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पत्रकारों को लेकर मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कमलनाथ का बड़ा बयान

भोपाल 1 जनवरी 2019 । पत्रकारों को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक बड़ा बयान दिया है कमलनाथ ने कहा- नारद की तरह काम करें पत्रकार। कमलनाथ ने अपनी घोषणा में कहा की सच की आवाज को बुलंद करने वाले पत्रकारों पर दिनोंदिन हमले तेज होते जा रहे हैं। भारत को पत्रकारों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक देशों की रैंक में रखा गया है। देश में हर साल सैकड़ों पत्रकार रिपोर्टिंग करते वक्त अपनी जान गंवा देते हैं। न्यूज कवर करते समय पत्रकारों को डराना-धमकाना आम बात हो गई है। लेकिन अब पत्रकारों को इस तरह की धमकियां देने वालों की खैर नहीं अगर अब किसी ने पत्रकारों से अभद्रता की तो उसे जेल जाना पड़ सकता है।

होगा 50 हजार रुपये तक का जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद एमपी के सीएम कमलनाथ जी ने घोषणा कर दी है की जो भी पत्रकारों से अभद्रतापूर्वक व्यवहार करेगा या धमकाने की कोशिश करेगा उस पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और साथ ही उसे तीन साल तक की जेल भी हो सकती है, कमलनाथ ने कहा की धमकी के आरोप में गिरफ्तार लोगों को आसानी से जमानत भी नहीं मिलेगी. इसलिए पत्रकारों से किसी भी प्रकार की अभद्रता न करें और पत्रकारों को सम्मान दें।
पिछले दिनों महाराष्ट्र में मीडियाकर्मियों पर हिंसा या मीडिया कर्मियों एवं मीडिया संस्थानों की संपत्तियों का नुकसान पहुंचाया गया था पत्रकारों पर हमलों के अधिकांश मामले सामने आते ही रहते है। पिछले साल मध्य प्रदेश में एक हिन्दी दैनिक के लिए कार्य करने वाले एक पत्रकार की अज्ञात बदमाशों ने बिल्हौर में नगर पालिका बाजार के निकट हत्या कर दी थी। वहीं इस वर्ष अप्रैल में एक टीवी पत्रकार को, दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आये अज्ञात बदमाशों ने उनके गाजियाबाद के कविनगर स्थित आवास के बाहर गोली मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। सीएम कमलनाथ का कहना है कि अगर किसी पत्रकार को किसी भी तरह की परेशानी होती है तो उनसे तुरंत संपर्क करे धमकाने वाले व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर जेल भेजा जाएगा सीएम कमलनाथ जी ने सख्त लहजे में कहा पत्रकारों से मान सम्मान से बात करिए वर्ना आपको महंगा पड़ सकता हैं।

मप्र में बदल सकता है कलेक्‍टर पद का नाम, कमलनाथ बोले-ये अंग्रेजों के समय का चलन

कलेक्टर पद का नाम ‘डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटर’ होना चाहिए और इस बारे में विचार चल रहा है. मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार अपने गृह जिले छिन्दवाड़ा के दौरे पर आये कमलनाथ ने संभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कहा, ‘‘कलेक्टर पद का नाम अंग्रेजी में अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है. मैंने लोगों से सुझाव मांगा है कि यह क्यों कलेक्टर होना चाहिए. मैंने जिले के कलेक्टरों से ही कहा है कि उनके पद का नया नाम क्या होना चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘डीसी (डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर) क्या होता है. यह भी मुझे नहीं चाहिए.’ कमलनाथ ने कहा, ‘कलेक्टर पद का नाम ‘डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेटर’ होना चाहिए.’ इससे पहले, मुख्यमंत्री बनने के बाद वह भोपाल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में भी कह चुके हैं कि कलेक्टर पद का नाम ठीक नहीं है. यह अंग्रेजों के समय से चला आ रहा है और आज के जमाने में इस पद के हिसाब से ठीक शब्द नहीं है.

उन्होंने जिले के आला प्रशासनिक अधिकारी को कलेक्टर कहे जाने पर तंज कसते हुए कहा था कि कलेक्टर क्या कलेक्ट (इकट्ठा) करता है, जो उसे कलेक्टर कहा जाए. क्या वह टिकट कलेक्ट करता है या अन्य कुछ चीज कलेक्ट करता है, जो उसे कलेक्टर कहें. इस पद का नाम बदला जाना चाहिए.

जानकारों का मानना है कि देश में ब्रिटिश राज के दौरान भारत के पहले गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने वर्ष 1772 में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर पद की शुरूआत हुई थी. उस दौरान इंडियन सिविल सर्विसेज के सदस्य ही डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर हुआ करते थे, जबकि देश की आजादी के बाद भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर बनते हैं.

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