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दुनिया से गायब हो जाएगा केला: अमेरिका में मचा कहर

नई दिल्ली 18 अगस्त 2019 । लोगों का पसंदीदा फल केला अगले कुछ सालों में दुनिया से गायब हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार एक खतरनाक फंगस के कारण केलों का अस्तित्व खतरे में है। यह फंगस केले की एक प्रजाति को पहले ही नष्ट कर चुका है और अब यह नई प्रजातियों की ओर बढ़ रहा है। इसका संक्रमण वर्तमान में अमेरिका में कहर मचा रहा है। अमेरिका के कई प्रयासों के बावजूद यह वहां पर पहुंच गया है।

दक्षिणी अमेरिकी देश कोलंबिया में इस फंगस के आने के बाद से सरकार ने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की है। कोलंबिया के उत्तरपूर्वी प्रांत ला गुआजिरा में 180 हेक्टेयर की मिट्टी में फ्यूजेरियम टाइप-4 (टीआर-4) फंगस पाया गया था। संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी इस बारे में चेतावनी दी गई है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से कहा गया है कि केलों में फैली इस बीमारी पर रसायनों का छिड़काव भी बेअसर साबित हो रहा है। कोई भी दवा प्रभावी नहीं साबित हो रही है। यह टीआर-4 फंगस एक बार आने के बाद मिट्टी में करीब 30 साल तक बना रह सकता है।

हालांकि, शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस फंगस से जल्द ही निपटा जा सकेगा। मलेशिया और इंडोनेशिया में सबसे पहले सामने आया था फंगस टीआर-4 फंगस सबसे पहले मलेशिया और इंडोनेशिया में पाया गया था। इसके बाद यह जल्दी ही चीन में भी फैल गया। जहां पर यह बहुत तेज से और बहुत बड़े क्षेत्र में फैला। यह फंगस पेड़ की जड़ों में हमला करता है और पेड़ की नसों को ब्लॉक कर देता है, जिससे पेड़ मर जाता है। यह बीमारी अफ्रीका, मध्य पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में 2013 में फैल चुकी थी। अब यह दक्षिणी अमेरिका में फैल रही है। यहां दुनिया में सबसे ज्यादा केले का उत्पादन होता है। यहां पर केले की प्रजाति कैवेंडिश पर खतरा मंडरा रहा है।

फंगस से निपटने की व्यापक पैमाने पर चल रही तैयारी कोलंबियन एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट (आइसीए) की महाप्रबंधक डेयनिरा बैरेरो लियोन ने ट्वीट कर बताया कि इस फंगस से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, ब्राजील और मेक्सिको के विशेषज्ञों को लगाया गया है। इसके साथ ही इससे निपटने के लिए पुलिस और सेना के भी इस्तेमाल की तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा हम भरपूर कोशिश करेंगे। इस बीमारी के कारण 1950 में बिग माइक नाम की केलों की प्रजाति विलुप्त हो चुकी है। वैज्ञानिकों ने बताया है कि मेडागास्कर में पाई जाने वाली कैवेंडिश केले की प्रजाति पर इस वायरस का असर बेहद कम होता है। यह केलों की जंगली प्रजाति है और इस प्रजाति के केले सख्त होते हैं।

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