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प्रदूषण के चलते हृदय मे जम रहा है खून का थक्का

उज्जैन 16 दिसंबर 2019 । वाहनों और औद्योगिक इकाइयों से निकल रहा धुंआ हृदय व मस्तिष्क की नसों में खून का थक्का बनाने की बडी वजह बन रहा है। जहरीलें धुंए मे हैवी मेटल (भारी तत्व) खून में उन तत्वों को बढ़ावा दे रहे है जिससे दिल और दिमाग की नसों में सूजन आती हैं। देश मे वायु प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच रहा है ।
राष्ट्रीय पर्यावरण संगठन के कार्यकारी सदस्य और पर्यावरण स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ नरेश पुरोहित ने उक्त तथ्यों की जानकारी राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान नागपुर मे हाल ही में जानलेवा प्रदूषण के विरूद्ध जंग विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला मे अपनी शोध रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए ब्लू आईज को दी।
डॉ पुरोहित ने अपनी शोध रिपोर्ट मे बताया कि एक दर्जन से अधिक देशों में लगभग 3,5O,OOO लोगो पर शोध किया गया है इसमे 37 रिपोर्ट अभी तक प्रकाशित हो चुकी है। इन अध्ययनों मे विभिन्न साधनों के माध्यम से भारी धातुओं के संपर्क में आने का आकलन किया गया। इसमें हवा के साथ साथ जल पीने के स्तर की जांच भी शामिल है। इनमें आर्सनिक, सीसा , कैडमियम और तांबा से कोरोनरी हार्ट डिसीज के जोखिम अधिक मिले है। सीसा एवं कैडमियम के संपर्क में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा सबसे अधिक पाया गया है।
कैंसर का भी रहता डर :
जहरीले धुंए के माध्यम से भारी धातुओं में सीसा , पारा, कैडमियम , निकल आदि खून मे धुल रहे है। यही हैवी मेटल खून मे उन तत्वों को बढा रहे है जिससे दिल और दिमाग की नसों में सूजन आती है और लचीलापन खत्म होता है। लेङ एवं कैडमियम के लंबे समय तक संपर्क में रहने से दिल की धमनियों में कड़ापन और खून के थक्के बनने लगते है। इससे कोशिकाओं मे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

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