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2019 में मोदी सरकार की ‘उपलब्धियों’ पर फोकस कर महागठबंधन से मुकाबला करेगी BJP

नई दिल्ली 9 सितम्बर 2018 । भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पहले दिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि हम देश बनाने में जुटे हैं और विपक्ष तोड़ने में। उधर, अगले वर्ष होनेवाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 2019 के चुनाव में पार्टी संगठन का नेतृत्व करेंगे जिनके तीन वर्ष का कार्यकाल जनवरी 2019 में समाप्त हो रहा है। इस दौरान पार्टी ने संगठनात्मक चुनाव टाल दिए हैं।

पूरी पार्टी चुनावी तैयारियों में व्यस्त है। दिसंबर में पांच राज्यों के और उसके बाद लोकसभा के चुनाव होने हैं। इसके चलते राष्ट्रीय व प्रदेश में कहीं भी संगठनात्मक चुनाव नहीं होगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का पहला कार्यकाल अगले साल जनवरी 2019 में पूरा हो रहा था, अब वे चुनाव होने तक अध्यक्ष बने रहेंगे। हालांकि उसके बाद भी उनको दूसरा कार्यकाल मिल सकता है। भाजपा संविधान के मुताबिक कोई भी नेता तीन-तीन साल के दो कार्यकाल तक अध्यक्ष रह सकता है। प्रदेशों में भी मौजूदा अध्यक्ष लोकसभा चुनावों तक बने रहेंगे। चुनाव वाले साल में भाजपा में हमेशा संगठन चुनाव टाले जाते रहे हैं। दो बार तो लालकृष्ण आडवाणी के अध्यक्ष रहते चुनाव टाले गए थे।

हर राज्य अध्यक्ष से जानकारी हासिल की

मिशन- 2019 के लिए चाक-चौबंद रणनीति बनाने में जुटे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एक भी कमजोर कड़ी नहीं छोड़ना चाहते हैं। राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में शाह ने हर राज्य के अध्यक्ष से लगभग दो दर्जन बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी हासिल की। शाह ने साफ किया कि सभी कार्यकर्ता सात माह तक सब कुछ भूलकर कमल व भारत माता के लिए काम करें। संकल्प ही विजय का

रास्ता है और ‘अजेय भाजपा’ हमारा संकल्प है। बैठक के पहले राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ लगभग तीन घंटे के मंथन में भाजपा अध्यक्ष मे सभी प्रदेश अध्यक्षों से चुनावी तैयारियों से बात की। बूथ प्रबंधन, केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन, प्रचार-प्रसार, समेत कई मु्द्दों पर हर प्रदेश अध्यक्ष से सवाल पूछे।

एक-एक दिन कीमती है

शाह ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता के लिए आने वाला एक एक दिन कीमती है। उसे कमल व भारत माता पर खुद को केंद्रित करना है। कमल यानी भाजपा का चुनाव चिन्ह। उम्मीदवार कौन है, वह अहम नहीं है, वोट कमल पर ही आना चाहिए। इसके साथ ही भारत माता की जय यानी प्रखर राष्ट्रवाद। इससे भी कोई समझौता नहीं है।

दुनिया में सबसे लोकप्रिय नेता मोदी भाजपा के पास

शाह ने साफ किया कि लोकसभा से पहले होने वाले हर विधानसभा चुनाव को जीतना है। भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी लाभ की स्थिति यह है कि उनके पास नरेंद्र मोदी जैसा नेता है। जो दुनिया के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता है। भाजपा जैसी संगठन शक्ति भी किसी के पास नहीं है। कार्यकर्ताओं को बस जनता के पास तथ्यों व आंकड़ों के साथ जाना है, जिससे विपक्ष के झूठ का पर्दाफाश होगा, वहीं सरकार व भाजपा के सत्य को लोग जान सकेंगे।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में वाजपेयी पर शोक प्रस्ताव

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री एवं पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। पार्टी ने संकल्प व्यक्त किया कि वह उनके दिखाए मार्ग पर सतत चलती रहेगी तथा देश में सुशासन और विकास की राजनीति को मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगी।

चुनाव से पहले बीजेपी ने कतरे महारानी के पर, अमित शाह ने शेखावत को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

राजस्थान में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं लेकिन बीजेपी के लिए वहां राह आसान नजर नहीं आती है। रास्ता और मुश्किल इसलिए है कि वहां बीजेपी खुद धड़ो में बंटी हुई है और केंद्रीय नेतृत्व के साथ भी उसकी तनातनी है। इस बीच ये मनमुटाव और बढ़ सकता है क्योंकि पार्टी ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान के लिए विधानसभा चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक नियुक्त किया है। असल में केंद्र का बीजेपी नेतृत्व शेखावत को राजस्थान में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहता था लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ये होने नहीं दिया। पर अब शेखावत सीएम की इच्छा के खिलाफ राज्य में चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। पार्टी को ये कदम राजस्थान में नाराज राजपूतों को साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी को भी बड़ी जिम्मेदारी दी है। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें 16 सदस्यीय पैनल का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी दी है। ये पैनल आने वाले राजस्थान विधानसभा चुनावों के बारे में सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेगा। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इस पैनल के सदस्यों में से एक हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राजस्थान भाजपा प्रवक्ता सतीश पूनिया पैनल के सह संयोजक बनाए गए हैं।

गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि राजस्थान की मुख्यमंत्री और पार्टी प्रमुख के बीच मतभेदों को देखते हुए उनकी नियुक्ति बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि मतभेदों के चलते ही लगभग तीन महीने तक नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हुई थी। यहां ये बात याद रखने वाली है कि वसुंधरा राजे के वफादार अशोक परनामी ने 16 अप्रैल को राजस्थान के भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि पार्टी राज्य में दो लोकसभा सीटों और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में हार के बाद संगठन में कुछ बदलाव करना चाहती थी।

सूत्रों का कहना है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपना चाहते थे लेकिन इसका मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने विरोध किया था। वसुंधरा श्रीचंद्र कृपलानी को प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहती थीं। दरअसल कहा जाता है कि शेखावत का नाम पर राजस्थान बीजेपी दो हिस्सों में बंट गई थी। एक वर्ग शेखावत को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं था। इसके बाद बीच का रास्ता निकालते हुए मदन लाल सैनी को जून में प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

अब जिस तरह से एससी/एसटी एक्ट को लेकर राजस्थान में भी अगड़ी जातियां विरोध कर रही हैं उसे देखते हुए भी कहा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ने गजेंद्र सिंह शेखावत को आगे किया है। इसके अलाव चुनाव के लिए बनाई गई कमेटी में दो राज्य मंत्रियों यूनुस खान और राजेंद्र राठौड़ को सदस्य के रूप में शामिल किए गया है। राज्यसभा के सदस्य किरोड़ी लाल मीणा को भी समिति में जगह दी गई है। केंद्रीय मंत्री सीआर चौधरी और राज्य के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया भी टीम का हिस्सा होंगे।

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