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शिवराज सिंह और येद्दियुरप्पा को मजबूत नहीं करना चाहती भाजपा

नई दिल्ली 23 जून 2019 ।  भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहे शह और मात के खेल के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारास्वामी की कुर्सी फिलहाल सुरक्षित हो गई है। इन दोनों राज्यों में भाजपा फिलहाल सरकार गिराने का काम नहीं करेगी। ऐसा दो कारणों से हो रहा है। पहला कारण भाजपा की अंदरूनी राजनीति है। पार्टी की शीर्ष लीडरशिप कर्नाटक में बी.एस. येद्दियुरप्पा और मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान को दोबारा मजबूत नहीं होने देना चाहती।

लिहाजा पार्टी इन दोनों राज्यों में सरकार गिराने की जल्दबाजी नहीं करेगी। हालांकि बी.एस. येद्दियुरप्पा कर्नाटक में सरकार गिराकर सी.एम. की कुर्सी संभालने को उतावले हैं और उनके ये प्रयास लोकसभा चुनाव से पहले से चल रहे हैं लेकिन भाजपा इस कारण से भी कर्नाटक में सरकार गिराने की पक्षधर नहीं है क्योंकि पार्टी को लगता है कि सरकार गिराने से जनता में यह संदेश जाएगा कि भाजपा सत्ता के लिए अनैतिक रास्ते अपना रही है। लिहाजा कर्नाटक में पार्टी कांग्रेस और जे.डी.एस. के मध्य चल रही फूट पर नजर रखेगी और दोनों के रिश्तों के कमजोर होने पर सरकार के खुद-ब-खुद गिरने का इंतजार करेगी। बिल्कुल यही रणनीति मध्य प्रदेश के लिए भी है क्योंकि भाजपा नहीं चाहती कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दोबारा मजबूत हों। लिहाजा वहां पर सरकार गिराने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा।

फिलहाल भारतीय जनता की शीर्ष लीडरशिप का लक्ष्य आने वाले महीनों में होने वाले राज्यों के विधानसभा के चुनाव हैं और इन चुनावों को देखते हुए ही पार्टी नेताओं के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं। रांची में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का योग कार्यक्रम झारखंड के विधानसभा चुनाव को देखते हुए किया गया। हाल ही में राज्य के आदिवासी नेता अर्जुन मुंडा को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, इसे भी झारखंड चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। इस राज्य में भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए ऑल झारखंड स्टूडैंट यूनियन (आजसू) के साथ गठबंधन किया था। यह गठबंधन विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा। उधर हरियाणा में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का योग कार्यक्रम भी हरियाणा में अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर ही तय किया गया है।

हरियाणा की सरकार ने हाल ही में सरकारी नौकरियों की भर्ती भी खोली है, इसे भी चुनाव के साथ जोड़ कर देखा जा रहा है। इसके अलावा पार्टी की नजर महाराष्ट्र पर भी है। यहां भाजपा की अपनी सरकार है लेकिन इस राज्य में पार्टी शिवसेना के साथ अपना घर दुरुस्त करने जा रही है।हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने शिवसेना के साथ गठबंधन तोड़ लिया था और अकेले चुनाव लड़ कर सत्ता में आई थी और इस बार तस्वीर बदली हुई है। कांग्रेस और एन.सी.पी. के गठजोड़ का मुकाबला करने के लिए भाजपा को शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लडऩा होगा। लिहाजा महाराष्ट्र में शिवसेना की शीर्ष लीडरशिप के साथ मिलकर सीटों के तालमेल को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है।

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