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बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी का राहुल गांधी के बारे में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली 14 अप्रैल 2019 । केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani ) की डिग्री को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेता बीजेपी को अभी घेर ही रहे थे कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बारे में एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने अपने खुलासे में राहुल गांधी के बारे में दावा किया है कि राहुल गांधी का असली नाम राहुल गांधी नहीं बल्कि उनके कैम्ब्रिज सर्टिफिकेट के अनुसार उनका असली नाम राउल विंसी (Raul Vinci) हैं. बीजेपी नेता के इस खुलासे के बाद कहे तो बीजेपी को राहुल गांधी के खिलाफ हमला करने को लेकर एक नया मुद्दा मिल गया है.

सुब्रमण्यम स्वामी ने शुक्रवार रात ट्वीट कर कहा कि ‘बुद्धु के कैम्ब्रिज सर्टिफिकेट(Buddhu’s Cambridge Certificate) के अनुसार राहुल गांधी का असली नाम राउल विंसी है. उन्होंने एम.फिल की पढ़ाई की है लेकिन वो नेशनल इकोनॉमिक प्लानिंग एंड पॉलिसी में फेल हो गए थे.
बता दें कि बीजेपी नेता व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा गांधी परिवार के खिलाफ शैक्षिक योग्यता को लेकर सवाल उठाना पहला मौका नहीं है. इसके पहले साल 2000 की शुरुआत में उन्होंने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की डिग्री को लेकर तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी. दरअसल सोनिया गांधी के अनुसार वे कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी में डिप्लोमा किया है. स्वामी के मुताबिक उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस बारे में जानकारी मांगी थी. इसके जवाब में यूनिवर्सिटी ने बताया कि सोनिया ने वहां कभी पढ़ाई ही नहीं की है. जिसके बाद से ही वे सोनिया गांधी के खिलाफ शैक्षिक योग्यता लेकर हमला करते रहते है.

रोना धोना मचा कर मामले को डाईवर्ट करना चाहती हैं स्मृति ईरानी

इंटर पास की घोषणा करने वाली स्मृति ईरानी कह रही हैं कि “वह अमेठी से चुनाव लड़ रही हैं इसलिए उनपर आक्रमण हो रहा है”।
अजीब सी स्थीति है , हर कोई विक्टिम कार्ड खेल रहा है और जो विक्टिम है वह तमाशा देख रहा है। स्मृति ईरानी को बताना चाहिए कि कपिल सिब्बल के विरुद्ध चाँदनी चौक से चुनाव लड़ते समय उनकी घोषित बी काम की ग्रेजुएट डिग्री 2014 में बीए में कैसे परिवर्तित हो गयी , और यह परिवर्तित होते होते 2019 में इंटर पास में कैसे परिवर्तित हो गयी।
दरअसल ईरानी को जवाब इस पर देना चाहिए पर वह रोना धोना मचा कर मामले को डाईवर्ट करना चाहती हैं , काँग्रेस को इनके विरुद्ध चूना आयोग में शिकायत करना चाहिए , और लगातार तीन नामांकन पत्र में अलग अलग शैक्षणिक योग्यता दर्शाने के आरोप में चूना आयोग को इनका नामांकन रद्द करके देश के नेताओं को एक संदेश देना चाहिए परन्तु “मोदी है तो यह नामुमकिन है”।
विक्टिम कार्ड का यही लाभ होता है कि मुख्य मुद्दा गायब हो जाता है और टेसू लोगों की भावनाओं को उभार देता है।
दरअसल राहुल गाँधी हो या काँग्रेस , वह तुरंत मुद्दों को लपक कर काउंटर करने में सुस्त है , काँग्रेस को अपनी इस कमी को दूर करना चाहिए और उसे छत्तीसगढ़ के ही अपने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सीखना चाहिए।
मोदी-अमितशाह आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं और आक्रामक व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी उसके सामने उससे भी अधिक आक्रामक का होना होता है।
बहरहाल , पहले चरण के चुनाव के बाद इन संघी भाजपाईयों की प्रतिक्रिया बता रही है कि इनको अपनी हार का आभाष हो चुका है और अगले चरण मोदी विरोधी लहर के बीच होंगे।
सवाल यह है कि इसका कौन कितना फायदा ऊठा पाता है ? मेरी समझ यह है कि जो भूपेश बघेल बन कर इनपर आक्रामक करेगा वह लीड ले लेगा। हाँ एक बात और कि स्मृति इरानी के बाद अभी मोदी का रोना और विक्टिम कार्ड खेलना बाकी है।

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