है। सासन प्रोजेक्ट की पहली यूनिट से अगस्त 2013 में बिजली का उत्पादन शुरू हुआ था।

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