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भारत के पास बड़ा ‘मौका’, रूस और यूक्रेन युद्ध से परेशान से इस देश ने मांगी मदद

नयी दिल्ली 31 मार्च 2022 । यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच दुनिया के कई देशों पर असर पर रहा है। इसी कड़ी में मिस्र भारत से गेहूं निर्यात करने के लिए बातचीत कर रहा है और रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बातचीत अंतिम चरण में है। हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिस्र के आपूर्ति और आंतरिक व्यापार मंत्री अली अल-मोसेली ने कहा था कि उनका देश गेहूं आयात करने के लिए भारत, अर्जेंटीना अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के साथ बातचीत कर रहा है। भारत से गेहूं का निर्यात चार गुना से अधिक बढ़ा

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट मुताबिक भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को अभी भी मिस्र अनाज खरीदार से आयात मूल के रूप में मान्यता प्राप्त करनी होगी, जिसे जनरल अथॉरिटी फॉर सप्लाई कमोडिटीज (GASC) के रूप में जाना जाता है। भारतीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों बताते हैं कि 31 जनवरी को समाप्त हुए 10 महीनों में भारत से गेहूं का निर्यात चार गुना से अधिक बढ़ गया, जो कि 1.38 मिलियन टन से बढ़कर 6 मिलियन टन हो गया है। ‘भारत से गेहूं लाने का विकल्प सबसे सही ‘

काहिरा में संस्कृति और विज्ञान शहर में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अली अल-इदरीसी ने अल-मॉनिटर से बातचीत में कहा है कि भारत मिस्र के लिए गेहूं आयात करने का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। मिस्र के भारत के साथ अच्छे व्यापारिक संबंध हैं, और हम पहले भी चावल आयात करने के लिए भारत के साथ काम कर चुके हैं। शिपिंग की कम लागत सहित, रसद आदि को देखते हुए भारत से गेहूं लाने का विकल्प सबसे सही है। इदरीसी ने कहा है कि हालांकि भारत संकट के वक्त में सबसे अच्छा स्रोत है लेकिन हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते हैं कि रूस और यूक्रेन मिस्र के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं। लेकिन मौजूदा वक्त में हम वैश्विक संकट का सामना कर रहे हैं और हमें अगले साल के लिए अपनी आवश्यकताओं के आधार पर समाधान करने की आवश्यकता है।

अर्जेंटीना, अमेरिका और फ्रांस की ओर भी देख रहा मिस्र कैलिफोर्निया में ब्रेकथ्रू इंस्टीट्यूट में खाद्य और कृषि कार्यक्रम के एक शोध विश्लेषक एलेक्स स्मिथ ने अल-मॉनिटर से बातचीत में कहा है कि युद्ध के कारण रूसी और यूक्रेनी आयात में व्यवधान को देखते हुए भारत मिस्र के लिए एकमात्र संभावित व्यापारिक भागीदार नहीं है। भारतीय आयात 2020 में यूक्रेन से आयातित 3.07 मिलियन टन गेहूं मिस्र या रूस से 8.25 मिलियन टन से मेल नहीं खा सकता है। ऐसे में मिस्र को अन्य स्रोतों की तलाश करने की जरूरत है।

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