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बीजेपी काट सकती है अपने एक चौथाई सांसदों की टिकट

नई दिल्ली 7 जनवरी 2019 । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ 20 दिंसबर से शुरू हुई पार्टी सांसदों की बैठक 3 जनवरी को पूरी हो गई. इस बैठक के साथ ही पार्टी में टिकट बटवारे पर चर्चा का पहला दौर भी पूरा हो गया है. सूत्रों की मानें तो इस बैठक में यह तय किया गया है कि पार्टी किन सांसदों को दोबारा चुनावी मैदान में उतारेगी. इस बैठक में जहां प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने सांसदों से 2019 के चुनावी मुद्दों पर बात की, वहीं सांसदों का रिपोर्ट कार्ड भी देखा.

बैठक के बाद जो तस्वीर सामने आ रही है, उससे एक बात साफ होती नजर आ रही है कि पार्टी इस बार अपने एक चौथाई से ज्यादा सांसदों का टिकट काट सकती है. सूत्रों की मानें तो टिकट बटवारे में इस बार सत्तर साल की उम्र सीमा, क्षेत्र में कराए गए विकास कार्य, स्थानीय स्तर पर पार्टी का समर्थन और नेता की छवि पर फैसला लिया जा सकता है. इस बारे में केंद्रीय नेतृत्व ने एक रिपोर्ट तैयार कराई है, जो उम्मीदवार तय करने में खास मायने रखेगी और जो सांसद इन मानकों पर खरा नहीं उतरेगा उसके टिकट कटना तय है.

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बात करें उत्तर प्रदेश की तो बीजेपी के चार कद्दावर नेता 70 की उम्र सीमा पार कर चुके हैं, जिनमें कानपुर से सांसद मुरली मनोहर जोशी, देवरिया से सांसद कलराज मिश्रा, बरेली से सांसद और केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और रामपुर से सांसद नेपाल सिंह 70 साल की उम्र सीमा पार कर चुके हैं. वहीं जगदंबिका पाल, हरिनारायण राजभर जैसे कई नेता चुनावी साल में सतर साल में प्रवेश कर जाएंगे. उत्तर प्रदेश में झांसी से सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती पहले की चुनाव लड़ने से इनकार कर चुकी हैं, जबकि बहराइच से सांसद सावत्री बाई फूले पार्टी से बाहर जा चुकी हैं.

वहीं सूत्रों की मानें तो प्रदेश पार्टी अध्यक्ष और चंदौली महेंद्र पांडे को पार्टी किसी बड़ी भूमिका देने की तैयारी में है. मथुरा से सांसद हेमा मालिनी भी उस सीट से चुनाव लड़ना नहीं चाहती. जिन सांसदों के रिपोर्ट कार्ड से पार्टी नाखुश है, उनमें बांदा के सांसद भैरो प्रासद मिश्रा, बाराबंकि की सांसद प्रियंका रावत, सलेमपुर से रविंद्र कुशवाहा सहित एक दर्जन सांसद हैं, जबकि पार्टी में वापस आए पूर्व केंद्रीय मंत्री अशोक प्रधान को हाथरस या इटावा से टिकट देने के लिए दोनों में से किसी का टिकट काटा जा सकता है.

बात करें उत्तराखंड की तो यहां के पांच सांसदों में तीन 70 की उम्र सीमा पार कर चुके हैं. नैनीताल उधम सिंह नगर सीट से सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, गढ़वाल से सांसद और पूर्व सीएम भूवन चंद्र खडुंरी, टिहरी से सांसद माला राज्यलक्ष्मी का नाम इनमें शामिल है. यानी अगर पार्टी में सत्तर का फॉर्मूला लागू हुआ तो यहां आधे से ज्यादा उम्मीदवार नए हो सकते हैं.

वहीं बिहार में पार्टी के लिए जहां गठबंधन के कारण 5 सांसदों का टिकट काटना मजबूरी है, वहीं कुछ सांसदों का टिकट प्रदर्शन के आधार पर भी काटा जा सकता है. पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट कटना तो पहले से ही तय लग रहा है. वहीं दरभंगा से सांसद कीर्ति आजाद के प्रदर्शन से केंद्रीय नेतृत्व संतुष्ट नहीं है. बेगुसराय सीट पर सांसद भोला सिंह की मौत के बाद पार्टी इसे गठबंधन के कोटे में दे सकती है. बिहार में असली पेंच बक्सर सीट पर फंसा है. सूत्रों की मानें तो जेडीयू प्रशांत किशोर के लिए ये सीट मांग रही है, जबकि केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद अश्वनी चौबे किसी भी कीमत पर ये सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं है.

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