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गुजरात में कांग्रेस को रह-रहकर झटके देने की तैयारी में भाजपा

नयी दिल्ली 9 मई 2022 । गुजरात विधानसभा चुनाव में बमुश्किल 6 महीने का ही वक्त बचा है और भाजपा इलेक्शन मोड में आ चुकी है। वहीं कांग्रेस अब भी नेतृत्व को लेकर पसोपेश में है और लगातार साथ छोड़ रहे नेता भी चिंताएं बढ़ा रहे हैं। पिछले दिनों कांग्रेस के आदिवासी नेता रहे विधायक अश्विन कोतवाल ने भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके अलावा अब तक कुल 13 ऐसे विधायक या पूर्व विधायक हैं, जो कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। लेकिन यह सिलसिला अभी थमता नहीं दिख रहा। भाजपा के एक सीनियर ने कहा कि अभी 7 से 8 कांग्रेस के विधायक एवं पूर्व विधायक चुनाव से पहले भाजपा जॉइन कर सकते हैं। यही नहीं हार्दिक पटेल को भी अपने पाले में लाने को लेकर भाजपा उत्सुक है। हार्दिक पटेल पहले ही अपने सोशल मीडिया बायो से कांग्रेस का जिक्र हटा चुके हैं। ऐसे में उनके कांग्रेस छोड़ने के कयास लगातार जोर पकड़ रहे हैं। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि भाजपा उन्हें चुनाव से ऐन पहले लेना चाहती है ताकि ज्यादा चर्चा हो सके और कांग्रेस के मनोबल को गिराया जा सके। पूरे मामले की जानकारी रखने वाले भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘नितिन पटेल के मंत्री पद से हटने के बाद भाजपा को एक मजबूत पाटीदार नेता की जरूरत है। खासतौर पर उत्तर गुजरात में ऐसे एक नेता की जरूरत है। हार्दिक पटेल इसमें फिट बैठते हैं। वह जनता को लुभाने वाले नेता हैं और बड़ी संख्या में पाटीदार समुदाय के लोग उन्हें पसंद करते हैं।’ जिग्नेश मेवानी को घेरने का भी तैयार किया प्लान

बता दें कि शनिवार को गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल ने जामनगर में एक इवेंट के बाद कांग्रेस के विधायक शैलेष परमार को अपनी गाड़ी में बिठा लिया था। इसके बाद उन्होंने कहा था कि जो भी हमारे साथ आना चाहता है, वह इसके लिए स्वतंत्र है। इस पर परमार और अन्य लोग हंसने लगे थे। यही नहीं भाजपा ने जिग्नेश मेवानी को भी घेरने की तैयारी कर ली है। कांग्रेस के पूर्व विधायक मणिलाल वाघेला को उनके मुकाबले उतारा जा सकता है, जो बीते महीने ही भाजपा में शामिल हुए हैं।

कैसे घटती गई कांग्रेस की संख्या और बढ़े भाजपा के विधायक गुजरात की राजनीति की समझ रखने वालों का कहना है कि भाजपा इस बार आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। राज्य में कुल 27 सीटें आदिवासी समुदाय के लिए आरक्षित हैं। कांग्रेस को इन सीटों पर पिछली बार बड़ी सफलता मिली थी। इस बार भाजपा का प्लान है कि यदि उसे शहरी इलाकों में कोई नुकसान होता भी है तो उसकी भरपाई इन इलाकों से हो सके। गौरतलब है कि 182 सीटों वाली गुजरात विधानसभा में 2017 में कांग्रेस को 77 पर जीत मिली थी, जबकि भाजपा के 99 विधायक ही जीत पाए थे। लेकिन कांग्रेस में टूट इतनी ज्यादा हुई कि अब उसके 67 मेंबर ही बचें हैं, जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या 111 हो गई है।

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