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मोदी की टेंशन बढ़ाने वाला एक और सर्वे, आज चुनाव हुए तो NDA को मात्र इतनी सीटें

नई दिल्ली 3 फरवरी 2019 । आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी सियासी पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं. सभी दल अपने-अपने कार्यकर्ताओं को इसके लिए पूरे जी जान से लगने के लिए कह रहे हैं. इन सब के बीच देश का सियासी मिजाज समझने के लिए कराए गए सर्वे की मानें तो भले ही एनडीए सबसे ज्यादा सीटें हासिल कर ले लेकिन सत्ता पर करते हुए नहीं दिख रही है.

टाइम्स नाउ- वीएमआर के ताजा चुनावी सर्वे में NDA का वोट शेयर 4.4% घटकर 38.9% हो सकता है जबकि UPA के वोट शेयर में 4.1% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. पिछली बार 543 में से 336 सीटें जीतने वाली NDA को इस बार 252 सीटें मिल सकती हैं जबकि UPA को 147 सीटें मिलती दिख रही हैं. वहीं, अन्य के खाते में 144 सीटें जा सकती हैं. इससे साफ है कि NDA बहुमत (272) से दूर रहने वाला है.

सीटों के लिहाज से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में बीजेपी को महागठबंधन से बड़ी चुनौती मिलने जा रही है. पिछले लोकसभा चुनाव में NDA ने 80 में से 73 सीटें जीतते हुए दिल्ली की सत्ता हासिल की थी. हालांकि इस बार एसपी और बीएसपी के गठबंधन को सबसे ज्यादा 51 सीटें मिलने की संभावना है. सर्वे की मानें तो राज्य में NDA को 27 सीटें ही मिलेंगी. दिलचस्प यह है कि कांग्रेस पिछली बार की तरह इस बार भी 2 सीटें ही जीतती दिख रही है.

बता दें कि इस पोल के लिए देशभर के 15,731 लोगों की राय ली गई है. कुल 703 पोलिंग स्टेशनों को कवर किया गया है और हर पोलिंग स्टेशन से करीब 23 लोगों के सैंपल्स लिए गए हैं.

UP में बन रहे चौंकाने वाले समीकरण, मोदी की साख दांव पर

लोकसभा चुनाव में अब थोड़े से ही दिन बचे हैं. ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि मार्च के शुरू में चुनाव की घोषणा हो जायेगी. ऐसे में भाजपा इस कोशिश में है कि जनता को बताये कि उन्होंने अच्छे काम किये हैं जबकि विपक्ष पूरी कोशिश में इस सरकार की असफलताओं को बताने का काम कर रहा है. बड़े-बड़े वादों पर बनी मोदी सरकार पिछले दिनों काफ़ी आलोचना में रही है. चुनाव लेकिन समीकरणों पर भी लड़ा जाता है. समीकरण की बात करें तो कई राज्यों में ये भाजपा के ख़िलाफ़ जा रहे हैं, कुछ ऐसी ही परिस्थिति है उत्तर प्रदेश की.

उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा का गठबंधन हो जाने के बाद दलित, मुस्लिम और यादव वोटर का साथ हो गया है वहीँ भाजपा अब बस इस उम्मीद में है कि किसी तरह कांग्रेस मुस्लिम वोटों का बंटवारा करने में कामयाब हो जाए जिससे कि उसे कुछ फ़ायदा हो जाए. भाजपा की उम्मीदें प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से कुछ उजागर हुई हैं लेकिन ये पार्टी नेता जानते हैं कि कांग्रेस कुछ ही सीटों पर अपना दम रखती है. भाजपा के लिए जो समीकरण फ़ायदेमंद हो सकता है वो है कि उसे सामान्य जातियों का वोट मिले लेकिन वो भी इस बार पूरी तरह ख़ुश नहीं हैं.

छोटे छोटे दल जिनसे भाजपा ने 2014 चुनावों से पहले समझौता किया था, अब वो अलग होने की कोशिश में हैं. वो भी जुगाड़ लगा रहे हैं कि उन्हें महागठबंधन में जगह मिल जाए. सपा भी चाहती है कि किसी तरह से भाजपा को शिकस्त दी जाए और कोई मौक़ा छोड़ा न जाए. अपना दल और सुहेलदेव पार्टी के बारे में भी ख़बर है कि ये NDA छोड़ सकती हैं. ऐसे में भाजपा अकेले ही चुनाव लड़ेगी.

कुल मिलकर जो समीकरण उत्तर प्रदेश में बन रहे हैं उससे ये लगता है कि भाजपा को दलित, यादव, मुस्लिम वोट तो नहीं ही मिलने हैं, इसके अलावा अन्य पिछड़ी जातियों के वोट भी नहीं मिल सकेंगे. इसके अलावा सामान्य जातियों के वोट भी शायद ही पूरे मिल पायें. यही वजह है कि भाजपा की स्थिति राज्य में काफ़ी ख़राब हो गई है. स्थिति यूँ है कि भाजपा के सांसद उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ना नहीं चाहते. ख़बरें यहाँ तक हैं कि राजनाथ सिंह जैसे नेता भी चुनाव लड़ने से कतरा रहे हैं.सपा-बसपा अपने पक्ष में बन रहे माहौल से ख़ुश हैं और उम्मीद कर रही हैं कि यही माहौल आगे भी बना रहेगा.

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