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बाइडेन-जिनपिंग की वर्चुअल मुलाकात, खत्म होगा दोनों देशों के बीच का विवाद, भारत के लिए क्या है इस बैठक के मायने?

नई दिल्ली 15 नवंबर 2021 । दुनिया की दो धुर विरोधी शक्तियों की मुलाकात आज है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है। तमाम विवादों के बीच आज अमेरिका के राष्ट्रपति आज चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ वर्चुअल मीटिंग करने जा रहे हैं। इसमें आपसी तनाव और सुरक्षा के मुद्दे पर खास चर्चा होगी। इस मीटिंग में भारत के साथ चीन के विवाद पर भी चर्चा की संभावना है। लेकिन दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच मुलाकात से पहले ही ताइवान के मुद्दे को लेकर तनाव और बढ़ गया है। जिसका असर बातचीत में दिख सकता है। इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

अमेरिकी समय के मुताबिक शाम पांच से छह बजे के बीच वर्चुअली बातचीत होगी। वीडियो डॉयलाग में ताइवान, साउथ चाइना सी, इंडो पैसेफिक के मुद्दों पर चर्चा संभव है। बातचीत में क्वाड का भी मुद्दा उठ सकता है। इसके अलावा अमेरिका अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगा। वहीं जिनपिंग भी चीन की चिंताओं को रखेंगे। बाइडेन और जिनपिंग के बीच बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच रिश्तें काफी खराब हैं।

ताइवान पर चीन की धमकी के बाद बिगड़े हालात

पिछले कुछ समय से अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ा हुआ है। बाइडेन साफ कर चुके हैं कि वो ताइवान, दक्षिणी चीन सागर और अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार हनन को लेकर चीनी रवैये से नाखुश हैं। बातचीत के दौरान जो बाइडेन जिनपिंग के सामने अमेरिका की चिंताओं और इरादों को साफ ढंग से रखेंगे। बाइडेन जिनपिंग की बैठक से पहले अमेरिका और चीन के बीच का विवाद और ज्यादा बढ़ गया है। ताइवान पर चीन की धमकी के बाद अमेरिका ने भी सख्त तेवर दिखाएं हैं। जिसके बाद संभावना इस बात को लेकर जताई जा रही है कि शी जिनपिंग और जो बाइडेन की बैठक भी तनावपूर्ण रहेगी।

भारत के साथ चीन के विवाद पर भी चर्चा संभव!

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन जब जिनपिंग संग मीटिंग कर रहे होंगे तो उस वक्त भारत में मंगलवार की सुबह होगी। वैसे तो चीन की तरफ से मीटिंग में बातचीत को लेकर मुद्दे अभी साफ नहीं हैं, लेकिन इसमें भारत के साथ चीन के विवाद पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।

अमेरिका और चीन के संबंधों का इतिहास

चीन और अमेरिका के बीच रिश्तों की शुरुआत 1970 में पाकिस्तान के जरिए शुरू हुई। इसे ‘पिंग-पॉन्ग डिप्लोमेसी’ भी कहा जाता है। इसमें अमेरिका की टेबल-टेनिस टीम चीन गई थी। इसके बाद 1972 में राष्ट्रपति निक्सन चीन की आठ दिनों की यात्रा पर गए। इसके सात साल बाद दोनों देशों के बीच पूरी तरह से कूटनीतिक संबंध स्थापित हो गए। अमेरिकी डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने 636 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापारिक समझौता चीन के साथ किया। यह पूरी तरह से चीन के पक्ष में झुका हुआ था।

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