मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> ICICI बैंक में 36.5 करोड़ डॉलर लोन का एक और घपला

ICICI बैंक में 36.5 करोड़ डॉलर लोन का एक और घपला

नई दिल्ली 6 मई 2019 । ICICI बैंक की पूर्व सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्ट चंदा कोचर एक और लोन घपले में फंसती नजर आ रही है। चंदा कोचर पर मॉरिशस की होल्डिंग कंपनी एस्सार स्टील मिन्नोस्टा एलएलसी को साल 2014 में 36.5 करोड़ रुपये का कर्ज देने के मामले में कथित रूप से रिजर्व बैंक को ‘गुमराह’ करने की बात सामने आ रही है।

केंद्रीय बैंक ने भी अपनी जांच में लोन दिए जाने में कई अनियमितता बरतने की बात कही है। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से जांच की गई रिपोर्ट और जांचकर्ताओं के इंटरव्यू से यह सामने आया है कि साल 2014 की जुलाई की शुरुआत में आरबीआई ने ICICI बैंक की तरफ से एस्सार स्टील मिन्नोस्टा के प्रोजेक्ट कैपिसिटी- मैन्युफैक्चरिंग स्टील पैलेट- 4.1 मिट्रीक पर टन से बढ़ाकर 7 मिट्रीक पर टन करने के लिए लोन मंजूर करने पर सवाल खड़े किए थे।

आरबीआई की तरफ से दावा किया गया था कि पैलेट प्रोजेक्ट के शुरू होने के समय में विस्तार की बैंक की तरफ से मंजूरी यह दर्शाती है कि यह ‘एवर-ग्रीनिंग’ लोन है। बैंक ने पहले के लोन के भुगतान से पहले ही दूसरी बार लोन दिया। आरबीआई ने ICICI बैंक से यह सिफारिश की थी कि वह एस्सार स्टील मिन्नोस्टा को दिए गए लोन को ‘सब-स्टैंडर्ड असेट्स’ के रूप में दर्शाए।

हालांकि, ICICI बैंक ने सितंबर 2014 में आरबीआई को यह बताया कि भले ही बैंक ने क्षमता बढ़ाने को मंजूरी दे दी हो लेकिन वह किसी भी तरह से अतिरिक्त पैसा नहीं देगी। बैंक के रिकॉर्ड्स के हिसाब से यह सही नहीं है। जून 2014 में बैंक ने 36.5 करोड़ डॉलर का लोन मॉरिशस की एस्सार स्टील लिमिटेड को दिया।

वेणुगोपाल धूत, दीपक कोचर के ठिकानों पर CBI रेड, FIR दर्ज
ICICI की पूर्व प्रबंध संचालक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज की है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि यह छापेमारी सीबीआई महाराष्ट्र के मुंबई स्थित चार ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
Play Video
रिकॉर्ड्स यह दर्शाते हैं कि कोचर ने इस मामले में आरबीआई को गुमराह किया। बैंक की तरफ से कहा गया था कि बैंक एस्सास स्टील मिन्नोस्टा प्रोजेक्टक में किसी भी तरह के बदलाव के लिए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फंडिंग नहीं करेगा। चंदा कोचर उस क्रेडिट कमेटी का हिस्सा थीं जिसने मॉरिशस की कंपनी को लोन दिया था।

जांचकर्ताओं के अनुसार कोचर ने कंपनी एक्ट 2013 और सेबी लिस्टिंग के नियमों के अनुसार अपने कर्तव्यनिष्ठा का पालन नहीं किया। एस्सार ग्रुप ICICI बैंक के सबसे बड़े कर्जदारों में से एक है। चंदा कोचर का नाम सबसे पहले वीडियोकॉन को 3250 करोड़ रुपये के लोन देने में अनियमतता के मामले में सामने आया था। इस मामले में चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।

ICICI बैंक की पूर्व सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्ट चंदा कोचर एक और लोन घपले में फंसती नजर आ रही है। चंदा कोचर पर मॉरिशस की होल्डिंग कंपनी एस्सार स्टील मिन्नोस्टा एलएलसी को साल 2014 में 36.5 करोड़ रुपये का कर्ज देने के मामले में कथित रूप से रिजर्व बैंक को ‘गुमराह’ करने की बात सामने आ रही है।

केंद्रीय बैंक ने भी अपनी जांच में लोन दिए जाने में कई अनियमितता बरतने की बात कही है। इंडियन एक्सप्रेस की तरफ से जांच की गई रिपोर्ट और जांचकर्ताओं के इंटरव्यू से यह सामने आया है कि साल 2014 की जुलाई की शुरुआत में आरबीआई ने ICICI बैंक की तरफ से एस्सार स्टील मिन्नोस्टा के प्रोजेक्ट कैपिसिटी- मैन्युफैक्चरिंग स्टील पैलेट- 4.1 मिट्रीक पर टन से बढ़ाकर 7 मिट्रीक पर टन करने के लिए लोन मंजूर करने पर सवाल खड़े किए थे।

आरबीआई की तरफ से दावा किया गया था कि पैलेट प्रोजेक्ट के शुरू होने के समय में विस्तार की बैंक की तरफ से मंजूरी यह दर्शाती है कि यह ‘एवर-ग्रीनिंग’ लोन है। बैंक ने पहले के लोन के भुगतान से पहले ही दूसरी बार लोन दिया। आरबीआई ने ICICI बैंक से यह सिफारिश की थी कि वह एस्सार स्टील मिन्नोस्टा को दिए गए लोन को ‘सब-स्टैंडर्ड असेट्स’ के रूप में दर्शाए।

हालांकि, ICICI बैंक ने सितंबर 2014 में आरबीआई को यह बताया कि भले ही बैंक ने क्षमता बढ़ाने को मंजूरी दे दी हो लेकिन वह किसी भी तरह से अतिरिक्त पैसा नहीं देगी। बैंक के रिकॉर्ड्स के हिसाब से यह सही नहीं है। जून 2014 में बैंक ने 36.5 करोड़ डॉलर का लोन मॉरिशस की एस्सार स्टील लिमिटेड को दिया।

वेणुगोपाल धूत, दीपक कोचर के ठिकानों पर CBI रेड, FIR दर्ज
ICICI की पूर्व प्रबंध संचालक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने FIR दर्ज की है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि यह छापेमारी सीबीआई महाराष्ट्र के मुंबई स्थित चार ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
Play Video
रिकॉर्ड्स यह दर्शाते हैं कि कोचर ने इस मामले में आरबीआई को गुमराह किया। बैंक की तरफ से कहा गया था कि बैंक एस्सास स्टील मिन्नोस्टा प्रोजेक्टक में किसी भी तरह के बदलाव के लिए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फंडिंग नहीं करेगा। चंदा कोचर उस क्रेडिट कमेटी का हिस्सा थीं जिसने मॉरिशस की कंपनी को लोन दिया था।

जांचकर्ताओं के अनुसार कोचर ने कंपनी एक्ट 2013 और सेबी लिस्टिंग के नियमों के अनुसार अपने कर्तव्यनिष्ठा का पालन नहीं किया। एस्सार ग्रुप ICICI बैंक के सबसे बड़े कर्जदारों में से एक है। चंदा कोचर का नाम सबसे पहले वीडियोकॉन को 3250 करोड़ रुपये के लोन देने में अनियमतता के मामले में सामने आया था। इस मामले में चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

प्रियंका गांधी का 50 नेताओं को फोन-‘चुनाव की तैयारी करें, आपका टिकट कन्फर्म है’!

नई दिल्ली 21 जून 2021 । उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव …