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Zee समूह से बड़ी खबर: डॉ. सुभाष चंद्रा ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली 27 नवम्बर 2019 । जी समूह से आ रही बड़ी खबर के मुताबिक सुभाष चंद्रा ने जी एंटरटेनमेंट बोर्ड के अध्यक्ष पद से आज तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। बताया गया है कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। वे अब भी जी एंटरटेनमेंट बोर्ड में गैर कार्यकारी निदेशक के तौर पर बने रहेंगे।

मिली जानकारी के मुताबिक, ऐसा कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि कंपनी नियम के मुताबिक चेयरमैन कंपनी के एमडी व सीईओ का रिलेटिव नहीं हो सकता है।

गौरतलब है कि ‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) अपनी मीडिया और एंटरटेनमेंट कंपनी ‘जी ऐंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज’ (ZEE) की 16.5 प्रतिशत हिस्सेदारी वित्तीय निवेशकों को बेचने की योजना बना रहा है। इनमें से 2.3 प्रतिशत हिस्सेदारी ‘OFI Global China Fund’ और ‘LLC’ अथवा इसकी सहयोगी कंपनियों को बेचने की योजना है।

माना जा रहा है कि यह बिक्री अगले कुछ दिनों में हो सकती है और इससे कंपनी के प्रमोटर्स को 4500-5000 करोड़ रुपए की वसूली में मदद मिलेगी। बताया जाता है कि इस बारे में डील लगभग हो चुकी है और 16.5 हिस्सेदारी बेचने के बाद कर्जदाताओं को यह रकम चुकाई जाएगी। इस डील के बाद प्रमोटर्स की इस कंपनी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहेगी और पुनीत गोयनका एमडी व सीईओ के तौर पर काम करते रहेंगे।

सुभाष चंद्रा को मिला इस बड़े उद्योगपति का ‘साथ’

‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा को ‘महिंद्रा’ ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा का साथ मिला है। आनंद महिंद्रा ने सुभाष चंद्रा के समर्थन में आगे आते हुए उनकी तारीफ में एक ट्वीट किया है। इस ट्वीट में आनंद महिंद्रा ने कहा है, ‘जी एंटरटेनमेंट के प्रमोटर को इस तरह का एक झटका (one stumble) आगे बढ़ने से नहीं रोक पाएगा। उनके कदम नहीं डगमगाएंगे।’

इस ट्वीट में आनंद महिंद्रा का यह भी कहना है, ‘सुभाष चंद्रा ने पहले ही भारतीय टेलिविजन का भविष्य देख लिया था और अपने दम पर देश की पहली मीडिया एंटरटेनमेंट कंपनी शुरू की थी। सुभाष चंद्रा का साहस हमेशा से शानदार रहा है और एक झटका उन्हें अपने इरादों से पीछे नहीं कर सकता है। उम्मीद है कि वह इस स्थिति से आसानी से निजात पा लेंगे।’

मुख्यमंत्री ने इन वरिष्ठ पत्रकार को बनाया अपना मीडिया सलाहकार

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने वरिष्ठ पत्रकार पंकज शर्मा को अपना मीडिया सलाहकार नियुक्त किया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी दीपक बाबरिया की सहमति से पंकज शर्मा की नियुक्ति की गई है। उनकी नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है। इस बारे में शासन की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। उनकी संविदा नियुक्ति की सेवा शर्तें अलग से जारी की जाएंगी। बता दें कि पंकज शर्मा लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक मामलों पर उनकी काफी अच्छी पकड़ है। उन्होंने देश के विभिन्न मीडिया संस्थानों का साथ कार्य किया है।

राजनीतिक पत्रकारिता के साथ उन्होंने कई देशों में स्पेशल असाइनमेंट्स भी कवर किए हैं। वे विभिन्न सरकारी समितियों में भी रह चुके हैं। 2007 में कांग्रेस जॉइन करने से पहले पंकज ढाई दशक से भी अधिक समय तक नवभारत टाइम्स के साथ बतौर पत्रकार काम कर चुके हैं।

पंकज शर्मा फिलहाल दिल्ली में रहते हैं, लेकिन अब मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार के तौर पर नियुक्ति हो जाने के बाद वे जल्द ही वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। पंकज शर्मा की मुख्यमंत्री कमलनाथ के मीडिया सलाहकार के पद पर नियुक्ति के बारे में जारी आदेश को आप यहां देख सकते हैं।

‘राष्ट्रीय सहारा’ की परीक्षा में सुप्रिय का असफल होना

संस्थान के संगियों में एक और नाम है सुप्रिय प्रसाद। जिंदगी में ऐसे बहुत कम मौके आते हैं, जब मेरी भाषा और शैली, मेरी सोच, संवेदना और सृजनशीलता के सामने जवाब देने लगती है। आज अपने संस्थान के इस संगी सुप्रिय प्रसाद के बारे में लिखते हुए सालों बाद मेरी शब्द सम्पदा और शैली खुद को कमजोर महसूस कर रही है। मतलब सुप्रिय की उपलब्धि मेरी सोच, शैली और शब्द से बहुत आगे है।

आज हम सोचने को जरूर मजबूर हैं कि कार्यशैली के किस गुर ने सुप्रिय को इतना सफल और नामवर बनाया। एक प्रसंग याद करता हूं कि 1995 में दैनिक ‘राष्ट्रीय सहारा’ के उप संपादक (प्रशिक्षु) पद की जांच परीक्षा में सुप्रिय का असफल होना हम सहपाठियों के लिए खबर थी। मगर वह उसकी असफलता नहीं थी और न ही योग्यता, बल्कि जो भी हुआ, वह उस युग की एक दस्तक थी, जो युग सुप्रिय के नाम लिखा जाना था।

यह विचित्र संयोग है कि झारखण्ड से आईं दो हस्तियां लोकमानस में अपना विशिष्ट स्थान बनाकर देश-दुनिया और समाज को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पहला-रांची के महेंद्र सिंह धोनी और दूसरा-दुमका शहर के सुप्रिय प्रसाद। आईआईएमसी से पत्रकारिता करने के बाद सुप्रिय प्रसाद ने कमर वहीद नकवी के अधीन एक ट्रेनी के तौर पर ‘आजतक’ जॉइन किया था। तब ‘आजतक’ एसपी सिंह के निर्देशन में ‘दूरदर्शन’ पर प्रसारित होने वाला एक बुलेटिन भर था। आज की तारीख में ‘टीवी टुडे’ ग्रुप के चारों चैनलों-‘आजतक’, ‘तेज’, ‘हेडलाइंस टुडे’ और ‘दिल्ली आजतक’ की जिम्‍मेदारी सुप्रिय के कंधों पर है। इसे कहते हैं सफलता।

करीब 25 साल पहले झारखंड के एक कस्बानुमा शहर दुमका के टीन बाजार से बतौर स्ट्रिंगर पत्रकारिता का अपना सफर शुरू करने वाले सुप्रिय आज हिंदी टीवी पत्रकारिता के उन चार संपादकों (आशुतोष, दीपक चौरसिया और अजीत अंजुम) में शुमार हैं, जिनके नाम से चैनल का रुतबा है। तभी तो टीवी की दुनिया में कहा जाता है कि सुपिय्र केवल टीआरपी मास्‍टर ही नहीं, बल्कि तकनीक के भी जानकार हैं। अपनी टीम से कैसे काम लिया जाता है, इसको भी वे भली-भांति जानते हैं। इससे आगे यह भी कहना ज्यादा मुनासिब होगा कि सुप्रिय की उपलब्धियां जानने के लिए कोई सर्च इंजन तलाशने की जरूरत नहीं, बल्कि फिलवक्त ‘आजतक’ जो भी है, उसमें सुप्रिय की निष्ठा, ईमानदारी और कर्मठता है। ‘आजतक’ का इतिहास सुप्रिय का इतिहास है।

जनसंचार संस्थान की एक घटना याद आती है। ‘दूरदर्शन’ के वरिष्ठ अधिकारी मयंक अग्रवाल आये थे-खोजी पत्रकारिता पढ़ाने और अभ्यास करवाने। विषय था ‘विमान खरीद सौदे में दलाली’। हमें उस दलाली का पर्दाफाश करना था। उस अभ्यास में जो टीम अव्वल रही, उसकी अगुआई सुप्रिय कर रहे थे।

सुप्रिय खबरों को जानने वाला और उनकी अहमियत समझने वाला इंसान है। इसी वजह से वह हिंदी टीवी पत्रकारिता का सबसे सफल और सिद्ध संपादक है। वह खबरों को जीवन मानता है, उनके लिए शिल्प सजाता है, जो शिल्प आपके जीवन का कोई हिस्सा है, अनदेखा हिस्सा। समय के साथ खबरें कैसे अपना रंग बदलती हैं, ढंग बदलती हैं और अपना तर्ज बदलती हैं, कोई सुप्रिय से पूछे। उसके लिए खबरों का ट्रीटमेंट पूजा है, इबादत है।

इसके बावजूद सुप्रिय की पत्रकारिता से जुडी कई ख्वाहिशें हैं, ढेरों मन्नतें हैं, जिन्हें वह पूरा करना चाहते हैं। हम मित्रों की दुआ है कि वे तमाम ख्वाहिशें सुप्रिय के कदम चूमें और मन्नतें उसका सिर चूमें।

क्यों भारतीय प्रिंट मीडिया के लिए काफी राहत भरी है ये खबर

‘इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन’ (INMA) द्वारा पिछले दिनों दिल्ली में ‘द साउथ एशिया मीडिया फेस्टिवल 2019’ (The South Asia Media Festival 2019) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भारत में प्रिंट इंडस्ट्री के बारे में फैल रहे मिथकों को दूर करने का प्रयास किया।

इस मौके पर जहां विशेषज्ञों ने प्रिंट इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न मामलों और मिथकों पर बात की, वहीं ‘कंतार मीडिया’ (Kantar Media) के सीईओ और चेयरमैन एंडी ब्राउन ने प्रिंट मीडियम की ग्रोथ के बारे में बताया। अपनी प्रजेंटेशन के दौरान उन्होंने ‘टीजीआई ग्लोबल क्विक व्यू’ (TGI Global Quick View) द्वारा जारी रिपोर्ट में शामिल डाटा का हवाला भी दिया।

‘टीजीआई ग्लोबल क्विक व्यू’ कि रिपोर्ट में 22 देशों में से भारत न्यूजपेपर पब्लिशर्स के लिए चौथा सबसे बड़ा मार्केट है। आज के डिजिटल युग में भी टीवी के बाद उपभोग के मामले में प्रिंट दूसरे नंबर पर बना हुआ है। अपने खास और एक्सक्लूसिव रीडर बेस के कारण यह युवा वर्ग में भी सबसे ज्यादा विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है।

ब्राउन का कहना था, ‘लगभग बीस सालों से इंटरनेट लोगों के जीवन में अहम भूमिका निभा रहा है, ऐसे में दुनिया में अखबार पढ़ने वालों की संख्या लगातार कम हो रही है, लेकिन भारत इसका एक बड़ा अपवाद है। यहां स्थिति इसके विपरीत है।’

ब्राउन का कहना था कि दुनिया भर में तमाम जगह कई सालों से विभिन्न न्यूज ब्रैंड्स को अपने पारंपरिक प्रिंटेड फॉर्मेट के ऑडियंस में कमी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भारत में स्थिति बिल्कुल इसके विपरीत है। भारत में जनसंख्या बढ़ने और सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में बढ़ोतरी के कारण हिंदी और अन्य प्रादेशिक भाषाओं के अखबारों की रीडरशिप में काफी उछाल आया है।

‘नील्सन’ (Nielsen) की मार्केटिंग प्रमुख (Effectiveness Practice) डॉली झा ने ब्राउन की बातों से सहमति जताई। उनका कहना था कि हालांकि लोग सोचते हैं कि प्रिंट मीडिया खत्म हो चुका है, लेकिन भारत में यह अभी भी सबसे ज्यादा प्रभावी माध्यम बना हुआ है। झा के अनुसार, ‘भारतीय अभी भी प्रिंट पर ज्यादा समय दे रहे हैं।’

‘कंतार मीडिया’ द्वारा पेश किए गए आंकड़े दर्शाते हैं कि 48 प्रतिशत कंज्युमर्स आडियो बेस्ड मीडियम को प्राथमिकता देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि आज के दौर में ‘एलेक्सा’ (Alexa) और ‘अमेजॉन ईको’ (Amazon Echo) जैसी ऑडियो बेस्ड डिवाइसों की मांग बढ़ती जा रही है। ये डिवाइस निश्चित रूप से मार्केटिंग और एडवर्टाइजिंग का भविष्य हो सकते हैं, लेकिन न्यूज के उपभोग के लिए अधिकांश युवा पीढ़ी भी प्रिंट पर निर्भर है।

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