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समीक्षा होने तक दर्ज होते रहेंगे देशद्रोह कानून के तहत मामले, सुप्रीम कोर्ट में बोली केंद्र सरकार

नयी दिल्ली 11 मई 2022 । केंद्र सरकार ने देशद्रोह कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि किसी भी गंभीर अपराध करने वाले को इसके दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि संज्ञेय अपराधों में इस कानून को लागू करने से नहीं रोका जा सकता। दरअसल केंद्र सरकार ने मंगलवार को अदालत में इस कानून की समीक्षा की बात कही थी। केंद्र सरकार ने कहा, ‘संज्ञेय अपराध के मामलों में देशद्रोह कानून के तहत केस दर्ज होने को रोका नहीं जा सकता है। ऐसा करना गलत होगा।’वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी पर ही दर्ज होगा केस

हालांकि केंद्र सरकार ने ऐसे मामलों को वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संस्तुति दिए जाने पर ही दर्ज किए जाने की बात कही है। केंद्र सरकार ने कहा कि देशद्रोह के मामलों में स्क्रूटनी के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी होगा और उसकी रिपोर्ट न्यायिक कार्रवाई के लिए जरूरी होगी।’

केंद्र ने कहा, इस कानून पर अभी से रोक लगाना सही नहीं

इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कहा कि फिलहाल देशद्रोह कानून पर रोक लगाने का फैसला देना गलत होगा, जिसे संवैधानिक बेंच ने भी बरकरार रखने की बात कही थी। केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जहां तक लंबित मामलों की बात है तो उनमें से हर मामले की गंभीरता के बारे में हमें मालूम नहीं है। इनमें से कुछ मामलों में टेरर ऐंगल हो सकता है, जबकि किसी केस में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला हो सकता है। लंबित मामलों अदालतों के समक्ष विचाराधीन हैं और हमें उनकी प्रक्रिया पर भरोसा करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों जारी किया था सरकार को नोटिस

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा था कि वह देशद्रोह कानून की समीक्षा करने के लिए तैयार है। इस पर अदालत ने कहा था कि क्या जब तक इसकी समीक्षा होगी, तब तक इस कानून के तहत नए केस दर्ज नहीं किए जाएंगे? अदालत ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था। उसी नोटिस के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से यह जवाब दिया गया है। गौरतलब है कि देशद्रोह कानून को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं और एक वर्ग इसे खत्म किए जाने की मांग करता रहा है।

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