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भागवत बोले, राम मंदिर निर्माण के लिए जनता के दबाव पर ही सरकार लाएगी कानून

नागपुर 26 नवम्बर 2018 । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को वीएचपी की हुंकार सभा में राम मंदिर निर्माण की मांग का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि राम मंदिर पर फैसला चुनाव से पहले आना चाहिए. राम मंदिर बनने से सारे झगड़े खत्म हो जाएंगे. भागवत ने कहा कि मंदिर पर कानून बनाने के लिए जन दबाव जरूरी है. जन दबाव पड़ने से सरकार को मंदिर निर्माण के लिए कानून बनाने के लिए बल मिलेगा. उन्होंने कहा कि सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने जन संवेदनाओं को नहीं समझा.

हिंदुओं में धैर्य इसलिए मंदिर निर्माण में लगा समय- भागवत
भागवत ने कहा कि सदियों से अयोध्या में रामलला विराजमान हैं. हिंदुओं में धैर्य है इसलिए ही राम मंदिर निर्माण के लिए 30 साल का समय लग गया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनहित के मामले टालने का क्या मतलब है. उन्होंने कहा कि सत्य और न्याय को आप टालते चले आ रहे हैं, तो यह कहना बंद कीजिए कि ‘जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड’. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिकता में राम मंदिर नहीं है, तो केंद्र सरकार को कानून बनाकर श्रीराम मंदिर बनाना चाहिए.

सरकार को सोचना चाहिए कैसे हो मंदिर निर्माण- सरसंघचालक
भागवत ने कहा कि अगर अपनी व्यस्तता के कारण या अपने समाज की संवेदना को न जानने के कारण राम मंदिर निर्माण सुप्रीम कोर्ट की प्राथमिकता में नहीं है. तो, सरकार को सोचना चाहिए कि मंदिर बनाने के लिए कानून कैसे आ सकता है. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार को शीघ्र कानून लाना चाहिए. यही सही होगा. उन्होंने कहा कि पूरे देश में जनजागरण अभियान चल रहा है. इससे सरकार पर लोगों का दबाव बनेगा. राम मंदिर के निर्माण के लिए जन दबाव बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और इस पर जल्दी फैसला आना चाहिए. यह साबित हो चुका है कि वहां पर पहले मंदिर था.

हम राम मंदिर पर लड़ेंगे नहीं लेकिन अड़ेंगे- मोहन भागवत
भागवत ने कहा कि राम मंदिर का मामला राजनीतिक नहीं, बल्कि जनहित का मामला है. इस पर जल्द से जल्द सुनवाई होनी चाहिए. उन्होंने केंद्र सरकार को स्पष्ट रूप से कहा कि हम राम मंदिर पर लड़ेंगे नहीं लेकिन अड़ेंगे. उन्होंने कहा कि राम, कृष्ण और शिव सबको जोड़ने वाले हैं. मंदिर बनने से भारत के वैभव का निर्माण होगा. सरकार को अध्यादेश लाकर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए.

राम मंदिर पर बोले भागवत- न्याय में देरी भी अन्याय, मंदिर के लिए जल्द बने कानून

अगले साले होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले देश में एक बार फिर राम मंदिर का मामला गरमा गया है. अयोध्या में हो रही वीएचपी की धर्मसभा के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर को लेकर बड़ा बयान दिया है. नागपुर में उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और इसी वजह से राम मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं.

संघ प्रमुख ने कहा कि राम मंदिर पर कोर्ट से फैसला जल्दी मिलना चाहिए.उन्होंने आगे कहा कि जनहित का मामला टालना नहीं चाहिए. सत्या और न्याय को टालते रहना ठीक नहीं है. लगता है कि कोर्ट की प्राथमिकता में मंदिर है ही नहीं. समाज केवल कानून से नहीं चलता है और न्याय में देरी भी अन्याय के बराबर है.

मोहन भागवत ने कहा कि साबित हो चुका है कि वहां पर राम मंदिर था. एएसआई द्वारा किए गए खुदाई के दौरान पाया गया था कि वहां पर मंदिर था जिसे ध्वस्त कर दिया गया. उन्होंने कहा कि अगर राम मंदिर नहीं बनेगा तो वहां पर किसका मंदिर बनेगा. उन्होंने आगे कहा कि भव्य राम मंदिर बनाने की जरूरत है.

मोहन भागवत ने आगे कहा कि संसद में जल्द से राम मंदिर बनाने का कानून पास किया जाए. उन्होंने कहा कि एक बार फिर पूरे देश को राम मंदिर के मामले पर एक साथ आना चाहिए.

‘धर्मसभा का हर निर्णय मानेगी आरएसएस’

इससे पहले वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय सचिव चम्पत राय ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिए हमें पूरी जमीन चाहिए और जमीन बंटवारे का कोई भी फार्मूला मंजूर नहीं होगा. चम्पत राय ने आगे कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को जमीन के मालिकाना हक का केस वापस ले लेना चाहिए. और वीएचपी इस जमीन पर नामज नहीं होने देगी.

बता दें कि राम मंदिर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा था. धर्म सभा के मंच से आरएसएस के अखिल भारतीय सह सरकार्यवाह कृष्णा गोपाल ने कहा कि जो भी धर्मसभा का निर्णय होगा आरएसएस उसे मानेगी.

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