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चंदे से चुनाव लड़ेगी बीजेपी

भोपाल 2 जुलाई 2018 । भारतीय जनता पार्टी इस बार का विधानसभा चुनाव कार्यकर्ताओं और जनता से मिले चुनावी चंदे से लड़ेगी। नोटबंदी के बाद पहली बार प्रदेश में चुनाव होने जा रहे हैं और बीजेपी जनता को यह संदेश देना चाहती है कि चुनावों में काले धन के प्रयोग को लेकर लगातार को जो बातें करती रही है अब उसे सतही जामा पहनाने का वक्त आ गया है। भाजपा की चंदा समिति हर जिले का दौरा करेगी और हर कार्यकर्ता को 500, 1000 और 2000 रू के कूपन बेचे जाएंगे। 15 जुलाई से कूपन जारी किए जाएंगे ।हर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को  बीस बीस रुपए चंदे का टारगेट दिया गया है। इस हिसाब से पार्टी पूरे प्रदेश में 46 करोड रुपए का धन इकट्ठा कर पाएगी। अर्थ समिति के संयोजक कृष्ण मुरारी मोघे का कहना है कि पार्टी का एक अभिनव प्रयास है और इससे हम जनता को एक नया संदेश देने में सफल होंगे ।पार्टी का मकसद जमीनी कार्यकर्ताओं को इस मुहिम से जुड़ कर पारदर्शिता बताना है ।जो कार्यकर्ता टारगेट पूरा करेंगे उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा

शिवराज के पहले सिंधिया निकलेंगे प्रदेश के दौरे पर

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की 14 जुलाई की जन आशीर्वाद यात्रा के पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया 11 जुलाई से प्रदेश का दौरा शुरू करेंगे। प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष सिंधिया ने शनिवार को समिति की बैठक में रोडमैप को अंतिम रूप दिया। वे एक दिन में तीन जिले कवर करेंगे। इस दौरान वे कार्यकर्ताओं के साथ ही आमजन से चर्चा करेंगे, उन्हीं के साथ खाना खाएंगे और रात्रि विश्राम भी क्षेत्र में ही करेंगे।

ज्योतिरादित्य सिंधिया की महाराजा की छवि रही है। इसे तोडऩे के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रदेश का दौरा इसी का प्रयास माना जा रहा है। दौरे के शुरुआत से एक दिन पहले 10 जुलाई को खजुराहो पहुंच जाएंगे। वहां रात्रि विश्राम के बाद 11 को खजुराहो, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, 12 को रीवा, सतना, सीधी, 13 को शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, 14 को जबलपुर, मंडल, डिण्डोरी, 15 को दमोह, सागर और कटनी जिले का दौरा करेंगे। वहां संभागवार चुनाव अभियान समिति सदस्यों की बैठक लेंगे। बैठक के बाद क्षेत्र में जनसंपर्क करेंगे। इस दौरान कोई सभा नहीं होगी।

जिला और ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदारी तय
सिंधिया ने कहा, चुनाव अभियान समिति की बैठक भोपाल में नहीं होगी। इसका सिलसिला संभाग स्तर पर शुरू किया जाएगा। इसके लिए अगले तीन दिन मेंं संभागीय चुनाव प्रचार अभियान समिति का गठन कर दिया जाएगा। हर संभागीय समिति में 25 सदस्य होंगे। संभागीय अध्यक्ष अपने संभाग में विधानसभावार चुनाव प्रचार अभियान समिति का गठन करेंगे, जिसमें अधिकतम 11 सदस्य होंगे। संभागीय समिति ब्लॉक स्तर का दौरा कर प्रचार अभियान की शुरुआत करेगी। यह अभियान एक माह यानी 10 जुलाई से 10 अगस्त तक चलेगा।

टीम को संभागों की जिम्मेदारी
सिंधिया ने समिति में शामिल सदस्यों को संभाग स्तर की जिम्मेदारी दी है। इसमें मुकेश नायक को सागर, राजमणि पटेल को रीवा, इंद्रजीत पटेल को शहडोल, विवेक तनखा और मुकेश नायक को जबलपुर की जिम्मेदारी दी है। ये संभागीय स्तर की बैठक में सिंधिया के साथ मौजूद रहेंगे।

चुनावों के लिए गुजरात से ही क्यों आए ईवीएम मशीनों के एक्सपर्ट- अजय सिंह

नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में गुजरात के 16 ईवीएम मशीन के एस्पर्ट की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। सिंह ने कहा कि क्या देश में ईवीएम के एस्पर्ट गुजरात में ही उपलब्ध हैं।
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, नई दिल्ली को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि गुजरात से 16 ईवीएम मशीनों के विशेषज्ञों को मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में भेजा गया है। सिंह ने पत्र में कहा कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2018 के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। ईवीएम मशीनों के परिणामों के ऊपर पूरे देश में संदेह और सवाल खड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में प्रदेश में विधानसभा चुनाव के पूर्व सिर्फ गुजरात से ही 16 ईवीएम मशीनों के विशेषज्ञों को भेजना शक के दायरे में आता है। ईवीएम मशीनों के एक्पर्ट शायद गुजरात में ही नहीं है वे देश के अन्य राज्यों में भी हैं, तो क्या कारण है कि सिर्फ गुजरात के ही लोगों को यहां भेजा गया है।
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, नई दिल्ली को लिखे पत्र में आग्रह किया है कि वे गुजरात से आए एक्सपर्ट के स्थान पर देश के अन्य राज्यों विशेषकर गैर भाजपा राज्यों के विशेषज्ञों को मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनावों के लिए भेजें ताकि चुनाव निष्पक्ष स्वतंत्र तरीके से हो सके और वे ही चुन कर आ सके जिन्हें मतदाता अपना मत दे।

मप्र के 6 जिले थोड़ा और पिछड़ गए: नीति आयोग की रैकिंग

इससे पहले नीति आयोग की रिपोर्ट मे मप्र के 8 जिले पिछड़ों की श्रेणी में दर्ज हुए थे। इन जिलों के कलेक्टरों से पीएम मोदी ने सीधी बात की। सीएम शिवराज सिंह ने भी 8 जिलों पर फोकस किया। माना जा रहा था कि इन दिनों कि रैंकिंग सुधरेगी परंतु नीति आयोग की नई रिपोर्ट में 6 जिले पहले से भी नीचे चले गए। बता दें कि पीएम मोदी ने मध्यप्रदेश से आने वाले केंद्रीय मंत्रियों को उनके जिलों के विकास की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन शायद ही इन मंत्रियों की ध्यान दिल्ली से कभी हटा और जिम्मेदार जिलों की तरफ गया हो।

मध्यप्रदेश के पिछड़े 8 जिलों में से 6 जिलों की रैंकिंग नीचे गिर गई है। ये सभी राज्य नीति आयोग की डेल्टा रैंकिंग में फिसल गए हैं। पिछड़े जिलों की सूरत बदलने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की कोशिश बेअसर साबित हो रही है। प्रदेश के छह जिले विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज का निर्वाचन क्षेत्र विदिशा, दिग्विजय सिंह का प्रभाव वाला राजगढ़, छतरपुर, दमोह, बड़वानी और खंडवा डेल्टा रैंकिग में निचले पायदान पर पहुंच चुके हैं, हालांकि 8 में से दो जिले गुना और सिंगरौली की हालत में मामूली सुधार दर्ज किया गया है।

सुषमा स्वराज का विदिशा सबसे फिस्ड्डी

पीएम मोदी ने पिछड़े जिलों की दशा बदलने की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्रियों और अधिकारियों को सौंपी थी। इनमे से केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के जिम्मे वाला विदिशा जिला नीति आयोग की रैंकिग में सबसे ज्यादा पिछड़ा है। इसके बाद नरेंद्र सिंह तोमर के जिम्मे वाला गुना जिला था, लेकिन गुना ने आंशिक सुधार कर छह जिलों की सूची से बाहर निकल गया है। थावरचंद गहलोत का राजगढ़, प्रकार जावड़ेकर का बड़वानी, खंडवा, वीरेंद्र खटीक का दमोह, छतरपुर और एमजे अकबर का सिंगरौली जिले शामिल थे। इन सभी जिलों की जिम्मेदारी केंद्र व राज्य सरकार ने मंत्रियों और अफसरों को दी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद इन जिलों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

मीडिया प्रभारी भी टिकट की जुगाड में ……. ?

प्रदेश में चाहे सत्तारूढ भाजपा से लेकर कांग्रेस , आप की बात करें तो सभी के मीडिया प्रभारी व प्रवक्ता इस बार विधानसभा का सपना देखने लगे हैं। सभी मीडिया प्रभारी प्रवक्ता ने अपने अपने गृह जिलों में अपनी अपनी सुरक्षित सीटें तलाश ली है, और रात दिन विधानसभा भवन व उसके मुख्य कक्ष को अपने सपने में देखने लगे हैं। इसमें भाजपा के लोग तो मंत्री बनने तक का सपना देख रहे हैं। अब इन भाई लोगों को कौन बताए कि भैय्या प्रेस ब्रीफिंग से थोडे ही मतदाता आपको वोट दे देंगे। इसके लिए काम करना पडता है।

विधानसभा के लिए प्रियदर्शिनी आएंगी ….?

मध्यप्रदेश विधानसभा के चुनावी सभा में कांग्रेस अपने माहौल के लिए कुछ दिग्गज नामों को भी मैदान में उतार सकती है। हालांकि यह नाम अभी भविष्य के गर्त में हैं, लेकिन चुनावी माहौल में इन्हें एकाएक उतारा जाएगा, ताकि माहौल बदला जा सके। ऐसा ही एक नाम सिंधिया राजघराने की श्रीमती प्रियदर्शिनी राजे का है। इनके लिए सिंधिया समर्थक कांग्रेसियों को सुरक्षित और एतिहासिक जीत के लिए सीट तलाशने को कहा गया है। ऐसी संभावना है कि प्रियदर्शिनी को शिवपुरी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा जाएगा। प्रियदर्शिनी के चुनावी मैदान में आने से चुनावी आबो हवा एकाएक अंचल में पलटा ले सकती है। वहीं भाजपा की शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र की प्रत्याशी यशोधरा राजे अबकी बार इसी कारण लोकसभा के टिकट के लिए प्रयास करेंगी।

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