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बौखलाए अमेरिका ने भारत से पूछा, एंटी सेटेलाइट मिसाइल ने गिनकर कैसे किए उपग्रह के टुकड़े

नई दिल्ली 1 अप्रैल  2019 । अमेरिका की ताजा बौखलाहट के पीछे यही कारण है। अमेरिका ने अंतरिक्ष में कचरा फैलाने का आरोप लगाया तो इसरो ने साफ कर दिया कि भारत की मिसाइल इस तरह से डिजायन की गई है कि वह उपग्रह का चूरा करने की अपेक्षा बड़े टुकड़े करती है और उन टुकड़ों को इसरो आसानी से पृथ्वी के वायुमंडल में ले आया। जबकि अमेरिका का कहना है कि नासा और उसकी सेना भारतीय परीक्षण से उत्पन्न 250 टुकड़ों की निगरानी कर रही है।

इस परीक्षण पर भारत में हो रही राजनीति को किनारे कर दिया जाए तो इसरो की यह उपलब्धि ही अमेरिका की ईर्ष्या का कारण है क्योंकि वह अभी तक ऐसी मिसाइल डिजाइन नहीं कर पाया है जो उपग्रह के बड़े टुकड़े करे और उन्हें पृथ्वी के वायुमंडल में वापस ले आए। कचरा नहीं फैलाने के भारत के दावे पर अमेरिका के रक्षामंत्री पेट्रिक शानाहान ने कहा है कि नासा इसरो के दावे का परीक्षण कर रहा है कि क्या वाकई वह कचरे को वापस पृथ्वी के वायुमंडल में ले आया है।

भारत ने परीक्षण की घोषणा के साथ ही साफ कर दिया था कि उसने एंटी सेटेलाइट मिसाइल का परीक्षण पृथ्वी की निचली कक्षा में किया ही इसलिए था ताकि उपग्रह के टुकड़े हाथों—हाथ पृथ्वी पर आकर समुद्र में गिर जाएं। यहां बता दें कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान इसरो दुुनिया का एकमात्र ऐसा संस्थान है जिसे अंतरिक्ष में उपग्रह प्रक्षेपण के ठेके स्वयं अमेरिकन नासा भी देता है क्योंकि इसरो की तकनीक बेहद सस्ती है।

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