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BJP 3 करोड़ परिवारों को समझाएगी CAA का मतलब, करेगी 250 प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली 22 दिसंबर 2019 । नागरिकता संशोधन कानून के बारे में लोगों को समझाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अगले 10 दिन तक व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की योजना बनाई है. इसके लिए बीजेपी घर-घर जाएगी और लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के बारे में बताएगी.

बीजेपी सूत्रों की मानें तो पार्टी के नेता नागरिकता संशोधन कानून के बारे में लोगों को स्पष्ट जानकारी देने के लिए 250 प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. साथ ही हर जिले में नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में रैली और कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा.बीजेपी की योजना करीब 3 करोड़ परिवारों को नागरिकता कानून के संबंध में जानकारी देने की है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों पर नागरिकता कानून को लेकर झूठ फैलाने और प्रदर्शन के लिए लोगों को उकसाने का आरोप लगाया था.

बता दें कि भाजपा ने राजस्थान में इस कानून के समर्थन में रैली की थी, जिसमें कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी शिरकत की थी. इस दौरान कई नेताओं ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से इस कानून के समर्थन में सड़क पर उतरने की अपील की थी.

CAA के समर्थन में उतरीं 1100 हस्तियां, कहा- जानबूझकर फैलाया जा रहा डर का माहौल

नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ राजनीतिक दलों के विरोध और आम लोगों के प्रदर्शन के बीच बुद्धिजीवियों का एक धड़ा इसके समर्थन में उतर आया है. 1100 शिक्षाविदों, रिसर्च स्कॉलर्स, वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों ने सीएए के समर्थन में एक बयान जारी किया है.

इन लोगों में एक बड़ी तादाद भारतीय व विदेशी कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले प्रोफेसरों, असोसिएट प्रोफेसरों और असिस्टेंट प्रोफेसरों की है. इसके अलावा, समर्थन करने वालों में एम्स, आईआईएमएस और आईआईटी के वैज्ञानिक भी शामिल हैं. कौन-कौन लोग हैं शामिल

समर्थन में बयान जारी करने वालों में जेएनयू के आनंद रंगनाथन और प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार कंचन गुप्ता, इंस्टिट्यूट ऑफ पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज के सीनियर फेलो अभिजीत अय्यर मित्रा, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट जे साई दीपक, पटना यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ लॉ के गुरु प्रकाश, आईसीएसएसआर की सीनियर फेलो मीनाक्षी जैन, शांतिनिकेतन स्थित विश्वभारती के डॉक्टर देबाशीष भट्टाचार्य, एमिटी यूनिवर्सिटी के मानद प्रोफेसर जीतेन जैन, मणिपुर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर एपी पांडेय, डीयू के भास्कराचार्य कॉलेज की डॉक्टर गीता भट्ट समेत कई नाम शामिल हैं.

क्या लिखा है बयान में?

जारी बयान में इस कानून को पास करने को लेकर सरकार और भारतीय संसद को बधाई दी गई है. साथ ही कहा गया है कि इस कानून के जरिए सरकार और संसद उन अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए खड़ी हुई है, जिन्हें दुनिया भर में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा है. बयान में कहा गया है कि 1950 में लियाकत और नेहरू के बीच हुआ समझौता नाकाम होने के बाद सभी विचारधारा वाले राजनीतिक दलों की ओर से पाकिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की मांग की जाती रही है.

बयान के मुताबिक, ये अल्पसंख्यक मुख्य तौर पर दलित समुदाय से ताल्लुक रखते थे . बयान में उत्तरपूर्वी राज्यों की चिंताओं के समुचित समाधान किए जाने की बात कहते हुए संतोष जताया गया है.

‘धार्मिक भेदभाव नहीं करता सीएए’

बुद्धिजीवियों ने अपने बयान में कहा है, ‘हमें विश्वास है कि सीएए पूरी तरह भारत के सेक्युलर संविधान के अनुरूप है और भारतीय नागरिकता चाहने वाले किसी भी देश के शख्स को नहीं रोकता है. न ही यह नागरिकता के मापदंडों को बदलता है.’

बयान के मुताबिक, यह कानून तीन देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के चलते पलायन करने वाले अल्पसंख्यकों की समस्याएं खत्म करता है. साथ ही अहमदिया, हजारा या किसी अन्य संप्रदाय या नस्ल के लोगों को नियमित प्रक्रियाओं के जरिए भारतीय नागरिकता पाने से वंचित नहीं करता. बयान में आरोप लगाया गया है कि देश में जानबूझकर डर का माहौल फैलाया जा रहा है, जिसकी वजह से देश के कई हिस्सों में और खास तौर पर बंगाल में हिंसा हुई. बयान में समाज के हर तबके से अपील की गई है कि वे शांति बरतें और सांप्रदायिकता और अराजकतावाद की चपेट में न आएं.

भारत में 62 प्रतिशत लोग सीएए के समर्थन में, असम के 68% लोग विरोध में: सर्वे

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर मचे बवाल के बीच हुए एक सर्वे में बड़ी संख्या में लोगों ने सीएए को समर्थन किया है. इस सर्वे में देश के 62 प्रतिशत लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का समर्थन किया है. वहीं असम के 68 प्रतिशत लोग इस कानून के खिलाफ हैं. आईएएनएस-सीवोटर सर्वेक्षण में शनिवार को इस बात की जानकारी सामने आई.

देशभर में 3 हजार नागरिकों में 17 से 19 दिसंबर के बीच कराए गए स्नैप पोल में नमूने के तौर पर सबसे अधिक लोग 500 असम से लिए गए थे, जिसमें पूर्वोत्तर व मुस्लिम समुदाय के लोग समान रूप से मौजूद रहे. रिपोर्ट के अनुसार देशभर के 62.1 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वह सीएए के समर्थन में हैं, जबकि 36.8 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वह इसके विरोध में हैं.

रिपोर्ट में पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से 57.3, 64.2, 67.7 और 58.5 प्रतिशत लोगों ने क्रमश: कानून के पक्ष में होने की बात कही. इसी प्रकार पूरब में 42.7 प्रतिशत, पश्चिम में 35.4 प्रतिशत, उत्तर में 31.2 प्रतिशत और दक्षिण में 38.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह इस कानून का विरोध करते हैं.

असम में ही 68.1 प्रतिशत लोग सीएए के विरोध में

पिछले हफ्ते पूर्वोत्तर में इस कानून का भारी विरोध हुआ था, रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि यहां 50.6 प्रतिशत लोग कानून के समर्थन में हैं, वहीं 47.7 लोग इस एक्ट के विरोध में हैं. सर्वे से पता चलता है कि सिर्फ असम में ही 68.1 प्रतिशत लोग सीएए के विरोध में हैं, जबकि 31 प्रतिशत इसका समर्थन कर रहे हैं.

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि मुस्लिमों में 63.5 प्रतिशत लोग इसके खिलाफ हैं, जबकि 35 प्रतिशत इसका समर्थन करते हैं और 0.9 प्रतिशत का कहना है कि वह इस बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं. यदि हिंदुओं की बात करें तो 66.7 प्रतिशत लोग इसका समर्थन करते हैं, जबकि 32.3 प्रतिशत इसके विरोध में हैं.

इसी प्रकार अन्य धर्मो की बात की जाए तो 62.7 इसके पक्ष में है, वहीं 36 प्रतिशत सीएए का विरोध कर रहे हैं. हालांकि, एक अन्य प्रश्न कि क्या सीएए के भेष में लोग देश के लिए खतरा बन सकते हैं, इस सवाल के जवाब में देश भर के 64.4 प्रतिशत लोगों ने हां में उत्तर दिया. वहीं 32 प्रतिशत ने कहा कि ऐसा नहीं होगा.

दूसरे देशों से लोग भारत में आकर बसे तो सुरक्षा को खतरा?

सर्वे में कहा गया कि पूरब, पश्चिम और उत्तर भारत में 69, 66, 72.8 प्रतिशत लोगों को क्रमश: ऐसा लगता है कि यदि दूसरे देशों से लोग भारत में आकर बसे तो सुरक्षा को खतरा हो सकता है. हालांकि, दक्षिण भारत के 47.2 प्रतिशत लोग इस बात से सहमत हैं, जबकि 50 प्रतिशत को ऐसा लगता है कि अन्य देशों के यहां बसने से देश को कोई खतरा नहीं होगा.

पूर्वोत्तर राज्यों में केवल 59.8 प्रतिशत लोग इस बात से सहमत हैं. जबकि 35.7 प्रतिशत इस बात का विरोध करते हैं. इस बीच असम की बात करें तो 73.4 प्रतिशत लोगों को ऐसा लगता है कि यदि विदेशी भारत में आकर बसे तो वह समाज और सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं. वहीं, 21.8 प्रतिशत लोगों को ऐसा नहीं लगता है.

हिंदुओं और मुस्लिमों में 65.3 और 67.5 प्रतिशत लोगों को क्रमश: ऐसा लगता है. जबकि 33 और 28.2 प्रतिशत लोग इस बात से इनकार करते हैं. सीएए को लेकर सरकार और विपक्ष के समर्थन के सावाल पर 58.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वह सरकार के साथ हैं, जबकि 31.7 प्रतिशत ने विपक्ष को अपना समर्थन दिया है.

पूर्वोत्तर भारत के अधिकतर लोगों ने किया समर्थन

इसी प्रकार से पूरब, पश्चिम, उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के अधिकतर लोगों ने सरकार का समर्थन किया है, वहीं दक्षिण भारत के 47.2 प्रतिशत लोगों ने इस बात को लेकर विपक्ष का साथ दिया है. असम में 53.5 प्रतिशत लोग विपक्षी पार्टियों के साथ खड़े दिखाई देते हैं. जबकि 33.7 प्रतिशत लोग सरकार के पक्षधर हैं.

सीएए को लेकर सरकार के साथ खड़े होने के मामले में हिंदू और मुस्लिम बंटे हुए हैं. 67 प्रतिशत हिंदू इसका समर्थन करते हैं, जबकि 71.5 प्रतिशत मुस्लिम सरकार को छोड़ विपक्ष का साथ देते नजर आ रहे हैं.

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