मुख्य पृष्ठ >> खास खबरें >> कांग्रेस में अध्यक्ष की कुर्सी का तमाशा

कांग्रेस में अध्यक्ष की कुर्सी का तमाशा

नई दिल्ली 9 जून 2019 । कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश के बाद उन्हें अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए मनाने की हर कोशिश नाकाम होने के बाद अब दस जनपथ में वफादार कोंग्रेसियों के नाम पर चर्चा शुरू हो गयी है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से कहा है कि वे अब अध्यक्ष पद पर नहीं बने रहना चाहते। इसलिए कांग्रेस की कमान किसी और को दी जाए।

राहुल गांधी द्वारा शुक्रवार को वायनाड में अपने सम्बोधन में भी ऐसे संकेत दिए थे कि कांग्रेस की कमान अब किसी और को सौंपी जानी है और राहुल गांधी सिर्फ पार्टी के लिए बिना कोई पद लिए काम करेंगे। अब सूत्रों ने कहा कि राहुल गांधी के अड़ियल रवैये को देखते हुए दस जनपथ में वफादार कोंग्रेसियों के नामो पर मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों ने कहा कि यह तय है कि प्रियंका गांधी को अध्यक्ष पद की कमान नहीं दी जायेगी। गांधी परिवार अपने ऊपर लगे वंशवाद के आरोपों को ध्यान में रखकर इस बार गांधी-नेहरू परिवार के किसी सदस्य को पार्टी की कमान नहीं सौपेगा।

नए अध्यक्ष के चयन में पार्टी का पहला मापदंड हिंदी भाषी और वफादारी है। सूत्रों ने कहा कि पूर्व रक्षा मंत्री ए के एंटनी का नाम इसीलिए अध्यक्ष पद के दावेदारों की सूची से हटाया गया क्यों कि वे हिंदी बोलने में परिपक्य नहीं हैं, अन्यथा एंटनी अध्यक्ष पद के सशक्त दावेदार थे। सूत्रों की माने तो अब नए अध्यक्ष के नाम के तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया, वेणुगोपाल, अशोक गहलोत और प्रमोद तिवारी के नाम की चर्चा चल रही है। इन चार नामो में ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रमोद तिवारी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है। दोनों ही दस जनपथ के विश्वासपात्र हैं और अच्छी हिंदी बोल सकते हैं।

दरअसल दस जनपथ का मानना है कि प्रमोद तिवारी को अध्यक्ष बनाये जाने से उत्तर प्रदेश में बड़ा फर्क पड़ेगा। प्रमोद तिवारी को अध्यक्ष बनाये जाने से उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को संजीवनी मिल सकती है। सूत्रों की माने लोकसभा का सत्र शुरू होने से पहले पहले कांग्रेस अध्यक्ष का नाम तय होना है। दरअसल इस वर्ष कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावो को ध्यान में रखकर पार्टी जल्द से जल्द नए अध्यक्ष का चुनाव कर लेना चाहती है। जिससे संगठन में पहले से तय फेर बदल की जा सके।

खबर है कि दस जनपथ फिलहाल यह भी सोच रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त नेतृत्व शुरू किया जाए और पार्टी में एक नहीं बल्कि कम से कम चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाएँ। सूत्रों ने कहा कि इन चार अध्यक्षों में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समुदाय से जुड़े कांग्रेस नेताओं को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की कमान सौंपी जाए। चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाये जाने की स्थति में ज्योतिरादित्य सिंधिया, गुलाम नबी आज़ाद, एके एंटनी और नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष की कमान सौंपी जा सकती है।

मत्रिमंडल विस्तार का नया पैंतरा अपना रहे कमलनाथ

कमलनाथ लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही प्रदेश में अपनी सरकार के अस्तित्व को लेकर सशंकित नज़र आ रहे हैं | उनकी इस चिंता को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा राज्यपाल से विधानसभा सत्र बुलाने और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा उनसे इस्तीफा मांग लिए जाने ने और बढ़ा दिया था| उनकी सरकार पर कोई आंच न आए इसके लिए अब वे मत्रिमंडल विस्तार का नया पैंतरा अपना रहे हैं |

दरअसल, प्रदेश की कमलनाथ सरकार बसपा, सपा और निर्दलीय की बैसाखी पर अपनी सरकार छह माह से चला रही है और भाजपा की निगाह इस सरकार की बैसाखी को हटाने पर लगी हुई है। कहीं कोई गड़बड़ी न हो, इसे लेकर अब मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली में है। लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन कई मंत्रियों के क्षेत्र में रहा, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ के रडार पर कुछ मंत्री बने हुए हैं। दिल्ली दौरे का मकसद प्रधानमंत्री से मिलने के अलावा कांग्रेस आलाकमान से मिलकर मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों की छुट्टी, निगम मंडल, प्राधिकरण में नियुक्तियों का रास्ता भी कमलनाथ साफ करना चाहते हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के करीब आधा दर्जन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। कांग्रेस के कुछ विधायकों को निगम मंडल में उपकृत किया जा सकता है। निर्दलीय विधायक सुरेंद्रसिंह ठाकुर शेरा खुलकर मंत्री बनने की बात कह रहे हैं। कमलनाथ ने वर्तमान प्रदेश कांग्रेस और सरकार की हालत को लेकर भी कांग्रेस आलाकमान को बताया है।

गौरतलब है कि कमलनाथ ने कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाक़ात की थी। उन्होंने प्रदेश में रुके हुए विकास और केंद्र सरकार के बजट पर भी चर्चा की थी|

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते कमलनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विधानसभा चुनाव लड़ा गया था और 114 विधानसभा सीटें कांग्रेस ने जीती। उसी के बाद बसपा, सपा और निर्दलीयों के सहयोग से कमलनाथ मुख्यमंत्री बने और अपनी सरकार बनाई। विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव समीप थे इसलिए कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद में बदलाव नहीं किया था। कमलनाथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री बने रहे। लोकसभा चुनाव में प्रदेशभर में कांग्रेस की करारी हार हुई और उसी के बाद प्रदेश अध्यक्ष में बदलाव की बात भी उठी।

कांग्रेस आलाकमान राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्यप्रदेश की कमान सौंपने के लिए दो कदम आगे बढ़ाए तो कमलनाथ और दिग्विजयसिंह रोड़ा बन रहे हैं| वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया भी प्रदेश अध्यक्ष बनने के पहले अपनी शर्त रख रहे हैं। वे प्रदेश अध्यक्ष पद पर फ्री हैंड चाहते हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक, मंत्री और अन्य नेताओं ने खुलकर सिंधिया को गुना लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी अध्यक्ष बनाने की पैरवी की। मुख्यमंत्री कमलनाथ और राजसभा सांसद दिग्विजय सिंह दोनों ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के फेवर में नहीं है और दिग्विजयसिंह को ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर राजनीतिक विरोधी माना जाता है।

इधर ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम के साथ कमलनाथ ने अपने कुछ मंत्री में से ही सामाजिक गणित के आधार पर नाम प्रदेश अध्यक्ष के लिए आगे किए हैं। दलित नेता के रूप में सज्जन सिंह वर्मा और आदिवासी नेता के रूप में बाला बच्चन का नाम आगे किया गया है। दोनों ही अभी मंत्री है। तीसरे विकल्प के रूप में दिग्विजय सिंह की पसंद मंत्री जीतू पटवारी है, जो अभी कार्यवाहक अध्यक्ष भी है।

शेयर करें :

इसे भी पढ़ें...

राहुल ने जारी किया श्वेतपत्र, बोले- तीसरी लहर की तैयारी करे सरकार

नई दिल्ली 22 जून 2021 । कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस …