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लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी

इंदौर 22 मार्च 2019 । मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए दावेदारी ठोक दी है. उन्होंने होली के दिन सियासी पिच पर चुनाव लड़ने का राग अलाप कर सियासी महकमे में हलचल मचा दी है.

दरअसल, इंदौर से लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए कभी कांग्रेस के अंदर चुनाव सलमान खान, कभी अरुण गोविल तो कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह के नाम पर मांग की जाती है; पर पहली बार किसी नेता ने खुलकर चुनाव लड़ने की आशंका जताई है.

मध्य प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने खुलेआम इंदौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की अपनी मंशा जग जाहिर कर दी है. पटवारी ने होली के दिन सियासी मैदान पर लोकसभा चुनाव लड़ने रंग डाला है. जीतू ने कहा, ”इंदौर की जनता ताई (सुमित्रा महाजन) से थक चुकी है. सुमित्रा महाजन आम लोगों से मिलती नहीं हैं. लोगों के पास उनका मोबाइल नंबर नहीं है. उन्हें इंदौर की कॉलोनियों के नाम तक पता नहीं हैं.”

मंत्री पद से नहीं है मोह
मध्य प्रदेश में पहली बार किसी मंत्री ने लोकसभा चुनाव लड़ने की खुली मंशा जताई है. जीतू पटवारी ने कहा, ”मुझे मंत्री पद से कोई मोह नहीं है. मैं सांसद बनकर जनता की सेवा करना चाहता हूं. साथ ही पटवारी ने कहा कि पार्टी मुझे मौके देती है तो मैं पूरी तरह से तैयार हूं.”

मंत्री पटवारी की पत्नी के चुनावी मैदान में आने वाली बातों को लेकर उन्होंने कहा, ”मेरे परिवार से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा. पार्टी मौका देगी तो पूरी दम से चुनाव लडूंगा और जीतकर जनता की सेवा करूंगा.”

नेता पुत्रों का लिया पक्ष
कमलनाथ सरकार के मंत्री जीतू ने कहा कि किसी के परिवार के सदस्य यदि सक्रिय राजनीति कर रहे हैं और अगर जिताऊ उम्मीदवार है तो उन्हें मौका मिलना चाहिए. इसमें मंत्री पुत्र होना गलत नहीं है.

राहुल गांधी के करीबी
दरअसल, जीतू पटवारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी नेता माने जाते हैं. बेहद कम समय में देश की राजनीति में रुतबा बनाने वाले जीतू इंदौर में युवा के साथ कांग्रेस पार्टी के फेस हैं. राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो सुमित्रा महाजन का बीजेपी में विरोध जीतू पटवारी के लिए प्लस पॉइंट है.

BJP को रोकने के लिए ममता बनर्जी का मास्‍टर प्‍लान!
पिछले कुछ सालों से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का एकछत्र राज है. आगामी लोकसभा चुनाव उसके लिए काफी मुश्किल हो सकता है. बीजेपी से उसे कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है. राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश में जुटीं ममता बनर्जी किंगमेकर के तौर पर भी उभर सकती हैं.
ममता की कोशिश है कि लोकसभा में बीजेपी और कांग्रेस के बाद तृणमूल कांग्रेस सीटों के मामले में नंबर तीन पर रहे. इसके लिए उन्होंने खास रणनीति बनाई है, जो उनके 42 सीटों के कैंडिडेट्स के चयन में भी दिखती है. उनकी ये रणनीति तीन स्तर पर चल रही है.

ममता बनर्जी ने खुद माना है कि इस बार का चुनाव उनके लिए चुनौती साबित हो सकता है. उन्‍होंने कहा था कि इस चुनौती है. हमें माया ने बुलाया तो बनारस जाकर मोदी के खिलाफ प्रचार करेंगे.

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में ममता के हिस्से की ज्यादा ज्यादा से सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका में है. कभी लेफ्ट के गढ़ रहे पश्चिम बंगाल में आज लेफ्ट तीसरे नंबर पर है. ममता बनर्जी भी बीजेपी से मिल रही चुनौती को बखूबी समझ रही हैं. इसीलिए अपने दुर्ग की घेरेबंदी में जुट गई हैं.

2014 में पश्चिम बंगाल ऐसा राज्य था जहां मोदी लहर का असर ममता बनर्जी को नहीं झेलना पड़ा था. भगवा ब्रिगेड ने तभी तय कर लिया था कि 2019 के चुनाव में वो ममता को कमज़ोर करके ही दम लेंगे. इस चुनाव में ममता बनर्जी भी महसूस कर रही हैं कि बीजेपी इस बार टक्कर के मुकाबले में है. इसीलिए उन्होंने कई मोर्चों पर अपना साम्राज्य बचाने की रणनीति बनाई है.

मिमी चक्रवर्ती को कोलकाता के जादवपुर से उम्मीदवार बनाया गया है वहीं नुसरत जहां को बसीरहाट से. यह दोनों अभिनेत्रियां बेहद खूबसूरत हैं. 30 साल की मिमी चक्रवर्ती बांग्ला एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का जाना माना नाम हैं.

उन्हें टीवी सीरियल ‘गानेर ओपारे’ से बेहद लोकप्रियता मिली. इस सीरियल की शुरुआती स्क्रिप्ट ऋतुपर्णो घोष ने लिखी थी. शो रवीन्द्रनाथ टैगोर को ट्रिब्यूट था जिसमें मिमी ने प्यूप का किरदार निभाया था. शो की सफलता के बाद मिमी बांग्ला फिल्मों की तरफ बढ़ीं.

मिमी की पहली हिट फिल्म ‘बोझे न से बोझे न’ है. उन्होंने प्रोलॉय, गोल्पो सैटी, पोस्तो, सुधो तोमारी जान्यो, धनञ्जय जैसे फ़िल्में की. मिमी का अब तक राजनीति से कोई नाता नहीं था. जादवपुर लोकसभा सीट तृणमूल कांग्रेस के लिए अहम सीट है. इसी सीट से ममता बनर्जी ने 1984 में अपना पहला लोक सभा चुनाव जीता था.

ममता की ग्लैमरस रणनीति में दूसरा नाम हैं नुसरत जहां. नुसरत भी बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री की बेहद लोकप्रिय एक्ट्रेस हैं. उन्होंने कई बड़ी बैनर और टॉप स्टार्स के साथ काम किया है. नुसरत मॉडलिंग के बाद 2011 में फिल्मों में आईं.

नुसरत की पहली फिल्म जीत थी. इसके बाद उन्होंने क्रिसक्रॉस, बोलो दुग्गा मैकी, केलोर कीर्ति, हर हर ब्योमकेश, जमाई 420 में काम किया.

ममता ने पहले भी मुनमुन सेन और शताब्दी रॉय को चुनाव में उतारा था. इस बार भी दोनों पर ममता ने भरोसा जताया है. लेकिन उनको उम्मीद है इन दोनों बेहद खूबसूरत एक्ट्रेस के पहली बार राजनीति में आने के चलते उनकी दो सीट आसानी से निकल जाएंगी.

ममता बनर्जी के इस ग्लैमरस दांव को बीजेपी उनकी बेचैनी के तौर पर देख रही है. ममता बनर्जी के फिल्‍मी अभिनेत्रियों को चुनाव में उतारने के दांव का सोशल मीडिया पर भी जमकर मज़ाक बनाया जा रहा है. दोनों के नामों का ऐलान होते ही सोशल मीडिया पर दोनों एक्ट्रेस के मज़ाक़ उड़ाने वाले मीम की भरमार लग गई. ट्विटर पर एक आदमी ने उनके वोट मांगने के अनोखे तरीक़े की तस्वीर साझा की.

कुछ लोगों ने दावा किया कि ममता बनर्जी ने इन अभिनेत्रियों के जरिए पश्चिम बंगाल के युवा वोटरों को TMC के पाले में लाने की कोशिश की है. इसीलिए कुछ लोगों ने ट्विटर पर ताना भी मारा कि पॉलिटिक्स में पब्लिक वेलफ़ेयर का तज़ुर्बा कहां मायने रखता है.

ममता बनर्जी ने इस बार जिन लोक सभा सीटों पर अभिनेत्रियों पर दांव खेला है, उन सीटों की पश्चिम बंगाल की राजनीति में अहमियत कम नहीं है.
ममता बनर्जी की राजनीतिक कर्मभूमि मानी जाने वाली जादवपुर लोक सभा सीट पर मिमी चक्रवर्ती को उतारा गया है. ये सीट कोलकाता में आती है, जहां 1984 में ममता बनर्जी ने CPM के कद्दावर नेता सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया था.

इसी तरह नुसरत जहां को बांग्लादेश की सीमा के पास बसिरहाट लोक सभा सीट पर मौक़ा दिया गया है. इस सीट पर BJP की नज़र है, जिसे 2014 में सवा दो लाख से ज़्यादा वोट मिले थे.

इसी तरह लोहे से लोहा काटने के लिए ममता बनर्जी ने आसनसोल से मुनमुन सेन को मैदान में उतारा है. यहां BJP की ओर से केंद्रीय मंत्री और गायक बाबुल सुप्रियो का फिर से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है. TMC ने बांग्ला फ़िल्मों की मशहूर एक्ट्रेस शताब्दी रॉय को फिर से बीरभूम लोक सभा सीट पर उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर शताब्दी रॉय ने पिछले दोनों लोक सभा चुनावों में जीत हासिल की थी.

ममता बनर्जी ने सिर्फ ग्लैमर का ही नहीं बल्कि महिला कार्ड भी खेल है. उन्‍होंने बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री की महिला कलाकारों को एक रणनीति के तहत ही टिकट दिए हैं.
राहुल गांधी खुद को महिला हितैषी साबित करने के लिए 33 फीसदी आरक्षण की बात करते रहे हैं. लेकिन ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव में महिलाओं को आगे बढ़ाने का दांव खेला है. उन्होंने 40 फीसदी के ज्यादा टिकट महिलाओं को दिए हैं.

ममता बनर्जी ने 34 मौजूदा सांसदों में से 8 को टिकट नहीं दिया है. जबकि दो ने पार्टी छोड़ बीजेपी जॉइन कर ली है. इससे साफ़ है कि ममता बनर्जी एंटी-इन्कम्बैंसी से बचने के लिए सांसदों के टिकट काट नए उम्मीदवार उतार रही हैं. बीजेपी से मिल रही टक्कर और जनता के रुझान को देखते हुए ममता बनर्जी ने 17 उम्मीदवार ऐसे तय किए हैं, जो पहली बार लोकसभा जाने की तैयारी में हैं या फिर उनकी सीट बदली गई है. सत्ता विरोधी लहर से निपटने का यह भी एक तरीका है.
BJP के लिए क्यों जरूरी है पश्चिम बंगाल?

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में अपने बूते अपनी पकड़ मज़बूत की है. उनके सामने लेफ्ट फ्रंट को सत्ता से उखाड़ फेंकनी की चुनौती थी.
उन्होंने सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलन के आंदोलन से पश्चिम बंगाल के लेफ्ट गढ़ को उखाड़ फेंकने की नींव रखी थी, लेकिन अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी हो गई है. अब ममता बनर्जी की सीधी लड़ाई बीजेपी से है.

बीजेपी पश्चिम बंगाल में एक मजबूत विपक्ष के तौर पर उभरी है और कई जिलों में लेफ्ट का समर्थन बुरी तरह कमजोर हुआ है. ऐसी स्थिति में लेफ्ट ने कांग्रेस संग मिलकर बीजेपी और तृणमूल के खिलाफ अस्तित्व की लड़ाई में उतरने का फैसला लिया है.

ममता बनर्जी ने हर वो दांव चल दिया जो उनके गढ़ को 2014 के चुनाव की तरह सुरक्षित रख सके. इसमें ग्लैमर है, उम्मीदवार बदलने की रणनीति है, महिला कार्ड है, लेकिन सबसे अहम है सत्ता विरोधी लहर. अगर ममता बनर्जी सत्ता विरोधी लहर से पार पाने में कामयाब रहीं तो गढ़ सुरक्षित रह सकता है, वरना बीजेपी उनके गढ़ में बड़ी सेंध मार सकती है.

होली पर BJP विधायक को मारी गोली, अस्पताल में भर्ती, खनन माफिया पर शक

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में होली के मौके पर बीजेपी के एक विधायक को गोली मार दी गई. इस घटना से हड़कंप मच गया. गोली बीजेपी एमएलए योगेश वर्मा के पैर में लगी. उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है.

बीजेपी नेता योगेश वर्मा लखीमपुर सदर सीट से विधायक हैं. घटना उस वक्त हुई, जब बीजेपी विधायक योगेश वर्मा गुरुवार यानी होली के मौके पर लोगों से मिल रहे थे. उसी वक्त किसी ने उन पर गोली चला दी. जो सीधे उनके पैर में जा लगी. फौरन उनके समर्थक और परिवार वाले उन्हें लखीमपुर के निजी अस्पताल में ले गए. जहां उनका इलाज किया जा रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत अब खतरे से बाहर है.

घायल बीजेपी विधायक योगेश वर्मा ने पुलिस को अपने बयान दर्ज कराते हुए खनन माफियाओं पर गोली मारने का आरोप लगाया है. बीजेपी विधायक को गोली मारे जाने की ख़बर मिलते ही जिले डीएम और एसपी भारी पुलिस बल लेकर मौके पर पहुंच गए.

पुलिस ने इस संबंध में विधायक योगेश वर्मा की तहरीर मुकदमा दर्ज कर लिया है. आरोपियों की तलाश की जा रही है. अभी तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. इस घटना से विधायक के समर्थकों में खासा रोष है.जिले के डीएम और एसपी ने विधायक योगेश वर्मा से मुलाकात कर उनके हाल चाल जाने और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है. पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुट गई है.

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