मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> पुनर्वास चाहते हैं भाजपा के बुजुर्गवार, कुछ को मिलेगा पद

पुनर्वास चाहते हैं भाजपा के बुजुर्गवार, कुछ को मिलेगा पद

नई दिल्ली 8 जून 2019 । लोकसभा चुनाव निपटने के बाद मध्यप्रदेश भाजपा में राजनीतिक पुनर्वास पाने वालों की कतार लंबी हो गई है। प्रदेश संगठन के एक दर्जन दिग्गज नेताओं के पास अभी सीधे कोई बड़ी जिम्मेदारी या पद नहीं है। इसमें कुछ उम्र और सेहत के कारण चुनावी दौड़ से बाहर हुए है तो कुछ लोकसभा चुनाव का टिकट कटने या दूसरे कारणों से हाशिए पर जा पहुंचे हैं। केंद्र में मोदी सरकार की वापसी के बाद इन नेताओं के राजनीतिक पुनर्वास की उम्मीद बंध गई है।

मध्यप्रदेश के दो पूर्व लोकसभा सदस्यों ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा। इसमें पूर्व स्पीकर सुमित्रा महाजन और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज शामिल हैं। अब इन्हें राज्यपाल की कुर्सी मिलना तय माना जा रहा है। लोकसभा टिकट वितरण के दौरान चिट्ठी लिखकर अपनी नाराजगी मोदी-शाह तक पहुंचा चुकीं महाजन को किसी बड़े राज्य का राज्यपाल बनाया जा सकता है।

वहीं, स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लडऩे वाली सुषमा स्वराज को भी संवैधानिक पद मिल सकता है। 72 वर्षीय सत्यनारायण जटिया फिलहाल राज्यसभा में सदस्य हैं, लेकिन उनका कार्यकाल 11 माह बाद खत्म होने जा रहा है। अनुसूचित जाति वर्ग से प्रतिनिधित्व और संघ के करीबी होने के कारण जटिया का नाम भी राज्यपाल की दौड़ में माना जा रहा है।

दो पूर्व सीएम को अहम भूमिका का इंतजार

प्रदेश के दो पूर्व सीएम बाबूलाल गौर और उमा भारती को भी किसी अहम पद का इंतजार है। हालांकि, उमा को संगठन ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है, लेकिन किसी राज्य का प्रभारी नहीं बनाया गया है। उमा को संगठन में कोई अहम भूमिका में लाया जा सकता है। वहीं, गौर भी सक्रिय राजनीति से सेवानिवृत्ति के बाद अब पुनर्वास के जुगाड़ में हैं।

इन्हें भी मिल सकती है जिम्मेदारी

पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा अहम भूमिका से बाहर हैं। रघुनंदन शर्मा और ज्ञान सिंह को भी अब पुनर्वास की दरकार है। लोकसभा में टिकट नहीं मिलने के कारण अनूप मिश्रा, आलोक संजर और चिंतामणि मालवीय भी संगठन में अब किसी बड़ी जिम्मेदारी के दावेदार हो गए हैं। मालवीय और संजर वर्तमान में प्रदेश प्रवक्ता हैं, लेकिन उन्हें चुनाव में सक्रियता और संगठन के प्रति निष्ठा का लाभ मिल सकता है।

निकाय-पंचायत चुनाव की तैयारी

लोकसभा चुनाव में झटका खा चुकी कांगे्रस स्थानीय चुनाव के लिए विशेष रूप से अलर्ट है। परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ पार्टी ने अपने पदाधिकारियों को सक्रिय कर दिया है। निर्देश दिए हैं कि वे क्षेत्र और वार्डों पर नजर रखें। परिसीमन में कोई क्षेत्र छूट न जाए।

विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कांग्रेस यह मान रही थी कि लोकसभा चुनाव में भी कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने को मिलेगा। मतदाता भी सहयोग करेंगे, लेकिन उसके हाथ निराशा लगी। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस महज एक सीट जीत पाई।

इसके पहले कांग्रेस के खाते में तीन सीटेंं थीं। कांग्रेस अब निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारी में जुटी है। राज्य निर्वाचन आयोग ने तो इन चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। परिसीमन की कार्रवाई शुरू हो गई है। इसको लेकर कांग्रेस ने अपने जिलाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे परिसीमन पर नजर रखें।

अगले चरण में मतदाता सूची में नए लोगों के नाम जुड़वाने और फर्जी लोगों को नामों को सूची से बाहर करवाने का होगा। पदाधिकारियों से कहा गया है कि वे घर-घर संपर्क कर नए मतदाताओं की जानकारी जुटाएं। कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों की जानकारी भी मतदाताओं को दें। विधायकों की भी जिम्मेदारी तय होगी।

लोकसभा चुनाव के बाद अब इन 4 राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव

देश में लोकसभा चुनाव पूरी तरह से संपन्न हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव के बाद अब देश के 4 महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इन 4 राज्यों में से 3 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ऐसे में इन विधानसभा चुनावों में भाजपा की इज्जत दांव पर है।

1.महाराष्ट्र-

भाजपा शासित महाराष्ट्र राज्य में इसी वर्ष सितंबर या अक्टूबर महीने में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच गठबंधन है। इस गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में राज्य की 48 में से 41 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना तथा कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है।

2.हरियाणा-

90 विधानसभा सीटों वाले हरियाणा राज्य में इसी वर्ष चुनाव होने हैं। हरियाणा में इस समय मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। ऐसे में भाजपा एक बार फिर मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ सकती है।

3.झारखंड

महाराष्ट्र और हरियाणा की तरह भाजपा शासित झारखंड में भी इसी वर्ष के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं। झारखंड में भाजपा तथा आजसू पार्टी का गठबंधन है। लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने झारखंड की 14 में से 11 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। इस बार झारखंड में भारतीय जनता पार्टी की जीत की राह लोकसभा चुनाव की तरह आसान नहीं दिख रही है।

4.दिल्ली-

केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस समय दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार है। लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर भाजपा को जीत मिली है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल के लिए इस बार दिल्ली की सत्ता की राह कठिनाई भरी साबित हो सकती है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

राहुल ने जारी किया श्वेतपत्र, बोले- तीसरी लहर की तैयारी करे सरकार

नई दिल्ली 22 जून 2021 । कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस …