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बीजेपी को मिला छप्पर फाड़ चंदा, बाकी राष्ट्रीय दल रह गए बहुत पीछे

नई दिल्ली 28 फरवरी 2020 । एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को 20 हजार रुपये से ज्यादा मिलने वाले चंदे पर रिपोर्ट पेश की है. डोनर्स ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सबसे ज्यादा चंदा दिया है, जबकि कांग्रेस दूसरे नंबर पर है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी को पिछले वित्त वर्ष के दौरान 20,000 रुपये से अधिक के दान में 742.15 करोड़ रुपये मिले, जो अन्य राष्ट्रीय दलों को मिले चंदे से 3.5 गुना अधिक है.

ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए राष्ट्रीय राजनीतिक दलों द्वारा घोषित कुल दान 951.66 करोड़ रुपये का था. दान की संयुक्त संख्या 5,520 थी. वित्तीय वर्ष 2017-18 में 481.77 करोड़ रुपये की तुलना में ये दान लगभग दोगुना हो गया है.

राष्ट्रीय पार्टी को देनी होती है जानकारी

हर वित्तीय वर्ष में राजनीतिक दलों को जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत किसी भी सोर्स से 20,000 रुपये से अधिक के दान की घोषणा करना आवश्यक है. ऐसे में हर पार्टी के कोषाध्यक्ष को 20,000 रुपये से अधिक के चंदे पर जानकारी दी जाती है.

ADR रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी को वित्त वर्ष 2019 के दौरान 20,000 रुपये से अधिक का 4,483 योगदान प्राप्त हुआ, जो कुल मिलाकर 742.15 करोड़ रुपये था. यह 437.04 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण वृद्धि है, जिसे बीजेपी ने वित्त वर्ष 2018 में दान के रूप में घोषित किया था. गौरतलब है कि पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की थी.

BSP को नहीं मिला चंदा

वहीं, कांग्रेस ने पिछले वित्तीय वर्ष में 20,000 रुपये से अधिक के 605 दान की घोषणा की. यह राशि 148.58 करोड़ रुपये तक आई. वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान पार्टी को 26.66 करोड़ रुपये मिले थे. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने बताया कि उसे 2018-19 के दौरान 20 हजार रुपये से ज्यादा का कोई चंदा नहीं मिला.
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वित्त वर्ष 2018-19 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) ने 44.26 करोड़, नेशनल कांग्रेस पार्टी (NCP) ने 12.05 करोड़, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने 3.02 करोड़ और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) 1.6 करोड़ रुपये घोषित किए.

सत्ता के रंग में रंगी कांग्रेस चली भाजपा के पैटर्न पर

प्रदेश में 15 साल से सत्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस पार्टी के पास कार्यालय का खर्च निकालने के पैसे तक नहीं बचे थे। ऐसे में उनके कार्यालयों की संपत्ति को किराए पर देने जैसे कई मामले सामने आते रहे। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी संगठन की सदस्यता से लेकर प्रचार तक में पूरी तरह से हाईटेक बनती गई। अब जब कांग्रेस भी प्रदेश में एक साल से सत्ता सुख भोग रही है। तो सत्ता का रंग संगठन पर भी दिखना लाजमी है। उसकी शुरूआत युवक कांग्रेस संगठन चुनाव से हो गई है।
मोबाइल फोन पर भेजे जा रहे मैसेज
कांग्रेस पार्टी की तरफ से आम लोगों को मोबाइल फोन पर मैसेज भेजे जा रहे है। इसमें पार्टी की सदस्यता लेने और युकां संगठन चुनाव का पूरा विवरण है। संदेश में एक ऑनलाइन लिंक दी गई। इसमें पूरी जानकारी है। हालांकि पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संदेश उन्हीं मोबाइल फोन पर जा रहे है। जिन्होंने पूर्व में सदस्यता ली है या फिर उनका डाटा किसी तरह कांग्रेस से जुड़ा हुआ है। हालांकि ऐसे संदेश लगभग हर मोबाइल फोन पर पहुंच रहे है।
बीजेपी की मिसकॉल से सदस्यता
हाईटेक प्रचार के मामले में बीजेपी काफी आगे निकल चुकी है। बता दे कि बीजेपी का सदस्यता अभियान भी मिसकॉल के माध्यम से संचालित हुआ था। हालांकि इस प्रक्रिया में काफी कुछ फर्जीवाड़ा किए जाने के आरोप लगे थे।

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