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‘महाराज’ की घेराबंदी में जुटी भाजपा

भोपाल 12 फरवरी 2019 । विधानसभा चुनाव में शिकस्त खाने के बाद भाजपा ग्वालियर-चंबल अंचल में लोकसभा चुनाव की तैयारी करते समय फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. भाजपा का पहला प्रयास इस अंचल की कांग्रेस राजनीति के छत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया की घेराबंदी करना है. चूंकि संसदीय प्रभारियों द्वारा राहुल गांधी को सौंपे गए पैनल में सिंधिया का नाम गुना एवं ग्वालियर दोनों सीटों पर प्रथम वरीयता पर रखा गया है, लिहाजा भाजपा के रणनीतिकार दोनों ही परिस्थितियों में अपनी तैयारियों को अंजाम देने में जुटे हैं.

सिंधिया यदि लगातार पांचवी बार गुना से ही चुनाव मैदान में उतरते हैं तो रणनीति क्या होगी और यदि सीट बदलकर पहली बार अपने गृहनगर ग्वालियर से चुनाव लड़ते हैं तो किस तरह की स्ट्रेटजी अपनाई जाएगी, दोनों ही परिस्थितियों से मुकाबले के लिए भाजपा गहन मंथन में व्यस्त है.पिछले लोकसभा चुनाव की तरह भाजपा की इस बार भी यही कोशिश है कि सिंधिया को उन्हीं के संसदीय क्षेत्र में सीमित करके रखा जाए ताकि वे ग्वालियर चंबल अंचल सहित अपने प्रभाव वाली प्रदेश की बाकी लोकसभा सीटों पर प्रचार न कर सकें.

भाजपा शिविर में सिंधिया की घेराबंदी के लिए एैसे मजबूत प्रत्याशी के नाम पर विचार हो रहा है जो उनके समक्ष खासी मुश्किल पैदा कर सके. भाजपा अभी तक सिंधिया के खिलाफ इसी अंचल के कद्दावर समझे जाने वाले अपने नेताओं को मैदान में उतारती रही है.

2009 में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को चुनाव लड़ाया गया तो 2014 में सिंधिया के खिलाफ सदैव आक्रामक तेवर रखने वाले जयभान सिंह पवैया के नाम पर दांव खेला गया लेकिन ये दोनों ही सिंधिया के समक्ष बड़ी चुनौती के रूप में नहीं उभर सके.

इससे पहले 2004 में भाजपा ने कांग्रेस में ही सेंध लगाकर हरिवल्लभ शुक्ला को अपने पाले में कर लिया था, शुक्ला तगड़े उम्मीदवार साबित हुए और इस चुनाव में सिंधिया 86,360 वोट से ही जीत सके जबकि इससे पहले के चुनाव यानि 2002 में सिंधिया 4.06 लाख वोट से विजयी हुए थे.

मिशन 2019 में सिंधिया के खिलाफ गुना सीट से जयभानसिंह पवैया एवं डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे नामों पर तो विचार हो ही रहा है, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा का नाम भी उछला है. प्रभात झा पहले भी सिंधिया के खिलाफ चुनाव समर में उतरने की इच्छा जता चुके हैं.

विधानसभा चुनाव से पहले प्रभात झा ने गुना-शिवपुरी क्षेत्र में अचानक सक्रियता बढ़ा दी थी तथा अपना जनाधार तैयार करने की कवायद में व्यस्त थे. भाजपा में इस विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है कि इस बार सिंधिया के खिलाफ किसी बड़े फि ल्मी स्टार या सार्वजनिक जीवन में निर्विवाद व लोकप्रिय छवि रखने वाले किसी नामचीन चेहरे को चुनाव लड़ाया जाए.

कांग्रेस की वीथिकाओं से रिसकर आ रही इस तरह की खबरें कि सिंधिया इस बार सीट बदलकर ग्वालियर से चुनाव लड़ेंगे व गुना से प्रियदर्शिनी राजे चुनाव लड़ सकती हैं, भाजपा शिविर में बेचैनी बढ़ा दी है. यदि ऐसा मुमकिन हुआ तो भाजपा को ये दोनों सीटें अपने हाथ से जाती दिख रही हैं.

कांग्रेस द्वारा लोकसभा चुनाव के लिए बनाए गए संसदीय क्षेत्र प्रभारी द्वारा राहुल गांधी को सोंपे गए पैनल में ग्वालियर सीट से जो तीन नाम रखे गए हैं उनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम प्रथम वरीयता पर है जबकि अशोक सिंह एवं मोहनसिंह राठौड़ के नाम द्वितीय एवं तृतीय क्रम पर हैं.

तत्कालीन राजनीतिक समीकरणों का लाभ उठाते हुए भाजपा पिछले तीन बार से ग्वालियर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी को हराती रही है लेकिन भाजपा को डर है कि यदि सिंधिया यहां से चुनाव लड़ते हैं तो उन्हें चुनाव जिताने के लिए पूरी कांग्रेस एकजुट हो जाएगी एवं तत्कालीन राजपरिवार से ग्वालियरवासियों के भावनात्मक लगाव का लाभ तो सिंधिया को मिलेगा ही. अभी ग्वालियर सीट से भाजपा के नरेन्द्र सिंह तोमर नुमाइंदगी कर रहे हैं जो मोदी की काबीना में वजनदार महकमे संभाल रहे हैं.

जाहिर है कि सिंधिया के ग्वालियर से मैदान में उतरने पर भाजपा कुछ अन्य दमदार नामों पर भी विचार कर रही है. प्रभात झा, जयभानसिंह, नरोत्तम मिश्रा जैसे चेहरों के अलावा भाजपा ने कुछ अन्य नामचीन नेताओं से भी अपनी तैयारी मुकम्मल रखने के लिए कहा है. भाजपा को पक्का यकीन है कि मिशन 2019 में यदि सिंधिया को ग्वालियर या गुना से बाहर नहीं निकलने दिया गया तो ग्वालियर-चंबल और मालवा की उन सीटों पर उसकी राह आसान हो जाएगी जहां सिंधिया व्यापक असर रखते हैं.

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