मुख्य पृष्ठ >> अंतर्राष्ट्रीय >> RSS की गवाही से हुई थी भगत सिंह, राजगुरू, और सुखदेव को फांसी

RSS की गवाही से हुई थी भगत सिंह, राजगुरू, और सुखदेव को फांसी

नई दिल्ली 2 मार्च 2020 । पाकिस्तान के लाहौर कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर अनुरोध किया गया कि ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के खिलाफ दर्ज हत्या के मामले में एक पूर्ण पीठ जल्द सुनवाई करे, जिससे फांसी दिए जाने के 83 साल बाद उनकी बेगुनाही साबित की जा सके. एक याचिका पर आज के ही दिन सुनवाई होनी है।

आपको बता दे की ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी सांडर्स की कथित हत्या के मामले में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था. ब्रिटिश शासन ने 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को फांसी दे दी थी, उन पर औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ साजिश रचने के आरोपों के तहत मुकदमा चला था।

भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के अध्यक्ष वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने लाहौर स्थित न्यायालय में एक आवेदन दर्ज करके मामले में जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। कुरैशी ने अपनी याचिका में कहा कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव स्वतंत्रता सेनानी थे, और उन्होंने अविभाजित भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी.

कुरैशी ने कहा कि यह एक राष्ट्रीय महत्व का विषय है और एक पूर्ण पीठ को इस मामले में समाधान करना चाहिए। उन्होंने पुनर्विचार के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए शहीद भगत सिंह की सजा रद्द करने की भी गुहार लगाई और कहा कि सरकार को भगत सिंह को सरकारी पुरस्कार से सम्मानित करना चाहिये.

कुरैशी ने कहा कि भगत सिंह को पहले आजीवन कैद की सजा हुई थी, लेकिन बाद में एक और झूठे मामले में उन्हें मौत की सजा सुना दी गई,कुरैशी ने कहा की भगत सिंह आज भी न केवल सिखों के लिए बल्कि मुसलमानों के लिए भी सम्मानित हैं और पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना दो बार उनको श्रृद्धान्जली दे चुके हैं।

किसी ने यह जानने की कोशिश की देश की आजादी के लिए शहीद हो जाने वोलों के विरुद्ध गवाही देने वाले ये कौन लोग थे? और उनके तथा उनके परिवार का आजादी से पहले और आज के समय के क्या हाल है.

दिल्ली में जब भगत सिंह पर अंग्रेजों की अदालत में असेंबली में बम फेंकने का मुकद्दमा चला तो सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त के खिलाफ. शोभा सिंह और शादी लाल ने गवाही दी थी, और उन दोनों को देश से गद्दारी करने का इनाम भी मिला। दोनों गावाहों को ब्रिटिश सरकार द्वारा न सिर्फ सर की उपाधि दी गई बल्कि और भी कई दूसरे फायदे मिले।

इनमे से एक शोभा सिंह को दिल्ली में बेशुमार दौलत और करोड़ों के सरकारी निर्माण कार्यों के ठेके मिले आज कनाॅट प्लेस में सर शोभा सिंह स्कूल में कतार लगती है, बच्चो को प्रवेश नहीं मिलता है जबकि शादी लाल को बागपत के नजदीक अपार संपत्ति मिली, आज भी श्यामली में शादीलाल के वंशजों के पास चीनी मिल और शराब कारखाना है ।

सर शादीलाल और सर शोभा सिंह के प्रति भारतीय जनता कि नजरों मे बहुत घृणा थी लेकिन शादी लाल को गांव वालों का तिरस्कार झेलना पड़ा उसके मरने पर वहां के किसी भी दुकानदार ने अपनी दुकान से कफन का कपड़ा तक नहीं दिया. शादी लाल के लड़के उसका कफ़न दिल्ली से खरीद कर ले गए तब जाकर उसका अंतिम संस्कार हो पाया था।

जबकि शोभा सिंह खुशनसीब रहा, उसे और उसके पिता सुजान सिंह जिसके नाम पर पंजाब में कोट, सुजान सिंह गांव और दिल्ली में सुजान सिंह पार्क है. सर सोभा सिंह के नाम से एक चैरिटबल ट्रस्ट भी बन गया जो अस्पतालों और दूसरी जगहों पर धर्मशालाएं आदि बनवाता तथा व्यवस्था करता है.

आज दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास बाराखंभा रोड पर जो मॉडर्न स्कूल हैं वह शोभा सिंह की जमीन पर ही है और उसे सर शोभा सिंह स्कूल के नाम से जाना जाता था.

बकौल खुशवंत सिह, बाद में शोभा सिंह ने यह गवाही दी, शोभा सिंह 1978 तक जिंदा रहा और दिल्ली की हर छोटे बड़े आयोजन में बाकायदा आमंत्रित अतिथि की हैसियत से जाता था।हालांकि उसे कई जगह अपमानित भी होना पड़ा लेकिन उसने या उसके परिवार ने कभी इसकी फिक्र नहीं की. सर शोभा सिंह मेमोरियल लेक्चर भी आयोजित करवाता है जिसमे कई बड़े-बड़े नेता और लेखक अपने विचार रखने आते हैं, बिना शोभा सिंह की असलियत जाने य़ा फिर जानबूझ कर अनजान बने, उसकी तस्वीर पर फूल माला चढ़ा आते हैं।

इस मामले में गवाही देने वाले अन्य गवाह निम्न लिखित थे।

दीवान चन्द फ़ोगाट
जीवन लाल
नवीन जिंदल की बहन के पति का दादा
भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दादा

दीवान चन्द फोगाट D.L.F. कम्पनी का founder था, इसकी एक ही इकलौती बेटी थी जो कि के•पी• सिंह को ब्याही और के•पी •सिंह D.L.F के मालिक बन गये, अब के•पी•सिंह की भी इकलौती बेटी है जो कि कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आज़ाद के बेटे सज्जाद नबी आज़ाद के साथ ब्याही गई है, और अब ये DLF के मालिक बनेगे.

जीवनलाल मशहूर एटलस कम्पनी का मालिक था। इन्हीं की गवाही के कारण ही भगत सिंह व अन्य को 14 फरवरी 1931 को फांसी की सजा सुनाई गई थी.

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

राहुल ने जारी किया श्वेतपत्र, बोले- तीसरी लहर की तैयारी करे सरकार

नई दिल्ली 22 जून 2021 । कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस …