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बीजेपी नेता उमा भारती बोलीं- चप्पल उठाने वाली होती है ब्यूरोक्रेसी

नई दिल्ली 21 सितम्बर 2021 । भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी ) की वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं उमा भारती ने विवादित बयान देते हुए कहा,’नौकरशाही की कोई अहमियत नहीं होती और यह सिर्फ चप्पल उठाने वाली होती है।’ बताया जा रहा है कि उमा भारती ने शनिवार को यह बात कही थी, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वह वीडियो में कहती हुई सुनाई दे रही हैं, ”आपको क्या लगता है ब्यूरोक्रेसी नेता को घुमाती है, लेकिन ऐसा नहीं होता। अकेले में बात हो जाती है फिर नौकरशाह फाइल बनाकर लाते हैं। हमसे पूछो, 11 साल केंद्र में मंत्री, और मुख्यमंत्री रही हूं।” उमा भारती कहती हैं, ”ब्यूरोक्रेसी चप्पल उठाने वाली होती है, चप्पल उठाती है हमारी।” निजीकरण और आरक्षण पर बात करते हुए उमा भारती ने कहा, ”जब तक निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू नहीं होगा तब तक इससे कुछ नहीं होने वाला है। हर चीज का निजीकरण हो रहा है। सरकारी जमीन प्राइवेट सेक्टर को दी जा रही है और आरक्षण का क्या होगा। शरद मुझसे सहमत हैं और नीतीश कुमार भी। लेकिन आपको इसे (आरक्षण के लिए आंदोलन) शुरू कर देना चाहिए।” उमा भारती का यह वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने आलोचना करते हुए कहा है कि नौकरशाही के लिए ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें भारती को अपने शब्द वापस लेने चाहिए। दरअसल शनिवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी ) महासभा का प्रतिनिधिमंडल उमा भारती से मिलने भोपाल स्थित उनके आवास पहुंचा था। इस दौरान प्रतिनिधमंडल ने ओबीसी की जातिगत जनगणना और निजीकरण में आरक्षण को लेकर उन्हें 5 सूत्री मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा था।

वीडियो वायरल होने के बाद उमा भारती ने ट्विटर पर एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिए सफाई दी है। उन्होंने लिखा, ”मैं मीडिया की आभारी हूं कि उन्होंने मेरा पूरा ही विडीओ दिखा दिया, क्योंकि मै तो ब्यूरोक्रेसी के बचाव में ही बोल रही थी । हम नेताओ में से कुछ सत्ता में बैठे निक्कमे नेता अपने निकम्मेपन से बचने के लिए ब्यूरोक्रेसी की आड़ ले लेते हैं कि ”हम तो बहुत अच्छे हैं लेकिन ब्यूरोक्रेसी हमारे अच्छे काम नही होने देती”, जबकी सच्चाई यह है की ईमानदार ब्यूरोक्रेसी सत्ता में बैठे हुए मजबूत, सच्चे और नेक इरादे वाले नेता का साथ देती है। यही मेरा अनुभव है। मुझे रंज हैं की , मैंने असंयत भाषा का किया जब की मेरे भाव अच्छे थे। मैंने आज से यह सबक सीखा की सीमित लोगों के बीच अनौपचारिक बातचीत में भी संयत भाषा का प्रयोग करना चाहिए।”

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