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पुण्य प्रसून बाजपेयी को हटवाने के लिए बाबा रामदेव ने अपना विज्ञापन वापस ले लिया था

नई दिल्ली 8 अगस्त 2018 । एबीपी न्यूज़ से पुण्य प्रसून बाजपेयी को हटवाने के लिए पतंजली किंग बाबा रामदेव ने चैनल से अपने विज्ञापन वापस ले लिए थे जिससे चैनल को बहुत हानि हो रही थी. इस बात का खुलासा स्वयं पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपनी आपबीती में किया है जिसे ‘द वायर’ ने अपने आज के संस्करण में प्रकाशित किया है. जो लोग पुण्य प्रसून बाजपेयी को जानते हैं उन्हें मालूम होगा वह पहले प्रसिद्ध चैनल ‘आजतक’ के लिए काम करते थे. जब उन्होंने ‘आजतक’ छोड़ा था तब भी मीडिया में यह चर्चा थी कि बाबा रामदेव के कारण ही उन्हें ‘आजतक’ छोड़ना पड़ा था क्योंकि एक इंटरव्यू में उन्होंने बाबा से कुछ ऐसे सवाल पूछ लिए थे जो पहले से तय नहीं किए गए थे.

कोई ज़माना रहा होगा जब पत्रकार अपनी मर्ज़ी से देश के हित को ध्यान में रख कर पूरी ईमानदारी से काम करते रहे होंगे परन्तु आजकल ऐसा नहीं होता. सत्तापक्ष का कोई भी नेता जब टीवी पर आता है तो उससे क्या पूछना है क्या नहीं यह पहले से तय होता है इसलिए मेरा मानना है कि टीवी देखना बंद कर देना चाहिए या टीवी पर केवल आईपीएल के मैच देखिए क्योंकि यहां पत्रकारिता नहीं कुछ और होती है जिसे समझ पाना बहुत मुश्किल है विशेष कर आज की तारिख में. पुण्य प्रसून बाजपेई ने अपने लेख में जो लिखा है उसे पढ़ कर मैं भी कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गया और सोचने लगा कि ऐसा भी होता है? लेकिन होता है तभी तो जो खुद की ज़मीर और अंतरात्मा नहीं बेच सकता उसे त्यागपत्र देना पड़ता है. आप भी उस लेख के कुछ अंश पढ़िए फिर कल से जब आप टीवी देखेंगे तो आपके देखने का नजरिया बदल जाएगा और स्क्रीन पर कुछ और चल रहा होगा और आपको कुछ और दिखेगा.

‘आजतक’ छोड़ने के बाद पुण्य प्रसून बाजपेयी जब एबीपी न्यूज़ में आए तो प्राइम टाइम करने को मिला. उन्होंने अपने प्रोग्राम का नाम रखा ‘मास्टर स्ट्रोक’. कुछ ही दिनों में इस प्रोग्राम को जो लोकप्रियता मिली वह चैनल की टीआरपी को ऊपर ले गई मगर सरकार की टीआरपी को नीचे ले गई. पुण्य प्रसून बाजपेयी के अनुसार चीफ एडिटर ने उन्हें बुलाया और कहा: ‘आपका प्रोग्राम बहुत अच्छा हो रहा है मगर क्या ऐसा नहीं हो सकता कि आप अपने प्रोग्राम में न मोदी का नाम लें और न उनका फोटो दिखाएं? आप सरकार की जिस नीति का विरोध करना चाहें उससे संबंधित मंत्री का नाम लें.’ पुण्य प्रसून बाजपेयी के अनुसार उन्होंने कहा: ‘ऐसा कैसे हो सकता है? जब प्रधानमंत्री स्वयं सभी योजनाओं का उद्घाटन करते हैं और स्वयं ही उसकी घोषणा करते हैं तो नाकामी का ठीकरा मंत्रियों पर कैसे फोड़ा जा सकता है? क्या बीजेपी में मोदी के सामने कोई नेता है? प्रचारक भी वही हैं, काम करने वाले भी वही हैं तो नाम किसी और क्यों लिया जाए?’

अंततः मंत्रालय के निर्देशानुसार यह फैसला लिया गया कि ‘मास्टर स्ट्रोक’ में मोदी का नाम नहीं लिया जाएगा. लेकिन उसके बाद भी लिया गया तो 9 से 10 के बीच चैनल के प्रसारण में व्यवधान उत्पन्न किया गया ताकि दर्शक चैनल बदल कर दूसरे चैनल पर चले जाएं और प्रोग्राम की टीआरपी कम हो जाए. प्रोग्राम के बीच में आने वाला पतंजलि का विज्ञापन भी हटा लिया गया और संसद में बयान दिया गया कि पुण्य प्रसून बाजपेयी खुद को क्या समझता है उसको देख लिया जाएगा. बाजपेयी के अनुसार अमित शाह ने हर राज्य में जा कर बीजेपी आईटी सेल को निर्देश दिया कि पुण्य प्रसून बाजपेयी को टारगेट करो. यह सब होने के बाद फाइनल फैसला लिया गया की त्यागपत्र देना है. पुण्य प्रसून बाजपेयी लिखते हैं कि त्यागपत्र के आधे घंटे बाद ही पतंजलि का विज्ञापन आने लगा और चैनल का व्यवधान भी अपने आप समाप्त हो गया.

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