मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> राज्यों में आपसी टकराव से जूझ रही भाजपा

राज्यों में आपसी टकराव से जूझ रही भाजपा

नई दिल्ली 21 जून 2021 । देश की सबसे मजबूत पार्टी और पार्टी विद डिफरेंस का दावा करने वाली भाजपा के लिए इस वक्त सब कुछ ठिक नहीं चल रहा है। आधे दर्जन से ज्यादा राज्यों में शासन के बावजूद पार्टी के अंदर घमासान मचा हुआ है। इनमें से कुछ ऐसे राज्य हैं जहां आने वाले कुछ दिनों में चुनाव भी होने हैं। राज्यों के अंदर मचे घमासान भाजपा नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि अब टकराव की स्थिति गुजरात में भी देखने को मिल रही है। माना जा रहा है कि गुजरात भाजपा का सबसे मजबूत गढ़ है और गुजरात मॉडल के ही दम पर ही पार्टी देश की सत्ता में आई है। गुजरात से ही पार्टी के दो शीर्ष नेता आते हैं नरेंद्र मोदी और दूसरे अमित शाह। वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के लिए सबसे मुश्किल वक्त माना जा रहा है। इन चुनौतियों का सामना वह कैसे कर पाते हैं यह भी देखने वाली बात होगी।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, मणिपुर जैसे और कई राज्य हैं जहां बीजेपी आपसी टकराव की स्थिति से गुजर रही है। इन राज्यों से लगातार नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें सामने आ रही है। भाजपा की ओर से इसे केवल मीडिया में चर्चा की वजह बताया जा रहा है। पार्टी सभी राज्यों में सब कुछ ठीक होने का दावा कर रही है ।लेकिन सवाल यह भी है अगर आग लगी नहीं है तो धुंआ कैसे निकाला है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इन चुनौतियों को कैसे संभाल पाएगा? जेपी नड्डा के लिए यह अग्निपरीक्षा जैसी स्थिति है। दरअसल, जेपी नड्डा ने अमित शाह के बाद पार्टी की जिम्मेदारी संभाली है। ऐसे में उनके लिए चुनौतियां पहले से ही बढ़ी हुई हैं। पार्टी के कुछ नेता यह मानते हैं कि जो भी टकराव की स्थिति है वह राज्य स्तरीय है। लेकिन एक बात तो सच है कि इससे पार्टी के प्रदर्शन पर असर जरूर पड़ेगा।

पार्टी विद डिफरेंस कहीं जाने वाले भाजपा में अंतर्कलह की खबर चौक आती है। पार्टी के लिए जाहिर सी बात है कि यह चिंता की बात ।है लेकिन इस अंतर्कलह की सबसे बड़ी वजह महत्वाकांक्षा है। पार्टी के नेता भी मानते हैं कि हमारी सरकारे कहीं भी फेल नहीं हुई हैं। कुछ नेताओं के ख्वाहिश जरूर है कि इन्हें हटा कर हमें बना दिया जाए। हाल फिलहाल में जो टकराव की स्थिति देखने को मिल रही है उसका सबसे बड़ा कारण राजनीतिक महत्वाकांक्षा ही है। पार्टी के नेता यह भी मानते हैं कि राजनीति में महत्वाकांक्षाओं का बढ़ना स्वाभाविक है। हाल फिलहाल में जो चीजें मीडिया में चर्चा में है उसकी सबसे बड़ी वजह राजनीतिक महत्वाकांक्षा ही है। इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि अमित शाह की तरह जेपी नड्डा का फिलहाल पार्टी में खौफ नहीं है। अच्छे और बड़े नेता भी अमित शाह के अध्यक्ष रहते तर्क-वितर्क की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।

पार्टी के कई नेता है जो असम फार्मूला और उत्तराखंड फार्मूला को खूब समर्थन कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में ही देख लीजिए पार्टी आलाकमान योगी के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरना चाहता है। जबकि केशव प्रसाद मौर्य लगातार यह कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश को लेकर आलाकमान ही फैसला करेगा। राजस्थान में सत्ता नहीं है फिर भी वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच टकराव के खबरें लगातार है। वसुंधरा अभी से ही सीएम का चेहरा घोषित करवाए जाने की इच्छा रखती हैं। अब देखना यह होगा कि आखिर भाजपा इन तमाम टकराव को किस तरह से कम कर पाती है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

महिला कांग्रेस नेता नूरी खान ने दिया इस्तीफा, कुछ घंटे बाद ले लिया वापस

उज्जैन 4 दिसंबर 2021 ।  महिला कांग्रेस की नेता नूरी खान के इस्तीफा देने से …