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मतदाता जेंडर अनुपात में मप्र 23 प्रदेशो से पीछे

उज्जैन 4 अप्रैल  2019 । मप्र को मॉडल मानकर देशभर मे लगभग 15 साल से बेटी बचाओ बेटी पढाओं अभियान चलाया जा रहा है, किन्तु मतदाता जेंडर (लैंगिक) अनुपात के मामले में मप्र 23 राज्यों से पीछे है। पडोसी राजस्थान का जेंडर अनुपात भी मप्र के ही बराबर है। पुडूचेरी ऐसा राज्य है , जहां एक हजार पुरुष मतदाता पर 1117 महिला मतदाता है। इसके पश्चात केरल 1066 व मणिपुर 1054 का नंबर है। मप्र मे कुल 2 करोड 67 लाख 78 हजार पुरुष मतदाता है | जबकि महिला मतदाताओ की संख्या 2 करोड 46 लाख 22 हजार है। यहां एक हजार पुरूष मतदाताओ पर 99 महिला मतदाता है। राजस्थान में 2 करोड 52 लाख 64 हजार पुरुष मतदाता व 2 करोड 32 लाख 14 हजार महिला मतदाता है। इनका अनुपात भी 99 ही है। किन्तु दोनो राज्यो में हालात एक-दूसरे के प्रतिकूल होने के बाद भी महिलाओ की संख्या मे मप्र पिछडा हुआ है।
यह आंकडे फेडरेशन ऑफ जेंडर इक्वालिटी के कार्यकारी सदस्य डॉ नरेश पुरोहित ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईएमएम)सिरमौर , हिमाचल प्रदेश मे आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला मे प्रस्तुत अपने शोध-पत्र मे उजागर किए।
डॉ पुरोहित ने राष्ट्रीय कार्यशाला मे जानकारी देते हुए कहा कि छतीसगढ़ को छोड दिया जाए तो यूपी, बिहार, हरियाणा दिल्ली में मतदाता जेंडर अनुपात की स्थिति सबसे खराब है।
दिल्ली में जेंडर अनुपात महज 812 है। यह सभी राज्यों की तुलना में सबसे कम है। दिल्ली में कुल एक करोड़ 36 लाख 95 हजार मतदाता है। इसमे पुरूष मतदाताओं की संख्या 75 लाख 56 हजार व महिला मतदाताओं की संख्या 61 लाख 39 हजार है। यहां तुलनात्मक रुप से महिला मतदाताओ की संख्या सभी राज्यों से कम है। इसकें हालांकि कई कारण हो सकते है, किन्तु इससे स्पष्ट है कि दिल्ली में महिलाओं की संख्या काफी कम है। इन आंकडो से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन प्रदेशों मे माहिलाओ की क्या स्थिति होगी |
डॉ पुरोहित ने शोध पत्र मे बताया कि आंध्र प्रदेश में एक हजार पुरुष पर कुल 1015 महिला मतदाता है। अरुणाचल प्रदेश मे 10 23, गोवा 1043, तमिलनाडु मे 1021, छत्तीसगढ़ 996, आसाम 955, गुजरात 924 , जम्मू कश्मीर 926, हिमाचल प्रदेश 972, कर्नाटका 976, नागालैंड 983 मतदाता जेंडर अनुपात है। मप्र के मुकाबले उक्त सभी राज्यों में जेंडर अनुपात ज्यादा है। जबकि उक्त राज्यों में बेटी बचाओ जैसा अभियान भी नही चला है।

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