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सीमा विस्तार, कश्मीर समस्या का अंत, डॉलर की राह चलेगा रुपया

नई दिल्ली 27 मई 2019 । जैसे ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह की तिथि और समय का ऐलान हुआ है वैसे ही ज्योतिषियों ने भी सरकार के बारे में भविष्यवाणियां करनी शुरु कर दीं हैं। देश और विदेश के जाने-माने ज्योतिषविद् पंडित जयगोविंद शास्त्री ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में ऐतिहासिक घटनाएं होंगी। कश्मीर समस्या हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो जायेगी। कश्मीरी पंडितों की घाटी में फिर से वापसी होगी। पंडित जयगोविंद शास्त्री का दावा है कि जिन गृहों और नक्षत्र में भारत की नयी सरकार शपथ लेने जा रही है उनसे पता चलता है कि भारत का सीमा विस्तार या इसके समतुल्य घटना इस सरका की विशेष उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा कि इसे अतिश्योक्ति न माना जाये।वेदिक पंचाग के मुताबिक 30 मई की शाम 7 बजे प्रदोष तिथि और प्रदोष वेला है। मोदी औरउनकी सरकार आयुष्यमान योग में शपथ ग्रहण करने जा रही है। यह योग बताता है कि नरेंद्र मोदी की सरकार पूरी मजबूती के साथ अपना कार्यकाल तो पूरा करेगी ही साथ ही ऐसे कदम भी उठायेगी जिनको अभी तक असंभव माना जाता रहा है। ऐसे कौन-कौन से कदम और फैसले होंगे इस सवाल पर पंडित जयगोविंद शास्त्री ने कहा बहुत सी बातें संवेदनशीता की दृष्टि से जगजाहिर करना उचित नहीं है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि कश्मीर जैसी कोई समस्या 2024 में नहीं होगी।

मोदी सरकार के शपथ ग्रहण के समय रेवती नक्षत्र का स्पर्श पृथ्वी पर हो रहा है। गोधूलि वेला और वृश्चिक लग्न सरकार को स्थायित्व और सौभाग्यशाली होने का आशीर्वाद प्रदान कर रहे हैं। विदेशों में सरकार की साख और लोकप्रियता में और भी बढ़ोतरी होगी। भारतीय मुद्रा का मान बढ़ेगा। ऐसा भी हो सकता है कि दुनिया के कुछ देश अमेरिकी डॉलर के बजाए भारतीय मुद्रा में व्यसाय में प्राथमिकता देने लगेंगे।

शपथ ग्रहण के समय के ग्रहों की गति के अनुसार गुरु-चंद्र का नवम-पंचम योग और राहु का उच्च स्थान में सरकार को पूर्ण और स्वस्थ्य आयु दे रहा है। शनि और केतु का पंचम भाव में होनातथा मंगल-राहु की पूर्ण दृष्टि सरकार के सामने हर एक उपलब्धि के आगे एक नया कठिन लक्ष्य हासिल करने की चुनौती देगा। आसान शब्दों में कहें तो एक समस्या का हल करने के साथ ही सरकार के सामने दूसरी बड़ी समस्या मुंह बायें खड़ी दिखाई दे सकती है, लेकिन सरकार अपने सभी लक्ष्य पूरा करेगी, किंतु सरकार चलाने वालों को चैन की नींद मिलना मुश्किल है। सरकार के कार्यकाल में एनडीए के कुछ घटक दल छिटकने और कुछ नये दलों का सरकार शामिल होने के संकेत भी मिल रहे हैं। पांच साल के सार के रूप में कहा जा सकता है कठिन राह पर चलते हुएमोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल भी अंत में वरदान साबित होगा।

प्रचंड जीत के बाद दोबारा देखी गई मोदी की कुंडली, जानिए कबतक अपराजेय रहेंगे प्रधानमंत्री ?
नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं. इस लोकसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में एनडीए ने जो रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन किया है, उसे देखते हुए काफी लोग कह रहे हैं कि मोदी को हराना किसी के बस की बात नहीं है. इसीलिए हमने ज्योतिष विज्ञान के ज्ञाताओं से ये सवाल किया कि आखिर मोदी कबतक विजयरथ पर सवार रहेंगे, उनके अपराजेय रहने का सिलसिला कब टूटेगा. जानिए मोदी की कुंडली देखकर क्या भविष्यवाणी की गई है.

पीएम नरेंद्र मोदी की वृश्चिक लग्न की कुंडली है और वृश्चिक राशि है. वृश्चिक राशि का चिह्न बिच्छू है. बिच्छू को बहुत संवेदनशील माना जाता है. बिच्छु के बारे में मशहूर है कि ये किसी के आने की आहट पा कर छुप जाता है. यानी ये बात खुद-ब-खुद इस बात को साबित करती नजर आ रही है कि जहां एक तरफ वृश्चिक राशि वाले लोग पूरी गोपनीयता के साथ काम करते हैं. तो वहीं वो अपनी बातों को सबसे साझा करने से भी बचते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मपत्री में मंगल 2022 के बाद काफी ज्यादा को प्रभावी होता नजर आ रहा है. उसकी प्रबलता विरोधियों की सक्रियता का सूचक है. साथ ही साथ नवांश में भी मंगल और बृहस्पति की प्रबलता प्रधानमंत्री के 72 साल की अवस्था के बाद काफी खराब स्थिति का सूचक है, जिसमें विरोधियों की काफी सक्रियता हो जाएगी, जो प्रधानमंत्री की छवि को खराब करने में काफी हद तक सक्षम भी होगी, लेकिन अभी प्रधानमंत्री की जन्मपत्री अपने मजबूती की चरमोत्कर्ष पर हैं और इस समय निरंतर सफलता की ओर बढ़ रही है.

इस वर्ष कुंडली का नवमांश की बात करें तो नवांशा मे दशम घर में गुरु की प्रबल स्थिति तथा यहां भी छठे घर में सूर्य का गुरु से मूल त्रिकोण संबंध बनाते हुए गुरु की प्रबलता को मजबूत करते हुए एक मजबूत शासक की स्थिति दर्शाती है. 17 सितंबर 2019 के बाद प्रधानमंत्री मोदी काफी मजबूत आत्मविश्वास के साथ आक्रामक और अप्रत्याशित फैसले लेंगे जो देश में ऐतिहासिक बदलाव लाएगा. आने वाले दो साल तक यानी सितंबर 2022 तक प्रधानमंत्री जी जनहित के फैसलों के साथ कठोर निर्णय लेंगे, जिससे मूलभूत परिवर्तन देश के नियम-कानून में भी होगा. हालांकि मोदी का यह साहसिक और बोल्ड निर्णय का समय 2022 तक ही चल पाएगा.

कुंडली के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 से 2022 तक काफी सफल एवं लोकप्रिय शासक के रुप मे कार्य करेंगे, लेकिन सितम्बर 2022 के बाद उनका जबरदस्त विरोध होगा. उन पर बहुत सारे आरोप भी लगाए जा सकते हैं. यहां तक कि उन्हें अपनों का अर्थात् पार्टी के भीतर से भी उठे सवालों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में 2022 से 2024 के बीच का समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शुभ नहीं कहा जाएगा. यह समय उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण होगा.

मोदी सरकार के पहले 100 दिनों का मास्टर प्लान तैयार, होंगे ये बड़े ऐलान !

17वीं लोकसभा के चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद जल्द ही नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। फिलहाल शपथ ग्रहण के तारीख का ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक 30 मई को नरेंद्र मोदी और उनका मंत्रिमंडल शपथ लेगा। जानकारों के मुताबिक जिसतरह से भारतीय जनता ने नरेंद्र मोदी को जनादेश दिया है उससे लोगों की उनसे आकांक्षाएं भी बढ़ गई है। प्रधानमंत्री मोदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे आर्थिक सुधार करने की है जिसमें बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन हो। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में देश की अर्थव्यवस्था के विकास को तेज रफ्तार देने के लिए कुछ बड़े और कड़े कदम की उठाने की तैयारी में है। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने कहा है कि नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती निजी निवेश में तेजी लाना और बेहतर क्रेडिट फ्लो को सुनिश्चित करना होगा। अमिताभ कांत ने कहा कि दोबारा शपथ लेते ही एकबार फिर मोदी सरकार एक्शन में आ जाएगी और आने वाले दिनों ने कुछ बड़े सुधारों का ऐलान कर सकती है।

– नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मुताबिक मोदी सरकार विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधारों के जरिये उच्च विकास दर पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिससे निजी क्षेत्र द्वारा निवेश में बढ़ोतरी होगी और रोजगारों का सृजन होगा। इससे क्रेडिट फ्लो में भी उल्लेखनीय तेजी आएगी। वह मुख्य रूप से लोगों के जीवन स्तर में सुधार पर ध्यान देंगे, जिसके तहत एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट पर विशेष जोर दिया जाएगा।

– अमिताभ कांत ने कहा कि अभी सबसे बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था की रफ्तार को बरकरार रखने की है। हमें उद्योग एवं निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है, जो आगे चलकर व्यापक रूप से रोजगारों के सृजन में मदद करेगा। मुझे लगता है कि पीएम पर्यटन, कंस्ट्रक्शन और टेक्सटाइल्स क्षेत्र पर ध्यान देंगे, जो भारी तादाद में रोजगारों का सृजन करते हैं।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी का कहना है कि कृषि के क्षेत्र में किए गए मुख्य सुधारों का मकसद किसानों की आय को दोगुना करना होगा। कृषि में मार्केट नॉन फंक्शनल है। इसके लिए कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग, रिस्ट्रक्चरिंग इशेंशियल कमोडिटिज और एपीएमसी एक्ट्स, टेक्नॉलजी इनफ्लो, ई-नाम, टेक्नॉलजी का प्रवाह, बाजार तक पहुंच, कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसिंग की जरूरत है। पीएम एग्री-बिजनस पर काफी ध्यान दे सकते हैं। सरकार उत्खनन, रेलवे, भारतनेट और तेल एवं गैस क्षेत्र में सुधारों को भी बढ़ावा दे सकती है। इन सबसे आने वाले दिनों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

साथ ही अमिताभ कांत का कहना है कि मंत्रालय 100 दिनों के एक्शन प्लान पर पहले ही काम कर चुके हैं। नीति आयोग भी इसपर काम कर चुका है। लेकिन अंतिम फैसला प्रधानमंत्री को लेना है। 100 दिनों का प्लान मुश्किल और बड़े सुधारों को बढ़ावा देने के लिए है।

हार के बाद तनाव में लालू यादव, खाना भी ढंग से नहीं खा रहे, इंसुलिन देना हुआ मुश्किल..
लोकसभा चुनावों के नतीजों ने बहुत कुछ बदल दिया है. विपक्ष के नेता जहां झूठमूठ के इस्तीफे में व्यस्त है तो कई हार के मंथन में लगे है. इस बार जातियों के ठेकेदारों को सबसे बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. बिहार की राजनीति को दशकों से लीड कर रहे लालू यादव को भी बड़ा झटका लगा है. रिपोर्ट के अनुसार रांची के रिम्स में भर्ती लालू प्रसाद की दिनचर्या ख़राब हो गई है. वह ढंग से न तो खा पा रहे हैं न सो रहे है. लालू यादव की दिनचर्या देखकर डॉक्टरों की परेशानी भी बढ़ गई है.*

रिम्स में लालू प्रसाद का इलाज कर रहे डॉक्टरों की माने तो वह सुबह में नाश्ता तो किसी तरह ले रहे हैं, लेकिन दोपहर का खाना नहीं खा रहे हैं. सुबह में नाश्ता और रात में ही खाना ले रहे हैं, जिसके कारण उन्हें इंसुलिन देने में परेशानी हो रही है.

ईलाज कर रहे डॉक्टर ने बताया कि लालू प्रसाद के लिए समय से खाना और दवा काफी जरूरी है. यदि समय से खाना नहीं खाएंगे तो समय से दवा नहीं दी जा सकेगी, जिसका सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है.

गौरतलब है कि चुनाव परिणाम के दिन लालू प्रसाद सुबह आठ बजे से ही टीवी खोलकर देख रहे थे. लेकिन जैसे जैसे चुनाव परिणाम आने लगा उनकी उदासी बढ़ती चली गई. दोपहर एक बजे तो वह टीवी बंद कर सो गए.

बता दें कि बिहार में इस बार राजद की कमान तेजस्वी के हाथों में थी और उन्होंने महागठबंधन कई ऐसे फैसले लिए जिससे राजद एक भी सीट नहीं जीत पाई. मुकेश सहनी, मांझी और कुशवाहा को औकात से ज्यादा सीटें दी गई. इसके अलावा मिलकर प्रचार नहीं हुआ. कई जगह पर एक दूसरे के खिलाफ परोक्ष रूप से हठ करते हुए प्रत्याशी खड़े किये गए. लोग तेजस्वी को अहंकारी भी बता रहे है. अब देखना होगा राजद क्या कुछ अपने एजेंडों में बदलाव लाती है.

नई लोकसभा का दस दिनी सत्र पांच जून से

शनिवार को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में नरेंद्र मोदी को एनडीए के संसदीय दल का नेता चुना गया. कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी 30 मई को शपथ ग्रहण कर सकते हैं. ऐसे में 17वीं लोकसभा सभा का पहला संसद सत्र 5 जून से शुरू हो सकता है. पहला सत्र 15 जून तक चलने की संभावना है.
प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करने जा रहे हैं. खबर है कि 17वीं लोकसभा का पहला संसद सत्र 5 जून से शुरू हो सकता है. पहला सत्र 5 से 15 जून तक चलने की संभावना है. इसमें सभी सांसदों को प्रोटेम स्पीकर के द्वारा शपथ दिलाई जाएगी.

प्रोटेम स्पीकर सबसे वरिष्ठ सांसद (उम्र में सबसे ज्यादा) को बनाया जाता है. इसके बाद लोकसभा स्पीकर और डिप्टी स्पीकर का चुनाव होगा. ये लोकसभा में परम्परा रही है कि स्पीकर के पद पर सत्ता पक्ष का सांसद और डिप्टी स्पीकर के पद विपक्षी दलों में किसी सांसद को जाता है. 16वीं लोकसभा में स्पीकर बीजेपी सांसद सुमित्रा महाजन थीं और डिप्टी स्पीकर एआईएडीएमके के सांसद थम्बी दुरई थे.

बता दें कि शनिवार को नरेंद्र मोदी को एनडीए के संसदीय दल का नेता चुना गया. नए सांसदों और अन्य नेताओं को नरेंद्र मोदी ने 75 मिनट का भाषण दिया. इसके बाद एनडीए के नेताओं ने राष्ट्रपति भवन जाकर समर्थन पत्र राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सौंपा. कुछ देर बाद मोदी भी राष्ट्रपति कोविंद से मुलाकात करने पहुंचे थे. इस दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने मोदी को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हुए केंद्र में नई सरकार बनाने का न्योता देकर मंत्रिपरिषद् और शपथ ग्रहण की डेट तय करने को कहा था.

लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनियाभर से मिल रहे बधाई संदेशों का सिलसिला तीन दिन बाद भी जारी है. सऊदी अरब के वली-अहद (युवराज) मोहम्मद बिन-सलमान, कतर के अमीर शेख तमीत बिन-हमद अल-थानी, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे और श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिन्दा राजपक्षे ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर बधाई दी. पीएमओ से जारी बयान के मुताबिक

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